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Haryana: हिसार एयरपोर्ट को मिला IFR लाइसेंस, रात व खराब मौसम में भी हो सकेगी लैंडिंग; जानें क्या है नई तकनीक?
Tue, 24 Feb 2026 09:06 PM IST
शाहिल शर्मा
माई सिटी रिपोर्टर, हिसार
माई सिटी रिपोर्टर, हिसार
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Tue, 24 Feb 2026 09:06 PM IST
सार
आईएफआर तकनीक के बाद पायलट खराब मौसम या कम दृश्यता की स्थिति में उड़ान भर सकेंगे। वहीं, वीएफआर तकनीक में पायलट को बाहरी संकेतों पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
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हिसार एयरपोर्ट
- फोटो : संवाद
विस्तार
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने हिसार के महाराजा अग्रसेन एयरपोर्ट को इंस्ट्रूमेंट फ्लाइट रूल्स आईएफआर लाइसेंस प्रदान किया है। अब हिसार एयरपोर्ट पर रात के समय भी हवाई जहाज की लैंडिंग हो सकेगी। खराब मौसम में भी एयरपोर्ट से हवाई जहाज आसानी से उड़ान भर सकेंगी। अभी तक महाराजा अग्रसेन एयरपोर्ट पर विजुअल फ्लाइट रूल्स वीएफआर का प्रयोग किया जा रहा था। अब आईएफआर लाइसेंस मिलने के बाद 1200 मीटर की दृश्यता पर भी हवाई सेवाओं का संचालन हो सकेगा। हिसार एयरपोर्ट अब 24 घंटे संचालित किया जा सकेगा।
डीजीसीए ने दी अनुमति
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण हिसार हवाई अड्डा के विमानपत्तन निदेशक ओपी सैनी ने बताया कि 6-7 नवंबर 2025 को डीजीसीए की ओर से किए गए व्यापक निरीक्षण के दौरान कुछ टिप्पणियां दर्ज की गई थीं। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने नागरिक उड्डयन विभाग हरियाणा के साथ समन्वय स्थापित करते हुए सभी बिंदुओं पर काम किया। इसके बाद डीजीसीए को दूसरी विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट भेजी गई। विस्तृत रिपोर्ट की समीक्षा के बाद 24 फरवरी को डीजीसीए ने आईएफआर के लिए अनुमति प्रदान कर दी है।
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डीजीसीए ने दी अनुमति
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण हिसार हवाई अड्डा के विमानपत्तन निदेशक ओपी सैनी ने बताया कि 6-7 नवंबर 2025 को डीजीसीए की ओर से किए गए व्यापक निरीक्षण के दौरान कुछ टिप्पणियां दर्ज की गई थीं। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने नागरिक उड्डयन विभाग हरियाणा के साथ समन्वय स्थापित करते हुए सभी बिंदुओं पर काम किया। इसके बाद डीजीसीए को दूसरी विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट भेजी गई। विस्तृत रिपोर्ट की समीक्षा के बाद 24 फरवरी को डीजीसीए ने आईएफआर के लिए अनुमति प्रदान कर दी है।
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वीएफआर और आईएफआर तकनीक में अंतर
आईएफआर तकनीक के बाद पायलट खराब मौसम या कम दृश्यता की स्थिति में उड़ान भर सकेंगे। वहीं, वीएफआर तकनीक में पायलट को बाहरी संकेतों पर ही निर्भर रहना पड़ता है। वर्तमान में वीएफआर परिचालन के लिए न्यूनतम 5 हजार मीटर की दृश्यता आवश्यक है, जबकि तकनीक के आईएफआर में अपग्रेड होने के बाद 1200 मीटर तक की दृश्यता में भी परिचालन संभव हो सकेगा।
आईएफआर में नाइट लैंडिंग सुविधा भी शामिल होती है। मतलब आईएफआर में अपग्रेड होने के बाद हिसार एयरपोर्ट पर रात के समय में भी हवाई उड़ान भर सकेंगे और उतर सकेंगे। अब कम दृश्यता की स्थिति में भी सुरक्षित और लचीला संचालन संभव होगा। कम दृश्यता व खराब मौसम के कारण अब हिसार हवाई अड्डे पर उड़ानों के डायवर्जन और रद्द होने की जरूरत नहीं आएगी। यह निकटवर्ती प्रमुख हवाई अड्डों जैसे आईजीआई एयरपोर्ट दिल्ली और जयपुर एयरपोर्ट से डायवर्ट होने वाली उड़ानों को संभालने में सक्षम होगा।
आईएफआर तकनीक के बाद पायलट खराब मौसम या कम दृश्यता की स्थिति में उड़ान भर सकेंगे। वहीं, वीएफआर तकनीक में पायलट को बाहरी संकेतों पर ही निर्भर रहना पड़ता है। वर्तमान में वीएफआर परिचालन के लिए न्यूनतम 5 हजार मीटर की दृश्यता आवश्यक है, जबकि तकनीक के आईएफआर में अपग्रेड होने के बाद 1200 मीटर तक की दृश्यता में भी परिचालन संभव हो सकेगा।
आईएफआर में नाइट लैंडिंग सुविधा भी शामिल होती है। मतलब आईएफआर में अपग्रेड होने के बाद हिसार एयरपोर्ट पर रात के समय में भी हवाई उड़ान भर सकेंगे और उतर सकेंगे। अब कम दृश्यता की स्थिति में भी सुरक्षित और लचीला संचालन संभव होगा। कम दृश्यता व खराब मौसम के कारण अब हिसार हवाई अड्डे पर उड़ानों के डायवर्जन और रद्द होने की जरूरत नहीं आएगी। यह निकटवर्ती प्रमुख हवाई अड्डों जैसे आईजीआई एयरपोर्ट दिल्ली और जयपुर एयरपोर्ट से डायवर्ट होने वाली उड़ानों को संभालने में सक्षम होगा।