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Hisar News: बेटा गया तो फिर चला ही गया

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 25 Oct 2026 12:02 AM IST
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अमित भारद्वाज
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हिसार। सालासर जाने की जिद कर घर से निकला करण फिर कभी नहीं लौटा। हादसे में दो श्रद्धालुओं की मौत के बाद पिता राजेंद्र ने उसे सालासर जाने से रोका था लेकिन वह नहीं माना।
पिता को क्या पता था कि बेटे को जाने की इजाजत देना उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा पछतावा बन जाएगा। सुबह उठे तो करण मां से पैसे लेकर रवाना हो चुका था। अब रेलवे स्टेशन पर चाकू मारकर उसकी हत्या के बाद पिता बार-बार यही कहकर बिलख रहे हैं कि बेटा गया तो फिर चला ही गया।
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राजेंद्र ने बताया कि 17 अक्तूबर की रात करण उनके पास आया और हाथ-पैर दबाने लगा। उसने कहा कि पापा, मैं सालासर जाना चाहता हूं। राजेंद्र ने उसे जाने से मना कर दिया। इस पर करण ने कहा कि पापा, बस इस साल जाने दो, अगली बार नहीं जाऊंगा। आखिरकार उसने पिता से जबरदस्ती हां करवा ली। राजेंद्र ने उसे समझाया कि दिन में ही सफर करना और रात को किसी शिविर में रुक जाना। अगली सुबह जब वे उठे तो करण मां से पैसे लेकर सालासर के लिए रवाना हो चुका था। वह जाने से पहले उन्हें जगा भी नहीं सका। राजेंद्र को इस बात का मलाल है कि वह बेटे का चेहरा आखिरी बार भी नहीं देख सके।
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अग्निवीर की कर रहा था तैयारी

राजेंद्र ने बताया कि 12वीं पास करने के बाद करण ने एक साल तक अग्निवीर परीक्षा की तैयारी की थी। इस साल वह एक जगह परीक्षा देने भी गया था। उसका शारीरिक परीक्षण भी होना था। इसी बीच उसने आईटीआई में इलेक्ट्रीशियन ट्रेड में दाखिला ले लिया था। करण कहता था कि अग्निवीर की तैयारी से लौटने तक उसके पास आईटीआई का डिप्लोमा होगा तो उसे आसानी से नौकरी मिल जाएगी।

तीन भाई-बहनों में सबसे छोटा था करण

करण तीन भाई-बहनों में सबसे छोटा था। सबसे बड़ा भाई अर्जुन है, जबकि बहन पूजा उससे बड़ी है। अर्जुन एक दुकान पर नौकरी करता है और पूजा बीए कर रही है। करण के पिता ईंट-भट्ठे पर मुंशी का काम करते हैं। राजेंद्र ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी और बेटी को हादसे के बारे में नहीं बताया है। उन्हें केवल इतना बताया गया है कि करण को थोड़ी चोट लगी है और वह अस्पताल में है। पिता को आशंका है कि हादसे की पूरी जानकारी मिलने पर वे इसे सहन नहीं कर पाएंगे।

चुपचाप देखती रही भीड़

रेलवे स्टेशन पर जिस समय यह वारदात हुई, वहां यात्रियों की भारी भीड़ थी। इसके बावजूद किसी ने बीच-बचाव का प्रयास नहीं किया और लोग तमाशबीन बने रहे। अगर किसी ने हिम्मत दिखाकर हस्तक्षेप किया होता तो शायद करण की जान बच सकती थी।


गुस्से पर काबू पाना सीखें

मनोचिकित्सक डॉ. शालू ढांडा ने बताया कि अत्यधिक गुस्सा करने की प्रवृत्ति एक दिन में विकसित नहीं होती, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ती है। इस पर नियंत्रण पाने के लिए एंगर मैनेजमेंट सीखना चाहिए। अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल खेल जैसी सकारात्मक गतिविधियों में करना चाहिए। गुस्से को नियंत्रित करने के लिए योग और ध्यान करें, उल्टी गिनती गिनें और गहरी सांस लेने जैसी गतिविधियां अपनाएं।
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