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चूहे कुतर रहे हैं निगम लाईब्रेरी की पुस्तकें
ब्यूरो/अमर उजाला/हिसार
Updated Sat, 23 Apr 2016 12:41 AM IST
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पुस्तक
- फोटो : Bureau
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कहते हैं पुस्तक से बढ़कर कोई सच्चा साथी व सखा नहीं होता है। इन पुस्तकों में महापुरुषों की जीवनी, संदेश और मूल्यों को पढ़कर नई पीढ़ी तैयार होती है। उन्हीं पुस्तकों को चूहे कुतर रहे हैं। वर्ष 2014 में ही नई बनी मॉडल टाऊन की मुंशी प्रेमचंद लाईब्रेरी की कुछ ऐसी ही स्थिति है। यहां किताबों के लिए नए रैक नहीं आए हैं। किताबें पुरानी लाइब्रेरी में पुरानी लकड़ी की अलमारियों में ही पड़ी हैं।
जिन्हें चूहे कुतर रहे हैं। यही नहीं इस नई लाईब्रेरी में पीने के पानी तक की सुविधा नहीं है। लाइब्रेरियन सुरेंद्र सिंह के मुताबिक उन्होंने कई बार प्रशासन को रैक, पानी उपयुक्त समय आदि को लेकर पत्र लिखा है। लेकिन प्रशासन इस मामले में सुस्ती दिखा रहा है।
पुस्तक बिना सूना जीवन
पुस्तकें हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इनके बिना जीवन की कल्पना करना भी मुश्किल है। पुस्तकें ही है जो हमारी रचनात्मतक और सर्जनात्मक शक्ति को बढ़ाती है। आज जब इंटरनेट ने पूरी दुनिया को इंसान की मुट्ठी में ला दिया है। तब भी पुस्तकों की प्रासंगिकता घटी नहीं है। हालांकि इंटरनेट के आने से ऑन लाइन पुस्तकें और ई-लाईब्रेरी के रूप ने वास्तविक किताबों के पाठकों की संख्या को कम जरूर कर दिया है।
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जिले में चार निगम लाइब्रेरी, एक जिला लाइब्रेरी के अतिरिक्त तीनों विश्वविद्यालयों की लाइब्रेरी प्रमुख हैं। इसके अलावा शहर में करीब 25 से अधिक प्राईवेट लाइब्रेरी है।
- मॉडल टाऊन में मुंशी प्रेमचंद पुस्तकालय
- शांति नगर में महाकवि कालिदास पुस्तकालय
- पटेल नगर पुस्तकालय एवं वाचनालय
- भारत नगर वाचनालय
-जिला पुस्तकालय,पंचायत भवन
-नेहरू पुस्तकालय ,एचएयू
-गुरू जंभेश्वर पुस्तकालय,जीजेयू
अधिकांश की हालत खस्ता
जिले की दो महत्वपूर्ण विश्वविद्यालयों जीजेयू और एचएयू की लाइब्रेरी को छोड़कर हमारे शहर की अन्य लाइब्रेरियों में मुलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं। हमारे शहर में पुस्तकें पढ़ने के लिए नगर निगम की चार लाइब्रेरी हैं। लेकिन उनके हालात ऐसे हैं कि उनमें आने वालों की संख्या कुल मिलाकर भी 100 नहीं बैठती। ऐसा नहीं है कि पढ़ने वालों की कमी हैं। बल्कि उन लाइब्रेरियों में पढ़ने लायक सुविधाएं ही नहीं हैं।
विद्यार्थियों के समयानुरूप नहीं खुलती निगम की लाइब्रेरी
लाइब्रेरियों में विद्यार्थियों की संख्या कम होने का दूसरा मुख्य कारण विद्यार्थियों के समय अनुरूप लाइब्रेरी न खुलना है। निगम की इन लाइब्रेरी का समय फिलहाल सुबह साढ़े सात से ग्यारह है जब विद्यार्थियों के अपने स्कूल और कॉलेज में पढ़ाई का समय होता है। वहीं शाम का समय चार बजे से लेकर शाम छह बजे तक है।
प्राईवेट लाइब्रेरियों में जाना पड़ता
शहर की लाइब्रेरियों में विभिन्न विश्वविद्यालयों, कॉलेजों के विद्यार्थियों के अलावा वे विद्यार्थी भी होते हैं जो दूर-दराज के इलाकों से केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए आते हैं। ये विद्यार्थी एचसीएस,आईएएस, एसएससी, सीजीएल आदि की तैयारी करते हैं। सरकारी लाइब्रेरियों के बिगड़े हालात के कारण इन्हें शहर में खुली हुई 25 से अधिक प्राईवेट लाइब्रेरियों का रूख करना पड़ता है।
शहर को जल्द मिलेगी ई-लाईब्रेरी
नगर निगम ने एक ई लाईब्रेरी के लिए प्रपोजल बनाकर चण्डीगढ़ भेजा हुआ है। निगम काफी समय से इसकी तैयारी कर रहा था। यह लाइब्रेरी मॉडल टाऊन की लाईब्ररी के साथ या सैनिक भवन को तोड़कर बनाए गए सीनियर सिटीजन क्लब के साथ अटैच की जा सकती है।
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जिन्हें चूहे कुतर रहे हैं। यही नहीं इस नई लाईब्रेरी में पीने के पानी तक की सुविधा नहीं है। लाइब्रेरियन सुरेंद्र सिंह के मुताबिक उन्होंने कई बार प्रशासन को रैक, पानी उपयुक्त समय आदि को लेकर पत्र लिखा है। लेकिन प्रशासन इस मामले में सुस्ती दिखा रहा है।
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पुस्तक बिना सूना जीवन
पुस्तकें हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इनके बिना जीवन की कल्पना करना भी मुश्किल है। पुस्तकें ही है जो हमारी रचनात्मतक और सर्जनात्मक शक्ति को बढ़ाती है। आज जब इंटरनेट ने पूरी दुनिया को इंसान की मुट्ठी में ला दिया है। तब भी पुस्तकों की प्रासंगिकता घटी नहीं है। हालांकि इंटरनेट के आने से ऑन लाइन पुस्तकें और ई-लाईब्रेरी के रूप ने वास्तविक किताबों के पाठकों की संख्या को कम जरूर कर दिया है।
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जिले में चार निगम लाइब्रेरी, एक जिला लाइब्रेरी के अतिरिक्त तीनों विश्वविद्यालयों की लाइब्रेरी प्रमुख हैं। इसके अलावा शहर में करीब 25 से अधिक प्राईवेट लाइब्रेरी है।
- मॉडल टाऊन में मुंशी प्रेमचंद पुस्तकालय
- शांति नगर में महाकवि कालिदास पुस्तकालय
- पटेल नगर पुस्तकालय एवं वाचनालय
- भारत नगर वाचनालय
-जिला पुस्तकालय,पंचायत भवन
-नेहरू पुस्तकालय ,एचएयू
-गुरू जंभेश्वर पुस्तकालय,जीजेयू
अधिकांश की हालत खस्ता
जिले की दो महत्वपूर्ण विश्वविद्यालयों जीजेयू और एचएयू की लाइब्रेरी को छोड़कर हमारे शहर की अन्य लाइब्रेरियों में मुलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं। हमारे शहर में पुस्तकें पढ़ने के लिए नगर निगम की चार लाइब्रेरी हैं। लेकिन उनके हालात ऐसे हैं कि उनमें आने वालों की संख्या कुल मिलाकर भी 100 नहीं बैठती। ऐसा नहीं है कि पढ़ने वालों की कमी हैं। बल्कि उन लाइब्रेरियों में पढ़ने लायक सुविधाएं ही नहीं हैं।
विद्यार्थियों के समयानुरूप नहीं खुलती निगम की लाइब्रेरी
लाइब्रेरियों में विद्यार्थियों की संख्या कम होने का दूसरा मुख्य कारण विद्यार्थियों के समय अनुरूप लाइब्रेरी न खुलना है। निगम की इन लाइब्रेरी का समय फिलहाल सुबह साढ़े सात से ग्यारह है जब विद्यार्थियों के अपने स्कूल और कॉलेज में पढ़ाई का समय होता है। वहीं शाम का समय चार बजे से लेकर शाम छह बजे तक है।
प्राईवेट लाइब्रेरियों में जाना पड़ता
शहर की लाइब्रेरियों में विभिन्न विश्वविद्यालयों, कॉलेजों के विद्यार्थियों के अलावा वे विद्यार्थी भी होते हैं जो दूर-दराज के इलाकों से केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए आते हैं। ये विद्यार्थी एचसीएस,आईएएस, एसएससी, सीजीएल आदि की तैयारी करते हैं। सरकारी लाइब्रेरियों के बिगड़े हालात के कारण इन्हें शहर में खुली हुई 25 से अधिक प्राईवेट लाइब्रेरियों का रूख करना पड़ता है।
शहर को जल्द मिलेगी ई-लाईब्रेरी
नगर निगम ने एक ई लाईब्रेरी के लिए प्रपोजल बनाकर चण्डीगढ़ भेजा हुआ है। निगम काफी समय से इसकी तैयारी कर रहा था। यह लाइब्रेरी मॉडल टाऊन की लाईब्ररी के साथ या सैनिक भवन को तोड़कर बनाए गए सीनियर सिटीजन क्लब के साथ अटैच की जा सकती है।