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स्वर्ग’ की राह में ‘नरक’ से भी बदतर जिंदगी
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
Updated Wed, 19 Nov 2014 12:58 AM IST
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बरवाला स्थित संत रामपाल के आश्रम में भक्तों को बंधक बनाकर रखने की बात सामने आई है। मंगलवार सुबह करीब साढे़ चार बजे लगभग 70 श्रद्धालु सतलोक आश्रम से मौका पाकर भाग निकले।
इनमें अधिकतर महिलाएं थीं। उन्होंने बताया कि आश्रम के अंदर रामपाल के तथाकथित कमांडर लोगों को डरा रहे हैं कि बाहर जाओगे तो पुलिस तुम्हारा एनकाउंटर कर देगी।
यहीं रुके रहो संत रामपाल तुम्हारी रक्षा करेंगे। श्रद्धालुओं ने बताया कि अगर आश्रम में और देर रुकते तो वैसे ही मर जाते। वे आज के बाद फिर कभी आश्रम की ओर देखेंगी भी नहीं।
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उधर, सतलोक आश्रम से निकलकर जींद रेलवे स्टेशन अपने 12 वर्षीय बेटे के साथ पहुंचे दिल्ली की मंगोलपुरी निवासी 45 वर्षीय राजमल की आंखें भर आईं।
उन्होंने बताया कि वह पांच दिन पहले आश्रम में आए थे। उस समय पुलिस तो तैनात थी, लेकिन मामला इतना गंभीर नहीं था।
आश्रम के अंदर की स्थिति बताते हुए राजमल की आंखें भर आईं। उन्होंने कहा कि लोग स्वर्ग की प्राप्ति के लिए आश्रम में आते हैं, लेकिन पिछले पांच दिन नरक से भी बदतर गुजरे हैं।
प्रशासन द्वारा बिजली पानी बंद करने के बाद यहां लोगों को भूमिगत पानी ही मिल रहा था। एकदम कड़वा जहर पानी। राजमल ने बताया कि दो दिन पहले वे आश्रम से निकले के लिए तैयार हुए, लेकिन उन्हें डराया गया।
आश्रम के लोगों ने बताया कि बाहर पुलिस और आश्रम से निकलने वाले लोगों को जान से मार दिया जाएगा। आखिरकार मंगलवार को वे अपनी दवाओं के खाली पत्ते दिखाकर बाहर जाने के लिए गिड़गड़ाए।
राजमल ने बताया कि आश्रम के लोगों से कहा गया कि वे टीबी के मरीज हैं और यदि दवा नहीं ली तो उनकी मौत भी हो सकती है। इसके बाद आश्रम से बाहर जाने की अनुमति मिली।
हर पल मौत का सामना
वहीं दिल्ली निवासी मेहर सिंह भी किसी तरह से आश्रम से निकलने में सफल रहे। मेहर सिंह के अनुसार हर पल मौत से सामना होता था, लेकिन अब जान बच गई है।
आठ बजे के बाद कोई नहीं आया
सुबह पूरी तरह दिन होने के बाद कोई भी श्रद्धालु आश्रम से बाहर नही आया। रात के अंधेरे का फायदा उठाकर ही कई लोग बाहर भागे थे लेकिन जैसे-जैसे दिन बढ़ता गया कोई भी श्रद्धालु आश्रम से बाहर नहीं आ सका।
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इनमें अधिकतर महिलाएं थीं। उन्होंने बताया कि आश्रम के अंदर रामपाल के तथाकथित कमांडर लोगों को डरा रहे हैं कि बाहर जाओगे तो पुलिस तुम्हारा एनकाउंटर कर देगी।
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यहीं रुके रहो संत रामपाल तुम्हारी रक्षा करेंगे। श्रद्धालुओं ने बताया कि अगर आश्रम में और देर रुकते तो वैसे ही मर जाते। वे आज के बाद फिर कभी आश्रम की ओर देखेंगी भी नहीं।
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उधर, सतलोक आश्रम से निकलकर जींद रेलवे स्टेशन अपने 12 वर्षीय बेटे के साथ पहुंचे दिल्ली की मंगोलपुरी निवासी 45 वर्षीय राजमल की आंखें भर आईं।
उन्होंने बताया कि वह पांच दिन पहले आश्रम में आए थे। उस समय पुलिस तो तैनात थी, लेकिन मामला इतना गंभीर नहीं था।
आश्रम के अंदर की स्थिति बताते हुए राजमल की आंखें भर आईं। उन्होंने कहा कि लोग स्वर्ग की प्राप्ति के लिए आश्रम में आते हैं, लेकिन पिछले पांच दिन नरक से भी बदतर गुजरे हैं।
प्रशासन द्वारा बिजली पानी बंद करने के बाद यहां लोगों को भूमिगत पानी ही मिल रहा था। एकदम कड़वा जहर पानी। राजमल ने बताया कि दो दिन पहले वे आश्रम से निकले के लिए तैयार हुए, लेकिन उन्हें डराया गया।
आश्रम के लोगों ने बताया कि बाहर पुलिस और आश्रम से निकलने वाले लोगों को जान से मार दिया जाएगा। आखिरकार मंगलवार को वे अपनी दवाओं के खाली पत्ते दिखाकर बाहर जाने के लिए गिड़गड़ाए।
राजमल ने बताया कि आश्रम के लोगों से कहा गया कि वे टीबी के मरीज हैं और यदि दवा नहीं ली तो उनकी मौत भी हो सकती है। इसके बाद आश्रम से बाहर जाने की अनुमति मिली।
हर पल मौत का सामना
वहीं दिल्ली निवासी मेहर सिंह भी किसी तरह से आश्रम से निकलने में सफल रहे। मेहर सिंह के अनुसार हर पल मौत से सामना होता था, लेकिन अब जान बच गई है।
आठ बजे के बाद कोई नहीं आया
सुबह पूरी तरह दिन होने के बाद कोई भी श्रद्धालु आश्रम से बाहर नही आया। रात के अंधेरे का फायदा उठाकर ही कई लोग बाहर भागे थे लेकिन जैसे-जैसे दिन बढ़ता गया कोई भी श्रद्धालु आश्रम से बाहर नहीं आ सका।