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Hisar News: स्वास्थ्य विभाग करेगा एचआईवी आंकड़ों का विश्लेषण

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 29 Aug 2025 01:50 AM IST
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Health department will analyze HIV data
हिसार। जिले में ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) संक्रमित मरीजों की संख्या सैकड़ों में है जबकि जांच के दायरे में आए संदिग्धों का आंकड़ा हजारों में है। पीड़ित की पहचान की गोपनीयता संबंधी कानून के कारण स्वास्थ्य विभाग इसके आंकड़े भी गोपनीय बता रहा है। अब विभाग इस प्रक्रिया की कवायद कर पीड़ितों की संख्या जुटाने का प्रयास कर रहा है।
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जिले के अस्पतालाें में ऐसे पंजीकृत मरीजों की संख्या करीब 4,200 है। पिछले साल की रिपोर्ट की मुताबिक इनमें से करीब 350 मरीज एचआईवी संक्रमित पाए गए थे। इन मरीजों का इलाज एंटी रेट्रो वायरल विधि (एआरटी) से कराया जा रहा है। इसके लिए एआरटी सेंटर बनाया गया है। एचआईवी की पुष्टि न होने पर निगेटिव जांच रिपोर्ट वाले मरीजों की भी काउंसिलिंग एकीकृत परामर्श और परीक्षण केंद्र (आईसीटीसी) में की जा रही है ताकि वह भविष्य में भी इस खतरे की जद में आने से बच सकें।
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इस संक्रमण के चार कारण होते हैं। इनमें असुरक्षित यौन संबंध मुख्य है। दूसरा कारण कई संक्रमित मरीजों के लिए एक ही सुई का इस्तेमाल करना है। यह मरीज काला पीलिया यानी हेपेटाइटिस बी और सी से भी संक्रमित होते हैं। सामूहिक रूप से हेरोइन या चिट्टा लेने के लिए भी कई नशापीड़ित एक ही सुई का प्रयोग करते हैं।
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तीसरा कारण है संक्रमित रक्त चढ़ाना। इससे बचने के लिए लाइसेंसशुदा रक्तकोष से मिलने वाला रक्त ही मरीजों को चढ़ाया जाता है। चौथा कारण है संक्रमित गर्भवती का प्रसव। इन मामलों में संक्रमण का खतरा करीब 40 तक प्रतिशत रहता है। संक्रमित गर्भवती के बच्चे के संक्रमणमुक्त होने का औसत करीब 60 प्रतिशत है।


एचआईवी मरीजों की जांच और उपचार के लिए अस्पताल में संपूर्ण सुरक्षा केंद्र (एसएसटी) बनाया गया है। इसमें पंजीकृत तीन लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले राज्य के स्थायी निवासी संक्रमितों को 2,250 रुपये की मासिक आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। इन मरीजों की संख्या सार्वजनिक करने के लिए पहले आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा। इसके लिए जिलास्तरीय समिति बनाई जा रही है।

- डॉ. सुशील गर्ग, नोडल अधिकारी और प्रभारी, रक्तकोष, जिला अस्पताल, हिसार।
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