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लाभार्थी की सूची में नाम फिर भी जर्जर है मकान, बादलों की गर्जन सुनकर बढ़ जाती हैं धड़कनें

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 03 Jul 2022 12:03 AM IST
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he name in the beneficiary's list is still shabby, the heart beats on hearing the roar of clouds.
हिसार लघुसचिवालय के बाहर लाभार्थियों को आवासीय योजना का लाभ दिलाने की मांग करते ढंढूर गांव के नि? - फोटो : Hisar
संदीप रामायण
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हिसार। पक्के व आलीशान मकानों में रहने वाले लोग बेसब्री से मानसून का इंतजार कर रहे हैं, ये लोग बारिश का आनंद लेते हैं। वहीं, दूसरी ओर कच्चे व जर्जर मकानों में रहने वाले लोगों की बादल दिखते ही धड़कनें बढ़ने लगती हैं। डर सताता है कहीं मकान बारिश में गिर न जाए। बारिश में उन्हें पलायन तक करना पड़ता है।
कच्चे मकानों में रहने वालों का कहना है कि उन्होंने सरकार की महत्वकांक्षी आवास योजनाओं के तहत आवेदन किए थे। योजना की लाभार्थी की सूची में नाम भी आया हुआ है लेकिन कई सालों से पहली किस्त का इंतजार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लोगों को तीन किस्तों में राशि मिलती है। ढंढूर गांव के ग्रामीणों का कहना है कि बादल की गरज के साथ हमारे जर्जर घरों की छत हिलती है। बारिश हमारे लिए आफत बनकर आती है। ऐसे हालातों में हम जिंदगी जी नहीं रहे बल्कि काट रहे हैं। योजना के लाभ के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन सरकारी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली व विभागीय गाइडलाइन के कारण इन आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। योजना के लाभार्थी की सूची में नाम आने पर कच्चे मकान तोड़कर किसी ने कर्ज लेकर नींव भरी तो कोई टीन-छप्पर में सिर छिपाने को मजबूर है।
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गौरतलब है कि वीरवार रात ढंढूर गांव में बारिश के दौरान कमरे की छत गिरने से दादी-पोती की मौत हो गई थी।
इस घटना के बाद ढंढूर गांव में कच्चे व जर्जर घरों में रहने को मजबूर लोग सहमे हुए हैं। उनको डर लग रहा है कि कहीं ऐसा कोई हादसा न हो जाए। संवाद
जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच रही मदद
ढंढूर गांव के एचएस राजेश ने बताया कि हमारे गांव में करीब 50 लोगों के घर जर्जर हो चुके हैं। उनको प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला है। एचएस राजेश ने आरोप लगाया है कि गांव के ही कुछ साधन संपन्न लोगों को इस योजना का लाभ मिल चुका है। उन्होंने बताया कि जरूरतमंद को लाभ क्यों नहीं मिल रहा है इसके कारणों की जांच होनी चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि स्पेशल टीम का गठन करके जांच की जाए।
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सरकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए डीसी के नाम सौंपा ज्ञापन
विभिन्न आवास योजनाओं को लाभ न मिलने के कारण ढंढूर गांव के लोगों ने शनिवार को हिसार लघु सचिवालय के सामने प्रदर्शन किया। ढंढूर गांव के महेंद्र सिंह, एचएस राजेश, राहुल कुमार, प्रेम कुमार आदि ने बताया कि हमारी सरकार से मांग है कि गांव के जिन जरूरतमंद लोगों को आवास योजना का लाभ नहीं मिल रहा है, इनको जल्द से जल्द लाभ दिलाया जाए। इसके साथ ही इन्होंने वीरवार रात हुए हादसे के पीड़ितों को आर्थिक मुआवजे की मांग भी की।
ढंढूर के लोगों से बातचीत
मैं दिव्यांग हूं, मेरा मकान जर्जर हैं। मैंने पक्का मकान बनाने के लिए एक साल से सरकारी योजना का आवेदन कर रखा है लेकिन मुुझे कोई लाभ नहीं मिल रहा है। - प्रेम कुमार
हमारा घर बहुत खराब हालात में है। बारिश के दिनों मेें हमें डर लगने लगता है। सरकार से मांग है कि हमें मकान बनाने के लिए रुपये रुपये दिए जाएं। - धोली देवी
हमारे मकान में दरार आई हुई है। छत भी कमजोर हो चुकी है। न ही हमें मकान बनाने के रुपये मिल रहे हैं। हम सरकार से गुहार लगाते हैं कि हमें आवास योजनाओं का लाभ दिलवाया जाए। - ओमप्रकाश
हमारे घर की छत कमजोर हो गई है। बारिश हमारे लिए मुसीबत बनकर आती है। हमारी सरकार से मांग है कि हमें पक्के मकान बनाने के लिए मुआवजा दिया जाए। - अनीता
हमारा घर नीचा हो गया है। बारिश का पानी घर के अंदर घुस जाता है। घर की छत भी टपकने लगती है। हम काफी परेशान हैं। हमारी आर्थिक मदद की जाए। - आनंद देवी
हमारे घर में दरार आई हुई है। जब हमारे गांव में छत गिरने से हादसा हुआ है, तब से हम घबराए हुए हैं। हमारे घरों की छत कमजोर है। हमारी सरकार से मांग है कि हमें जल्द से जल्द आर्थिक मुआवजा दिया जाएगा। - सलोचना देवी
योजना पर एक नजर
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत केंद्र सरकार कच्चे मकान को पक्का बनाने के लिए 1 लाख 38 हजार रुपये तीन किस्त में देती है। पहली किस्त 45000, दूसरी किस्त 60000 और तीसरी किस्त 33000 रुपये दिए जाते हैं। मकान का अलग अलग हिस्सा पूरा होने के बाद अगली किस्त दी जाती है। दूसरी व तीसरी किस्त के लिए लोगों को काफी लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।

पंजीकरण से स्वीकृति तक का ब्योरा
जिले में कुल 66 मकानों का लक्ष्य था
- 40 मकानों का पंजीकरण हो सका
- दस्तावेज जांच के बाद 38 आवेदन स्वीकृत किए
- 37 को पहली किस्त दी गई
-30 को दूसरी किस्त दी गई
-7 को ही तीसरी किस्त मिली है
- वर्ष 2020-21 में कुल 8 लोगों के मकान ही पूरे हो सके
- वर्ष 2021-22 में अब तक एक भी मकान का काम पूरा नहीं हो सका
वर्ष 2020-21 में कितने मकान स्वीकृत किए
खंड मकान
हिसार प्रथम 15
नारनौंद 29
उकलाना 01
हांसी द्वितीय 01
अग्रोहा 01
आदमपुर 08
बरवाला 04
हांसी प्रथम 07

जर्जर हुई मकान की छत। संवाद

जर्जर हुई मकान की छत। संवाद- फोटो : Hisar

ढंढूर गांव में अपने मकान की हालात दिखाती सलोचना देवी। संवाद

ढंढूर गांव में अपने मकान की हालात दिखाती सलोचना देवी। संवाद- फोटो : Hisar

अपना जर्जर मकान दिखाता ढंढूर का दिव्यांग का प्रेम कुमार। संवाद

अपना जर्जर मकान दिखाता ढंढूर का दिव्यांग का प्रेम कुमार। संवाद- फोटो : Hisar

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