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एचएयू : 4.65 करोड़ से बना सिंथेटिक ट्रैक 10 माह में ही उखड़ा, अब साई विशेषज्ञों से करवाएगा जांच

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 11 Oct 2021 12:15 AM IST
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HAU: Synthetic track made of 4.65 crores uprooted in 10 months, now SAI will get it investigated by experts
संदीप बिश्नोई
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हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) द्वारा विवि कैंपस में बनाया गया अंतरराष्ट्रीय स्तर का सिंथेटिक ट्रैक 10 माह में उखड़ने लगा है। इसके निर्माण पर करीब 4.65 करोड़ की लागत आई थी। ट्रैक पर रबड़ के दाने उखड़ने से धावक फिसलकर चोटिल हो चुके हैं।
एचएयू द्वारा भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के लिए बनवाए गए इस ट्रैक की गुणवत्ता की परख के लिए अब भारतीय खेल प्राधिकरण एक्सपर्ट से जांच करवाएगा। खिलाड़ियों ने बताया कि सिंथेटिक ट्रैक के भारी मात्रा में उखड़े दानों के कारणपानी की निकासी व्यवस्था चरमरा गई है। बारिश के दिनों में ट्रैक पानी खड़ा होने के कारण कीचड़ जैसी स्थिति बन गई थी। खिलाड़ियों के कोच ने कहा कि पुराना ट्रैक भले ही पुराना हो गया था, लेकिन इससे कई गुना अच्छा था। एचएयू को इस ट्रैक का मैनेजमेंट भी करना था, लेकिन एचएयू यह भी नहीं कर पा रही।
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मुख्यमंत्री ने नवंबर 2020 में किया था उद्घाटन
गिरी सेंटर में बनाए गए सिंथेटिक ट्रैक का उद्घाटन 29 नवंबर 2020 को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने किया था। ट्रैक बनाने के लिए अनुदान भारत सरकार के खेल मंत्रालय द्वारा दिया गया। यह राशि एचएयू की परिधि में खेलों को बढ़ावा देने के लिए खेलो इंडिया राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत प्रदान की गई थी। एचएयू की परिधि में भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के लिए बनाए गए इस ट्रैक का इस्तेमाल साई को ही करना था। ट्रैक बनाने का कांट्रेक्ट मुंबई की कंपनी के पास था, जबकि ट्रैक के निर्माण में यूरोप में बने सामान का प्रयोग किया गया, जिसे इंग्लैंड से मंगाया गया। इस ट्रैक का निर्माण भी विदेशी इंजीनियरों ने ही किया था।
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नया ट्रैक बनाए जाने से पहले जो सिंथेटिक ट्रैक था वह 23 वर्ष तक खराब नहीं हुआ था। नए ट्रैक के बनाए जाने के दौरान स्पोर्ट्स इंचार्ज डॉ. सुशील लेगा ने बताया था कि विवि में बने एथलेटिक ट्रैक को 1996 में सिंथेटिक ट्रैक बना दिया गया था। इस ट्रैक की लाइफ 10 साल की होती है, लेकिन गिरी सेंटर का ट्रैक 23 सालों बाद भी चल रहा था। नया ट्रैक नए नियमों के हिसाब से बनाया जाना प्रस्तावित था, जिस पर जंप और थ्रो आदि खेल भी कराए जा सकते हैं।
कुलपति ने तब कहा था क्लास वन ट्रैक है, अब है मौन
जब ट्रैक बना तो एचएयू के कुलपति ने कहा था कि सिंथेटिक ट्रैक अंतरराष्ट्रीय मानकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसके लिए विश्व एथलेटिक्स संघ ने क्लास-वन का प्रमाण-पत्र दिया है। इस ट्रैक में एथलेटिक्स गतिविधियां बाधा दौड़, रिले दौड़, चक्का फेंक, भाला फेंक, गोला फेंक, लंबी कूद, ऊंची कूद का आयोजन किया जा सकता है। लेकिन अब ट्रैक उखड़ने के बाद कुलपति से लेकर अधिकारी तक सब मौन हैं।

मामला संज्ञान में आया है। ट्रैक का रख-रखाव न होना और खराब होना गंभीर मसला है। हम संबंधित एक्सपर्ट से इसकी पूरी जांच करवाएंगे। - ललिता शर्मा, क्षेत्रिय निदेशक, भारतीय खेल प्राधिकरण
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