Haryana Weather: कई जिलों में हुई बूंदाबांदी से लेकर हल्की बारिश, आज भी रहेगी संभावना
पश्चिमी विक्षोभ के असर से हरियाणा के कई जिलों में मंगलवार को बूंदाबांदी से लेकर हल्की बारिश हुई। आज भी प्रदेश में बारिश की संभावना रहेगी। बादलवाही व बारिश के कारण रात के तापमान में बढ़ोतरी तो दिन में आई गिरावट है। 28 जनवरी को एक ताजा पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा।
विस्तार
पश्चिमी विक्षोभ के असर से मंगलवार को हरियाणा के कई जिलों में बूंदाबांदी से लेकर हल्की बारिश दर्ज की गई। बादलवाही व बारिश के कारण रात के तापमान में बढ़ोतरी व दिन के तापमान में गिरावट आई है। मौसम विशेषज्ञ की मानें तो बुधवार को भी प्रदेश में बारिश होगी। वहीं 28 जनवरी को एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है।
मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से पूरे प्रदेश में बादलवाही देखने को मिली और कुछ स्थानों पर बारिश की गतिविधियों को दर्ज किया गया। इस दौरान हिसार, कैथल, जींद, कुरुक्षेत्र, भिवानी, रोहतक, झज्जर, सोनीपत, पानीपत, अंबाला, यमुनानगर, पंचकूला, एनसीआर व दिल्ली में बूंदाबांदी से लेकर हल्की बारिश हुई। प्रदेश में न्यूनतम तापमान 4.0 से लेकर 11.2 डिग्री और अधिकतम तापमान 16.8 से 22.1 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया।
आगे ऐसा रहेगा मौसम
बुधवार को प्रदेश के उत्तरी व पूर्वी हिस्से और एनसीआर व दिल्ली में पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव देखने को मिलेगा और बारिश की गतिविधियों को दर्ज किया जाएगा। वातावरण में मौजूद प्रचुर मात्रा में नमी और रात के समय हवाओं की गति कमजोर होने से गुरुवार सुबह अधिकतर स्थानों पर कोहरा छाने की संभावना है। साथ ही तापमान में गिरावट भी देखने को मिलेगी। इसके अलावा 28 जनवरी को एक नया ताजा पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से प्रदेश में 29 व 30 जनवरी को बारिश होने की संभावना बन रही है।
प्रदेश में बारिश की स्थिति
- अंबाला-0.6 एमएम
- हिसार-10.8 एमएम
- दामला केवीके युमनानगर-0.5 एमएम
- चंडीगढ़-12.6 एमएम
बारिश का यह आंकड़ा सुबह साढ़े 8 बजे से शाम साढ़े 5 बजे तक का है
फसलों के फायदेमंद है यह बारिश
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. रमेश कुमार ने बताया कि इस बारिश से फसलों को काफी फायदा होगा। पाले के कारण सरसों व सब्जियों की फसल को काफी नुकसान हुआ है। अगर ओलावृष्टि होती है तो फसलों काे नुकसान हो सकता है। अभी तापमान कम है तो बादलवाही रहने के कारण फसलों को चेपा रोग का खतरा नहीं है।