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बड़ी-बड़ी घास में कैसे जीतेंगे देश के लिए मेडल
ब्यूरो_अमर उजाला_झज्जर
Updated Sun, 21 Aug 2016 11:21 PM IST
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खिलाड़ी
- फोटो : bureau
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एक ओर जहां उमरा गांव की पूनम मलिक हॉकी में राष्ट्रीय टीम में देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। दूसरी ओर उन्हीं के गांव के युवाओं को खेल सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं। इससे युवाओं का खेलों से रुझान हटता जा रहा है। राजीव गांधी स्टेडियम में अभ्यास करने वाले हॉकी व अन्य खेलों के खिलाड़ियों की संख्या पिछले साल की अपेक्षा घटकर आधी रह गई है।
खुद खरीदनी पड़ी रही स्पोर्ट्स किट
गांव में बने स्टेडियम में प्रशासन की ओर से खिलाड़ियों को किसी प्रकार ही सहायता उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है। हॉकी खिलाड़ियों को जहां हॉकी स्टिक, हॉकी बाल, नेट, गोलकीपर ड्रेस आदि खुद ही खरीदनी पड़ रही है। वहीं बॉक्सिंग के अभ्यास के लिए ग्लव्स के साथ अन्य जरूरी सामान भी खुद ही खरीदना पड़ रहा है। हॉकी, बॉक्सिंग के साथ, कबड्डी, टेबल टेनिस, बास्केटबाल, बेसबाल आदि खेलों का भी लगभग यही हाल है।
कोच की भी नहीं है सुविधा
गांव में बने राजीव गांधी स्टेडियम में करीब सभी खेलों के कोच की भी कमी है। स्टेडियम में सिर्फ हॉकी के कोच विजेंद्र सहारण को नियुक्त किया गया है।
हॉकी में भी लड़कियों की घट रही है रुचि
गांव की पूनम मलिक का राष्ट्रीय टीम में चयन होने के बाद हॉकी खेल को लेकर गांव के लड़कों के साथ-साथ लड़कियों में भी खासा क्रेज था। लेकिन सुविधाओं के अभाव के चलते हॉकी खेल में भी गांव के युवाओं की रुचि कम होती जा रही है। पिछले साल जहां गांव की करीब 20 लड़कियां हॉकी अभ्यास के लिए आती थीं, वहीं अब इनकी संख्या घटकर सिर्फ 6 रह गई है। इसी प्रकार हॉकी में लड़कों की संख्या 55 से घटकर 18 रह गई है।
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उबड़-खाबड़ मैदान में बड़ी-बड़ी खास
हॉकी के अभ्यास के लिये जहां समतल भूमि या फिर एस्ट्रोटर्फ मैदान पर होना चाहिए, वहीं उमरा गांव के युवाओं को न तो समतल भूमि मिल पा रही है, और न ही मैट की सुविधा। ऊपर से जो मैदान है उसमें बड़ी-बड़ी घास उगी है।
स्पीड खिलाड़ियों को भी सुविधा नहीं
स्टेडियम में 61 खिलाड़ी स्पीड के तहत चुने गए हैं जो विभिन्न खेलों के अभ्यास के लिए स्टेडियम में आते हैं। लेकिन इन खिलाड़ियों को स्कीम के तहत किसी प्रकार की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इन खिलाड़ियों को स्कीम के तहत दी जाने वाली राशि भी उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है।
गांव में कोच की सुविधा व अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रयासरत है, खिलाड़ियों को आ रही समस्याओं को जल्द ही दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
- सूबे सिंह बैनीवाल, जिला खेल व युवा कार्यक्रम अधिकारी, हिसार
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खुद खरीदनी पड़ी रही स्पोर्ट्स किट
गांव में बने स्टेडियम में प्रशासन की ओर से खिलाड़ियों को किसी प्रकार ही सहायता उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है। हॉकी खिलाड़ियों को जहां हॉकी स्टिक, हॉकी बाल, नेट, गोलकीपर ड्रेस आदि खुद ही खरीदनी पड़ रही है। वहीं बॉक्सिंग के अभ्यास के लिए ग्लव्स के साथ अन्य जरूरी सामान भी खुद ही खरीदना पड़ रहा है। हॉकी, बॉक्सिंग के साथ, कबड्डी, टेबल टेनिस, बास्केटबाल, बेसबाल आदि खेलों का भी लगभग यही हाल है।
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कोच की भी नहीं है सुविधा
गांव में बने राजीव गांधी स्टेडियम में करीब सभी खेलों के कोच की भी कमी है। स्टेडियम में सिर्फ हॉकी के कोच विजेंद्र सहारण को नियुक्त किया गया है।
हॉकी में भी लड़कियों की घट रही है रुचि
गांव की पूनम मलिक का राष्ट्रीय टीम में चयन होने के बाद हॉकी खेल को लेकर गांव के लड़कों के साथ-साथ लड़कियों में भी खासा क्रेज था। लेकिन सुविधाओं के अभाव के चलते हॉकी खेल में भी गांव के युवाओं की रुचि कम होती जा रही है। पिछले साल जहां गांव की करीब 20 लड़कियां हॉकी अभ्यास के लिए आती थीं, वहीं अब इनकी संख्या घटकर सिर्फ 6 रह गई है। इसी प्रकार हॉकी में लड़कों की संख्या 55 से घटकर 18 रह गई है।
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उबड़-खाबड़ मैदान में बड़ी-बड़ी खास
हॉकी के अभ्यास के लिये जहां समतल भूमि या फिर एस्ट्रोटर्फ मैदान पर होना चाहिए, वहीं उमरा गांव के युवाओं को न तो समतल भूमि मिल पा रही है, और न ही मैट की सुविधा। ऊपर से जो मैदान है उसमें बड़ी-बड़ी घास उगी है।
स्पीड खिलाड़ियों को भी सुविधा नहीं
स्टेडियम में 61 खिलाड़ी स्पीड के तहत चुने गए हैं जो विभिन्न खेलों के अभ्यास के लिए स्टेडियम में आते हैं। लेकिन इन खिलाड़ियों को स्कीम के तहत किसी प्रकार की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इन खिलाड़ियों को स्कीम के तहत दी जाने वाली राशि भी उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है।
गांव में कोच की सुविधा व अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रयासरत है, खिलाड़ियों को आ रही समस्याओं को जल्द ही दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
- सूबे सिंह बैनीवाल, जिला खेल व युवा कार्यक्रम अधिकारी, हिसार