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Hisar News: 45 साल पुराने कब्जे से मुक्त कराई सरकारी जमीन
Mon, 10 Nov 2025 02:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Mon, 10 Nov 2025 02:00 AM IST
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नारनौंद में जींद-हांसी सड़क किनारे अवैध कब्जे वाली जमीन से कब्जा हटवाती प्रशासन की जेसीबी। संवा
नारनौंद। जींद-हांसी रोड स्थित नारनौंद उपमंडल परिसर से सटी सरकारी जमीन पर करीब 45 वर्षों से किया गया कब्जा प्रशासन ने आखिरकार हटा दिया गया। एसडीएम विकास यादव के आदेश पर रविवार सुबह करीब 10 बजे कार्रवाई हुई क्योंकि इस जमीन से कब्जा हटाने के लिए कोर्ट से भी कई बार कब्जाधारियों को नोटिस जा चुके हैं।
यह जमीन उपमंडल परिसर से सटी है, जिस पर करीब आधा दर्जन मकान और कुछ दुकानें बनी थीं। प्रशासन का कहना है कि यह जमीन सरकार की थी और लोगों ने खाली पड़ी जमीन पर कब्जे किए थे। जिसे अब कब्जामुक्त कर उपमंडल परिसर में शामिल किया जाएगा। इसके एक हिस्से को प्रस्तावित कोर्ट भवन परिसर में जा सकती है जबकि दूसरे हिस्से को पार्किंग या अन्य किसी उपयोग में लिया जा सकता है।
इससे उपमंडल परिसर भी काफी खुला हो जाएगा और लोगों को भी सुविधाएं होगी। कार्रवाई की निगरानी के लिए नायब तहसीलदार कृष्ण कुमार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया था। किसी भी अप्रिय घटना से बचाव के लिए मौके पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई।
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एसडीएम यादव ने कब्जाधारकों से पहले ही मुलाकात कर स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने बताया कि संबंधित लोगों को पहले कई बार कोर्ट की तरफ से नोटिस आ चुके हैं। इन लोगों को समझाने के बाद वे स्वयं अपने मकान और दुकानें हटाने को तैयार हो गए।
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यह जमीन उपमंडल परिसर से सटी है, जिस पर करीब आधा दर्जन मकान और कुछ दुकानें बनी थीं। प्रशासन का कहना है कि यह जमीन सरकार की थी और लोगों ने खाली पड़ी जमीन पर कब्जे किए थे। जिसे अब कब्जामुक्त कर उपमंडल परिसर में शामिल किया जाएगा। इसके एक हिस्से को प्रस्तावित कोर्ट भवन परिसर में जा सकती है जबकि दूसरे हिस्से को पार्किंग या अन्य किसी उपयोग में लिया जा सकता है।
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इससे उपमंडल परिसर भी काफी खुला हो जाएगा और लोगों को भी सुविधाएं होगी। कार्रवाई की निगरानी के लिए नायब तहसीलदार कृष्ण कुमार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया था। किसी भी अप्रिय घटना से बचाव के लिए मौके पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई।
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एसडीएम यादव ने कब्जाधारकों से पहले ही मुलाकात कर स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने बताया कि संबंधित लोगों को पहले कई बार कोर्ट की तरफ से नोटिस आ चुके हैं। इन लोगों को समझाने के बाद वे स्वयं अपने मकान और दुकानें हटाने को तैयार हो गए।