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महान व्यक्तित्व के धनी थे मित्रसेन : सोलंकी
Updated Thu, 28 Jan 2016 02:22 AM IST
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पिछड़े राज्यों में भी गुरुकुल खोलकर स्वर्गीय मित्रसेन ने
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शिक्षा की अलख जगाने का काम किया। साथ ही प्रतिभावान छात्रों को
छात्रवृत्ति देकर उनका सम्मान कर उनके हौसलों को बुलंद करने का काम किया
है।
उक्त शब्द राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने स्वर्गीय मित्रसेन की पांचवीं पुण्यतिथि पर आयोजित सम्मान समारोह में लोगों को संबोधित करते हुए कहे।
उन्होंने कहा कि स्वर्गीय मित्रसेन के कार्य हमेशा जीवित रहेंगे। भारतीय संस्कृति उनके व्यवहार में कूट-कूटकर भरी हुई थी। उन्होंने हर वर्ग के लोगों के लिए कई कार्य किए। स्वर्गीय मित्रसेन एक ऐसे ही व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने अपनी जिंदगी में हमेशा दूसरों के लिए त्याग किया।
हरियाणा प्रदेश के अलावा उन्होंने केरल, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ इत्यादि पिछड़े राज्यों में भी गुरुकुल खोलकर गरीब बच्चों को शिक्षा देने का काम किया।
उन्होंने ग्रामीण आंचल के प्रतिभावान छात्रों को सम्मान देने के लिए छात्रवृत्ति योजना भी शुरू की। इस अवसर पर परम मित्र मानव निर्माण संस्थान के अध्यक्ष कैप्टन रुद्रसेन, योगेश सिहाग, सुभाष महरिया, सांसद प्रवेश वर्मा, आचार्य वेदपाल, स्वामी धर्मानंद महाराज, राष्ट्रकवि हरिओम पंवार, कुलबीर छिकारा, वृतपाल सिंधू, अजय सिंधू, सुभाष श्योराण, सीपीएस कमल गुप्ता, विधायक नरेश कौशिक, राजसिंह गहलोत, जोगी राम सिहाग, सुरेश कोथ, श्रीनिवास गोयल, सत्यवान दुहन, मंदीप मलिक, सतपाल श्योराण, एसपी मल्हाण, दिलबाग लोहान, आजाद शर्मा, सुभाष बैनीवाल, पूर्व विधायक प्रो. महासिंह, कप्तान सिंघवा, सुनील, नरेश वर्मा इत्यादि मौजूद थे।
मित्रसेन की प्राथमिकता गाय और गुरुकुल थी : शिक्षा मंत्री
शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने कहा कि स्वर्गीय मित्रसेन की प्राथमिकता गाय और गुरुकुल थी। उन्होंने बेसहारा गायों के लिए काफी कार्य किए हैं और उन्होंने देश के अनेक प्रदेशों में गुरुकुल स्थापित कर गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए अलख जगाने का काम किया है।
इस परिवार में जन्म लेने का मुझे गर्व : अभिमन्यु
वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि उनको गर्व है कि वो इस परिवार में जन्मे और उनको अपने पिता से ऐसे संस्कार मिले कि दीन- दुखियों की सेवा कर सकें। उन्होंने जो कार्यक्रम लोगों की सहायता के लिए शुरू किए थे, उन कार्यों को कभी भी बंद नहीं होने दिया जाएगा।
उक्त शब्द राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने स्वर्गीय मित्रसेन की पांचवीं पुण्यतिथि पर आयोजित सम्मान समारोह में लोगों को संबोधित करते हुए कहे।
उन्होंने कहा कि स्वर्गीय मित्रसेन के कार्य हमेशा जीवित रहेंगे। भारतीय संस्कृति उनके व्यवहार में कूट-कूटकर भरी हुई थी। उन्होंने हर वर्ग के लोगों के लिए कई कार्य किए। स्वर्गीय मित्रसेन एक ऐसे ही व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने अपनी जिंदगी में हमेशा दूसरों के लिए त्याग किया।
हरियाणा प्रदेश के अलावा उन्होंने केरल, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ इत्यादि पिछड़े राज्यों में भी गुरुकुल खोलकर गरीब बच्चों को शिक्षा देने का काम किया।
उन्होंने ग्रामीण आंचल के प्रतिभावान छात्रों को सम्मान देने के लिए छात्रवृत्ति योजना भी शुरू की। इस अवसर पर परम मित्र मानव निर्माण संस्थान के अध्यक्ष कैप्टन रुद्रसेन, योगेश सिहाग, सुभाष महरिया, सांसद प्रवेश वर्मा, आचार्य वेदपाल, स्वामी धर्मानंद महाराज, राष्ट्रकवि हरिओम पंवार, कुलबीर छिकारा, वृतपाल सिंधू, अजय सिंधू, सुभाष श्योराण, सीपीएस कमल गुप्ता, विधायक नरेश कौशिक, राजसिंह गहलोत, जोगी राम सिहाग, सुरेश कोथ, श्रीनिवास गोयल, सत्यवान दुहन, मंदीप मलिक, सतपाल श्योराण, एसपी मल्हाण, दिलबाग लोहान, आजाद शर्मा, सुभाष बैनीवाल, पूर्व विधायक प्रो. महासिंह, कप्तान सिंघवा, सुनील, नरेश वर्मा इत्यादि मौजूद थे।
मित्रसेन की प्राथमिकता गाय और गुरुकुल थी : शिक्षा मंत्री
शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने कहा कि स्वर्गीय मित्रसेन की प्राथमिकता गाय और गुरुकुल थी। उन्होंने बेसहारा गायों के लिए काफी कार्य किए हैं और उन्होंने देश के अनेक प्रदेशों में गुरुकुल स्थापित कर गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए अलख जगाने का काम किया है।
इस परिवार में जन्म लेने का मुझे गर्व : अभिमन्यु
वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि उनको गर्व है कि वो इस परिवार में जन्मे और उनको अपने पिता से ऐसे संस्कार मिले कि दीन- दुखियों की सेवा कर सकें। उन्होंने जो कार्यक्रम लोगों की सहायता के लिए शुरू किए थे, उन कार्यों को कभी भी बंद नहीं होने दिया जाएगा।