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Hisar News: हांसी में 33 दिनों बाद आए डीएपी खाद के चार हजार कट्टे, जरूरत डेढ़ लाख कट्टों की
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हांसी। शहर में 33 दिनों के बाद डीएपी खाद की सप्लाई पहुंची। इस दौरान डीएपी खाद के चार हजार कट्टे पहुंचे। जल्द ही गेहूं की बिजाई का काम शुरू होने वाला है। उपमंडल में डेढ़ लाख कट्टे डीएपी खाद की जरूरत है। अगर समय पर डीएपी नहीं पहुंची तो किसानों को परेशानी झेलनी पड़ेगी।
डीएपी के अलावा एनपीके खाद के सात हजार कट्टे पहुंचे। एनपीके खाद की सप्लाई सरकारी केंद्र व निजी केंद्र में पहुंची। वहीं डीएपी खाद की सप्लाई 1500 कट्टे सरकारी केंद्रों व 2500 केंद्र निजी दुकानों पर पहुंचे। डीएपी खाद आने की सूचना पर काफी संख्या में किसान डीएपी खाद लेने पहुंचे। किसानों को एक आधार कार्ड पर पांच कट्टे दिए गए। वहीं इसी सप्ताह में डीएपी खाद की सप्लाई इफको केंद्र पर आने की संभावना है। दरअसल डीएपी खाद का रैक हिसार में पूरे जिले के लिए आना है। इसमें से हांसी में भी सप्लाई पहुंचेगी। कितने कट्टे हांसी में पहुंचेंगे यह सप्लाई आने के बाद पता चलेगा। वहीं इफको केंद्र पर डीएपी खाद आने से किसानों को कुछ राहत मिलेगी।
एनपीके खाद की मांग कम रही। एनपीके खाद को लेकर किसान कम जागरूक हैं। बता दें कि इससे पहले एक अक्तूबर को 12 हजार कट्टे डीएपी खाद की सप्लाई हांसी पहुंची थी। एक महीने के बाद अब डीएपी की सप्लाई पहुंची है।
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गेहूं की बिजाई का काम शुरू, डेढ़ लाख कट्टे डीएपी की जरूरत
उपमंडल में सरसों की बिजाई लगभग पूरी हो गई है। वहीं एक नवंबर से गेहूं की बिजाई शुरू हो चुकी है। एक से 10 नवंबर तक अगेती, 10 से 25 नवंबर तक मध्यम व 25 से 10 दिसंबर तक गेहूं की पछेती बिजाई होगी। कुछ जगहों पर दो दिन बाद गेहूं की बिजाई शुरू हो जाएगी। उपमंडल में गेहूं की पछेती बिजाई सबसे ज्यादा होती है। क्योंकि अभी धान की कटाई का कार्य चल रहा है। इस महीने में पैडी 1121 धान सबसे ज्यादा मंडियों में पहुंचता है। धान की कटाई के बाद गेहूं की बिजाई का कार्य होगा। ऐसे में अब डेढ़ महीने तक किसानों को डीएपी खाद की जरूरत होगी। कृषि विभाग के अनुसार उपमंडल में डेढ़ लाख बैग डीएपी खाद की जरूरत है। लेकिन अभी तक डीएपी खाद की पर्याप्त सप्लाई शुरू नहीं हुई है। ऐसे में अगले एक महीने तक डीएपी खाद के लिए मारामारी रहेगी।
एनपीके में 12 प्रतिशत नाइट्रोजन, 32 प्रतिशत फास्फोरस और पोटाश 16 प्रतिशत होती है। जबकि डीएपी खाद में पोटाश नहीं होती। पोटाश की जमीनों में कमी है। अगर एनपीके डाला जाए तो फसल में बीमारियां कम आती हैं और दाने का साइज बढ़ता है। रेट में मामूली फर्क है। एनपीके से किसानों को फायदा है। डीएपी खाद के रैक अभी और आएंगे।- डॉ. शमशेर ढुल, एसडीओ, कृषि विभाग
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नई अनाजमंडी में एनपीके खाद के 500 कट्टे पहुंचे
हिसार। डीएपी को लेकर जिले में मारामारी चल रही है। खाद के लिए पिछले काफी समय से किसान मंडी के चक्कर काट रहे हैं। उसके बाद भी खाद नहीं मिल रही है। रविवार को मंडी में मगर डीएपी की जगह एनपीके खाद के 500 कट्टे पहुंच चुके हैं। सोमवार को सुबह 9 बजे नई अनाजमंडी में खाद का वितरण किया जाएगा। वहीं, छह और सात नवंबर तक डीएपी खाद पहुंचने की बात कही जा रही है। संवाद
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डीएपी के अलावा एनपीके खाद के सात हजार कट्टे पहुंचे। एनपीके खाद की सप्लाई सरकारी केंद्र व निजी केंद्र में पहुंची। वहीं डीएपी खाद की सप्लाई 1500 कट्टे सरकारी केंद्रों व 2500 केंद्र निजी दुकानों पर पहुंचे। डीएपी खाद आने की सूचना पर काफी संख्या में किसान डीएपी खाद लेने पहुंचे। किसानों को एक आधार कार्ड पर पांच कट्टे दिए गए। वहीं इसी सप्ताह में डीएपी खाद की सप्लाई इफको केंद्र पर आने की संभावना है। दरअसल डीएपी खाद का रैक हिसार में पूरे जिले के लिए आना है। इसमें से हांसी में भी सप्लाई पहुंचेगी। कितने कट्टे हांसी में पहुंचेंगे यह सप्लाई आने के बाद पता चलेगा। वहीं इफको केंद्र पर डीएपी खाद आने से किसानों को कुछ राहत मिलेगी।
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एनपीके खाद की मांग कम रही। एनपीके खाद को लेकर किसान कम जागरूक हैं। बता दें कि इससे पहले एक अक्तूबर को 12 हजार कट्टे डीएपी खाद की सप्लाई हांसी पहुंची थी। एक महीने के बाद अब डीएपी की सप्लाई पहुंची है।
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गेहूं की बिजाई का काम शुरू, डेढ़ लाख कट्टे डीएपी की जरूरत
उपमंडल में सरसों की बिजाई लगभग पूरी हो गई है। वहीं एक नवंबर से गेहूं की बिजाई शुरू हो चुकी है। एक से 10 नवंबर तक अगेती, 10 से 25 नवंबर तक मध्यम व 25 से 10 दिसंबर तक गेहूं की पछेती बिजाई होगी। कुछ जगहों पर दो दिन बाद गेहूं की बिजाई शुरू हो जाएगी। उपमंडल में गेहूं की पछेती बिजाई सबसे ज्यादा होती है। क्योंकि अभी धान की कटाई का कार्य चल रहा है। इस महीने में पैडी 1121 धान सबसे ज्यादा मंडियों में पहुंचता है। धान की कटाई के बाद गेहूं की बिजाई का कार्य होगा। ऐसे में अब डेढ़ महीने तक किसानों को डीएपी खाद की जरूरत होगी। कृषि विभाग के अनुसार उपमंडल में डेढ़ लाख बैग डीएपी खाद की जरूरत है। लेकिन अभी तक डीएपी खाद की पर्याप्त सप्लाई शुरू नहीं हुई है। ऐसे में अगले एक महीने तक डीएपी खाद के लिए मारामारी रहेगी।
एनपीके में 12 प्रतिशत नाइट्रोजन, 32 प्रतिशत फास्फोरस और पोटाश 16 प्रतिशत होती है। जबकि डीएपी खाद में पोटाश नहीं होती। पोटाश की जमीनों में कमी है। अगर एनपीके डाला जाए तो फसल में बीमारियां कम आती हैं और दाने का साइज बढ़ता है। रेट में मामूली फर्क है। एनपीके से किसानों को फायदा है। डीएपी खाद के रैक अभी और आएंगे।- डॉ. शमशेर ढुल, एसडीओ, कृषि विभाग
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नई अनाजमंडी में एनपीके खाद के 500 कट्टे पहुंचे
हिसार। डीएपी को लेकर जिले में मारामारी चल रही है। खाद के लिए पिछले काफी समय से किसान मंडी के चक्कर काट रहे हैं। उसके बाद भी खाद नहीं मिल रही है। रविवार को मंडी में मगर डीएपी की जगह एनपीके खाद के 500 कट्टे पहुंच चुके हैं। सोमवार को सुबह 9 बजे नई अनाजमंडी में खाद का वितरण किया जाएगा। वहीं, छह और सात नवंबर तक डीएपी खाद पहुंचने की बात कही जा रही है। संवाद