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पटाखों से होने वाला प्रदूषण इंसानों के साथ ही पशु-पक्षियों के लिए भी घातक

Thu, 05 Nov 2020 01:12 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 05 Nov 2020 01:12 AM IST
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Firecracker's gas very danger for human and animal , bird
लुवास कुलपति प्रो. गुरदियाल सिंह - फोटो : Hisar
हिसार। पटाखों के कारण कई तरह की खतरनाक गैस वायुमंडल में मिल जाती हैं। वायु प्रदूषण को और भी घातक बनाती हैं। इससे सीधे तौर पर पर्यावरण को नुकसान होता है। यह प्रदूषण इंसानों के साथ ही पशु-पक्षियों के लिए भी घातक सिद्ध होता है।
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गुजवि, एचएयू, लुवास के कुलपतियों और जिला खेल अधिकारी ने लोगों से अपील की है कि पटाखों के कारण ही त्योहारों के आसपास पक्षी जगत को अधिक नुकसान होता है। ऐसे में बच्चे या बड़े पटाखे न जलाकर दीयों के साथ दिवाली मनाएं। आज वायु प्रदूषण को कम करने के लिए उपाय ढूंढने की जरूरत है। ऐसे समय में हम पटाखे जलाएंगे तो यह वायु प्रदूषण को कम करने के प्रयासों को भी धक्का पहुंचाएगा। इस बारे में अमर उजाला ने एक युद्ध-पटाखों के विरुद्ध अभियान के तहत बुद्धिजीवी वर्ग से बात की, उन्होंने आमजन खासकर युवाओं से अपील की कि सभी पटाखों रहित दिवाली मनाएं।
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प्रदूषण कम करने के उपाय होने चाहिए
वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में इसे बढ़ाने की बजाय कम करने के उपाय होने चाहिए। बच्चे और युवा पटाखे न जलाएं तो अच्छा है। बढ़ता वायु प्रदूषण लोगों में कई तरह की बीमारियां पैदा कर रहा है। पटाखों से निकलने वाली गैस के कारण वायु प्रदूषण का प्रभाव और भी घातक होता है। दूसरा, पटाखे न जलाने के साथ यह भी आह्वान करना चाहता हूं कि आप दिवाली पर जो भी चीज खरीदें, बेहतर होगा कि वह भारत की बनी चीज ही खरीदें।
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- प्रो. टंकेश्वर कुमार, कुलपति, गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय।
पटाखे जलाने से बचें
दिवाली को दीपों और रोशनी का त्योहार कहा गया है। इस त्योहार की खुशी पटाखे जलाकर मनाते हैं, लेकिन अब जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण पहले ही लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है। ऐसे में मैं सभी से आह्वान करता हूं कि बच्चे या बड़े पटाखे जलाने से बचें। यह हम सबके स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए सबसे जरूरी है। कोरोना संकट के बीच हमें वायु प्रदूषण को कम करने की जरूरत है।
- प्रो. समर सिंह, कुलपति, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार।
प्रदूषण पशु-पक्षियों के लिए भी घातक
दिवाली दीयों से मनाई जाए तो बेहतर है। वायु प्रदूषण पहले ही लोगों के लिए आफत बना हुआ है। सिर्फ इंसान ही क्यों पशु-पक्षियों पर भी वायु प्रदूषण और पटाखों के शोर के बुरे असर देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में पूरी जीव जाति के कल्याण के लिए यह जरूरी है कि हम पटाखों रहित दिवाली मनाएं। दीये जलाएं, घर पर बनी मिठाइयां खाएं और स्वस्थ रहें।
- डॉ. गुरदियाल सिंह, कुलपति, लाला लाजपत राय पशु विज्ञान एवं पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय हिसार।
पटाखों से निकलती है जहरीली गैस
पटाखों से निकलने वाली गैस काफी जहरीली होती हैं, जोकि हमारे स्वास्थ्य के लिए सबसे ज्यादा हानिकारक हैं। पटाखों से निकलने वाला धुआं सांस के रोगियों के लिए खतरनाक होता है। उन्हें एलर्जी तक भी हो सकती है, इसलिए दिवाली पर पटाखे जलाने की बजाय देसी घी के दीये जलाएं। इससे वातावरण भी शुद्ध होगा और कोई हानि भी नहीं होगी।

- कृष्ण कुमार ढांडा, जिला खेल अधिकारी।

जिला खेल अधिकारी कृष्ण कुमार ढांडा।

जिला खेल अधिकारी कृष्ण कुमार ढांडा।- फोटो : Hisar

 हकृवि कुलपति प्रो. समर सिंह

हकृवि कुलपति प्रो. समर सिंह- फोटो : Hisar

 गुजवि कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार

गुजवि कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार- फोटो : Hisar

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