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गांव से स्टेडियम 64 किमी का सफर बाधा बना तो किसान पिता बने कोच
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बेटी गीता को शॉटपुट का प्रशिक्षण देते पिता जगत सिंह।
- फोटो : Hisar
अश्वनी कुमार
हिसार। किसी खिलाड़ी को प्रशिक्षण देने के लिए कोच जरूरी है, लेकिन हिसार जिले के गांव खानपुर निवासी जगत सिंह के लिए रोजाना 64 किमी दूर स्टेडियम तक का सफर बाधा बना तो उन्होंने बेटी गीता को सालभर पहले खेत में ही अभ्यास करवाना शुरू कर दिया। किसान पिता से प्रशिक्षण लेकर 21 वर्षीय गीता पैरा राष्ट्रीय प्रतियोगिता में दो स्वर्ण पदक भी जीत चुकी हैं।
अब गीता इसी माह 28 फरवरी को गुरुग्राम के चौधरी देवीलाल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में होने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए ट्रायल देगी। इसके लिए पिता उसे सुबह-शाम खेत में ही अभ्यास करवा रहे हैं। पिता जगत सिंह ने बताया कि बेटी गीता पैरा राष्ट्रीय एथलेटिक प्रतियोगिता के इवेंट शॉटपुट और क्लब थ्रो में स्वर्ण पदक जीत चुकी है।
जगत सिंह हिसार के गांव खानपुर में रहते हैं। गांव से हिसार तक का रास्ता 32 किलोमीटर है। ऐसे में जब आने-जाने का सफर 64 किलोमीटर अभ्यास में बाधा बनने लगा तो उन्होंने बड़ी बेटी गीता को खेत में ही प्रशिक्षण देने का निर्णय कर लिया।
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बेटियों को ओलंपिक तक ले जाने का सपना करूंगा पूरा
जगत सिंह बताते हैं कि उनका सपना छोटी बेटी किरण को भी खिलाड़ी बनाने का है। इसके लिए बेटी को सुबह खेत में दौड़ लगवाते हैं। साथ ही बड़ी बेटी गीता को प्रशिक्षण देते हैं। उन्होंने कहा कि उनका सपना दोनों बेटियों को ओलंपिक तक ले जाने का है। इसके लिए वह बेटियों के साथ खुद भी पसीना बहा रहे हैं।
कोच के प्रशिक्षण को देख सीख गए अभ्यास करवाना
पैरा खिलाड़ी गीता रानी 2018 में हिसार के महाबीर स्टेडियम में अभ्यास करती थीं। पिता एक साल तक बेटी को अभ्यास के लिए बाइक पर रोजाना स्टेडियम लाते थे। इस दौरान पिता जगत सिंह बेटी को अभ्यास करते हुए देखते थे। उसके बाद जगत सिंह ने अपनी बेटी को खेत में ही प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि लगभग सालभर अभ्यास कराने के बाद उनकी बेटी राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा दिखाते हुए गांव ही नहीं, बल्कि प्रदेश का नाम रोशन कर रही है। (संवाद)
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हिसार। किसी खिलाड़ी को प्रशिक्षण देने के लिए कोच जरूरी है, लेकिन हिसार जिले के गांव खानपुर निवासी जगत सिंह के लिए रोजाना 64 किमी दूर स्टेडियम तक का सफर बाधा बना तो उन्होंने बेटी गीता को सालभर पहले खेत में ही अभ्यास करवाना शुरू कर दिया। किसान पिता से प्रशिक्षण लेकर 21 वर्षीय गीता पैरा राष्ट्रीय प्रतियोगिता में दो स्वर्ण पदक भी जीत चुकी हैं।
अब गीता इसी माह 28 फरवरी को गुरुग्राम के चौधरी देवीलाल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में होने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए ट्रायल देगी। इसके लिए पिता उसे सुबह-शाम खेत में ही अभ्यास करवा रहे हैं। पिता जगत सिंह ने बताया कि बेटी गीता पैरा राष्ट्रीय एथलेटिक प्रतियोगिता के इवेंट शॉटपुट और क्लब थ्रो में स्वर्ण पदक जीत चुकी है।
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जगत सिंह हिसार के गांव खानपुर में रहते हैं। गांव से हिसार तक का रास्ता 32 किलोमीटर है। ऐसे में जब आने-जाने का सफर 64 किलोमीटर अभ्यास में बाधा बनने लगा तो उन्होंने बड़ी बेटी गीता को खेत में ही प्रशिक्षण देने का निर्णय कर लिया।
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बेटियों को ओलंपिक तक ले जाने का सपना करूंगा पूरा
जगत सिंह बताते हैं कि उनका सपना छोटी बेटी किरण को भी खिलाड़ी बनाने का है। इसके लिए बेटी को सुबह खेत में दौड़ लगवाते हैं। साथ ही बड़ी बेटी गीता को प्रशिक्षण देते हैं। उन्होंने कहा कि उनका सपना दोनों बेटियों को ओलंपिक तक ले जाने का है। इसके लिए वह बेटियों के साथ खुद भी पसीना बहा रहे हैं।
कोच के प्रशिक्षण को देख सीख गए अभ्यास करवाना
पैरा खिलाड़ी गीता रानी 2018 में हिसार के महाबीर स्टेडियम में अभ्यास करती थीं। पिता एक साल तक बेटी को अभ्यास के लिए बाइक पर रोजाना स्टेडियम लाते थे। इस दौरान पिता जगत सिंह बेटी को अभ्यास करते हुए देखते थे। उसके बाद जगत सिंह ने अपनी बेटी को खेत में ही प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि लगभग सालभर अभ्यास कराने के बाद उनकी बेटी राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा दिखाते हुए गांव ही नहीं, बल्कि प्रदेश का नाम रोशन कर रही है। (संवाद)