हिसार में किसानों का शक्ति प्रदर्शन: एक माह में केस वापस लेने पर बनी सहमति, घर लौटे 'अन्नदाता'
16 मई को किसानों एवं महिलाओं पर लाठीचार्ज के विरोध में किसानों ने आयुक्त कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन का एलान किया था।
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संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर हजारों की संख्या में किसान मंडल आयुक्त कार्यालय का घेराव करने हिसार पहुंचे। किसान क्रांतिमान पार्क में एकत्र हुए। दोपहर करीब एक बजे प्रशासनिक अधिकारियों ने बातचीत का न्योता दिया। इस पर किसानों का 26 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए लघु सचिवालय पहुंचा।
दोपहर बाद करीब तीन बजे बातचीत शुरू हुई। लगभग पौने तीन घंटे चली बैठक में किसानों पर दर्ज केस वापस लेने पर सहमति बनी। भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम चढूनी ने क्रांतिमान पार्क में पहुंचकर बातचीत का ब्योरा दिया। प्रशासन की ओर से एसडीएम जगदीप सिंह ने किसानों के बीच आकर सहमति बनने का एलान किया। इसके बाद करीब 7 बजे किसान वापस चले गए।
इन पर बनी सहमति
- 16 मई को दर्ज सभी केस एक माह में वापस लिए जाएंगे।
- किसान आंदोलन के पहले दर्ज हुए केस भी वापस होंगे।
- आम व्यक्ति की ओर से दर्ज कराए गए केस में वापसी पर कानूनी राय लेंगे।
- हार्ट अटैक से मरने वाले किसान के परिवार को डीसी रेट की नौकरी।
- 16 मई को किसानों के क्षतिग्रस्त वाहनों को प्रशासन दुरुस्त कराएगा।
इनके बीच हुई बातचीत
बातचीत के लिए किसानों के 26 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में किसान मोर्चा के नेता गुरनाम चढूनी, राजेंद्र राजेवाल, राकेश टिकैत, विधायक सोमबीर सांगवान के अलावा स्थानीय किसान नेता शामिल रहे। प्रशासन की ओर से बातचीत में मंडल आयुक्त चंद्रशेखर, डीसी डॉ. प्रियंका सोनी, आईजी राकेश कुमार आर्य, डीआईजी बलवान सिंह राणा सहित अन्य अधिकारी शामिल हुए।
राकेश टिकैत बोले - किसानों की जीत
किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा हिसार सहित आसपास के जिले क्रांतिकारी हैं। 5 हजार पुलिस बल तैनात किया गया, जिससे दस गुना किसान पहुंचे। यह सभी किसानों की जीत है। उन्होंने कहा कि हमारी मांग पूरी नहीं हुई तो हम फिर आ जाएंगे।
सीएम पर केस दर्ज कराने की मांग छोड़ी : चढूनी
गुरनाम चढूनी ने कहा कि किसानों ने पूरे प्रशासन की नाक रगड़वा दी है। डीसी सहित वहां मौजूद सभी अधिकारियों ने लाठीचार्ज सहित पूरे प्रकरण के लिए माफी मांगी है। अगर हम सीएम सहित प्रशासनिक अधिकारियों पर केस दर्ज कराने की मांग पर अड़ते तो प्रशासन को किसानों के केस खारिज कराने में अदालत में दिक्कत आती। इस कारण हमने इस मांग को छोड़ दिया।
घेराव में हिस्सा लेने पहुंचे उगालन के किसान की मौत
उधर, संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से बुलाए गए मंडल आयुक्त कार्यालय के घेराव में भाग लेने पहुंचे गांव उगालन के 66 वर्षीय किसान रामचंद्र खर्ब की क्रांतिमान पार्क में हार्ट अटैक से मौत हो गई। हिसार के नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के हवाले कर दिया।
रामचंद्र खर्ब पहले दिन से ही किसान आंदोलन से जुड़े हुए थे। काफी दिनों तक टिकरी बॉर्डर पर भी सक्रिय थे। दो दिन पहले ही हिसार जाने के लिए वह दिल्ली के टिकरी बॉर्डर से घर आए थे। उगालन में किसान की मौत की सूचना मिलते ही शोक की लहर दौड़ गई।
सोमवार शाम करीब साढ़े 6 बजे उनका गांव में अंतिम संस्कार किया गया। उनकी अंतिम यात्रा में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों और किसान यूनियनों के पदाधिकारी शामिल हुए। ग्रामीणों ने किसान को शहीद का दर्जा देने की मांग की है। रामचंद्र अपने पीछे पत्नी, दो लड़के, चार लड़कियां छोड़ गए। सभी की शादी हो चुकी है। दोनों लड़के खेतीबाड़ी करते हैं।