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विशेषज्ञों व युवा शोधार्थियों को मौलिक शोध करने की जरूरत : प्रो. देशपांडे
Sun, 17 Nov 2024 02:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Sun, 17 Nov 2024 02:19 AM IST
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हिसार। हरियाणा का इतिहास अथाह समुद्र की तरह है, जिसे आज तक नहीं जान नहीं पाए है। जैसे-जैसे हमने खुदाई की वैसे-वैसे हमें मिले मिट्टी के बर्तन, खिलौने व चूड़ियों के अवशेषों से सिंधु घाटी कालीन सभ्यता, मुगलकालीन, सल्तनतकालीन, हड़प्पा कालीन सभ्यता से संबंधित मध्यकालीन के बारे में जानकारियां प्राप्त होती रही। ये बात हरियाणा इतिहास कांग्रेस के जनरल अध्यक्ष व दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अनिरूद्ध देशपाण्डे ने कही उन्होंने कहा कि जब बात पूर्व मध्यकालीन की आए तो हमारे पास न कोई तथ्य, न दस्तावेज न अवशेष है। इतिहास पर जितना शोध होना चाहिए था वो नहीं हो पाए। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों व युवा शोधार्थियों को मौलिक शोध करने की जरूरत है। वे शनिवार को डीएन कॉलेज में दो दिवसीय हरियाणा इतिहास कांग्रेस के नौवें अधिवेशन के शुभारंभ अवसर पर वक्ता के तौर पर उपस्थित थे। जबकि गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर नरसीराम बिश्नोई ने पुरातत्व एवं संग्राहलय विभाग हरियाणा तथा अभिलेखागार विभाग हरियाणा की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
हरियाणा का इतिहास समृद्ध व गौरवमयी : कुलपति
जीजेयू कुलपति प्रोफेसर नरसीराम बिश्नोई ने बताया कि युवाओं को हरियाणा के इतिहास की समृद्ध परंपराओं एवं गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा पाकर आगे बढ़ना चाहिए। न कि उसे अंकों की चाह में इतिहास विषय का चयन करना चाहिए। क्योंकि ये इतिहास विषय ही हमारी परंपराओं, संस्कारों व रीति-रिवाजों के बारे में ज्ञानवर्धन करता है। इसी विषय पर ही हमारी नींव टिकी हुई है।
कार्यक्रम में प्राचीन अनुभागीय अध्यक्ष व आईआईटी गांधीनगर गुजरात में पुरातत्व विज्ञान सेंटर के एसोसिएट प्रोफेसर वीएन प्रभाकर ने कहा कि इतिहास विषय पर मौलिक तौर पर शोध अवश्य करें। मध्यकालीन अनुभागीय अध्यक्ष व पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला के प्रो. दलजीत सिंह ने हरियाणा इतिहास कांग्रेस को ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने मध्यकालीन हरियाणा तराईन की लड़ाई व पानीपत के युद्धों के बारे में बताया। वहीं आधुनिक अनुभागीय अध्यक्ष व राजकीय महाविद्यालय राजस्थान के प्रोफेसर विकास नोटियाल ने कहा कि हरियाणवी संस्कृति अपनी विशिष्ट पहचान के लिए जानी जाती है। वहीं हरियाणा इतिहास कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. यशवीर सिंह ने हरियाणा में संस्था के कार्यों और भविष्य की योजनाओं के बारे में बताया।
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12 राज्यों व साउथ कोरिया के शोधार्थी प्रस्तुत करेंगे शोध पत्र
महाविद्यालय में इतिहास के विभागाध्यक्ष व संयुक्त आयोजन सचिव डॉ. महेंद्र सिंह ने बताया कि अधिवेशन में इतिहास विषय पर भारत के 12 राज्यों व साउथ कोरिया के शोधार्थियों द्वारा शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे।
पहली बार सिंधु घाटी कालीन सभ्यता से जुड़े अवशेषों की कॉपी मॉडल तैयार कर लगाई प्रदर्शनी
हरियाणा इतिहास कांग्रेस के नौवें अधिवेशन में पहली बार सिंधु घाटी कालीन सभ्यता से जुड़े अवशेषों की कॉपी तैयार की गई थी, जिनके मॉडलों की प्रदर्शनी लगाई गई। कारण यह था कि युवाओं को ज्यादा से ज्यादा भारत व हरियाणा के गौरवमयी इतिहास से जोड़ना। इस प्रदर्शनी में पहली शताब्दी, 8वीं, 9वीं, 10वीं व 11वीं शताब्दी में बने भगवान श्रीगणेश, भगवान श्रीविष्णु, महात्मा बुद्ध व उमा महेश्वरी सहित देवी-देवताओं की मूर्तियों की कॉपी मॉडल रखे गए थे। वहीं प्रदर्शनी में विद्यार्थियों को आई चार विषयों पर आधारित इतिहास की पुस्तकें पसंद आई। इसमें सर्वाधिक विद्यार्थियों व लोगों ने आधुनिक भारत का इतिहास विषय की पुस्तकें खरीदी, दूसरे नंबर पर इतिहास के चरण, पर्यावरण इतिहास और चौथे नंबर पर विद्यार्थियों को पुरात्व विषय की पुस्तकें पंसद पर रही।
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हरियाणा का इतिहास समृद्ध व गौरवमयी : कुलपति
जीजेयू कुलपति प्रोफेसर नरसीराम बिश्नोई ने बताया कि युवाओं को हरियाणा के इतिहास की समृद्ध परंपराओं एवं गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा पाकर आगे बढ़ना चाहिए। न कि उसे अंकों की चाह में इतिहास विषय का चयन करना चाहिए। क्योंकि ये इतिहास विषय ही हमारी परंपराओं, संस्कारों व रीति-रिवाजों के बारे में ज्ञानवर्धन करता है। इसी विषय पर ही हमारी नींव टिकी हुई है।
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कार्यक्रम में प्राचीन अनुभागीय अध्यक्ष व आईआईटी गांधीनगर गुजरात में पुरातत्व विज्ञान सेंटर के एसोसिएट प्रोफेसर वीएन प्रभाकर ने कहा कि इतिहास विषय पर मौलिक तौर पर शोध अवश्य करें। मध्यकालीन अनुभागीय अध्यक्ष व पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला के प्रो. दलजीत सिंह ने हरियाणा इतिहास कांग्रेस को ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने मध्यकालीन हरियाणा तराईन की लड़ाई व पानीपत के युद्धों के बारे में बताया। वहीं आधुनिक अनुभागीय अध्यक्ष व राजकीय महाविद्यालय राजस्थान के प्रोफेसर विकास नोटियाल ने कहा कि हरियाणवी संस्कृति अपनी विशिष्ट पहचान के लिए जानी जाती है। वहीं हरियाणा इतिहास कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. यशवीर सिंह ने हरियाणा में संस्था के कार्यों और भविष्य की योजनाओं के बारे में बताया।
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12 राज्यों व साउथ कोरिया के शोधार्थी प्रस्तुत करेंगे शोध पत्र
महाविद्यालय में इतिहास के विभागाध्यक्ष व संयुक्त आयोजन सचिव डॉ. महेंद्र सिंह ने बताया कि अधिवेशन में इतिहास विषय पर भारत के 12 राज्यों व साउथ कोरिया के शोधार्थियों द्वारा शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे।
पहली बार सिंधु घाटी कालीन सभ्यता से जुड़े अवशेषों की कॉपी मॉडल तैयार कर लगाई प्रदर्शनी
हरियाणा इतिहास कांग्रेस के नौवें अधिवेशन में पहली बार सिंधु घाटी कालीन सभ्यता से जुड़े अवशेषों की कॉपी तैयार की गई थी, जिनके मॉडलों की प्रदर्शनी लगाई गई। कारण यह था कि युवाओं को ज्यादा से ज्यादा भारत व हरियाणा के गौरवमयी इतिहास से जोड़ना। इस प्रदर्शनी में पहली शताब्दी, 8वीं, 9वीं, 10वीं व 11वीं शताब्दी में बने भगवान श्रीगणेश, भगवान श्रीविष्णु, महात्मा बुद्ध व उमा महेश्वरी सहित देवी-देवताओं की मूर्तियों की कॉपी मॉडल रखे गए थे। वहीं प्रदर्शनी में विद्यार्थियों को आई चार विषयों पर आधारित इतिहास की पुस्तकें पसंद आई। इसमें सर्वाधिक विद्यार्थियों व लोगों ने आधुनिक भारत का इतिहास विषय की पुस्तकें खरीदी, दूसरे नंबर पर इतिहास के चरण, पर्यावरण इतिहास और चौथे नंबर पर विद्यार्थियों को पुरात्व विषय की पुस्तकें पंसद पर रही।