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पेट्रोल-डीजल खरीदने पर रोज बढ़ा साढ़े 15 लाख का बोझ, रसोई का सामान 10 फीसदी महंगा
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हिसार। जिले में पेट्रोल के दाम 100 के पार पहुंच गए हैं। वहीं, डीजल की रफ्तार भी लगातार बढ़ रही है। पिछले 10 दिनों में पेट्रोल के दाम 2.6 रुपये और डीजल के दाम 1.1 रुपये तक बढ़ा है। ऐसे में आमजन पर रोजाना पेट्रोल-डीजल खरीदने पर ही लगभग साढ़े 15 लाख रुपये का बोझ बढ़ गया है। वहीं, रसोई के सामान के दाम भी आसमान छू रहे हैं। रसोई का सामान 10 फीसदी तक महंगा हो गया है।
जिले में जो पेट्रोल 8 जुलाई को 98.11 रुपये था, वह अब 100.09 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच चुका है। जिले में औसतन 1 लाख 71 हजार 500 लीटर पेट्रोल की खपत हर रोज होती है। वहीं, डीजल के दाम पिछले 10 दिनों में ही 90.10 रुपये से एक रुपये से अधिक की बढ़ोतरी के साथ 91.11 रुपये हो गए हैं। जिले में औसतन प्रतिदिन 11 लाख 2 हजार 500 लीटर डीजल की खपत है। ऐसे में तेल के दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन चार्ज बढ़ता जा रहा है।
आंकड़ों पर एक नजर
पंप पेट्रोल की खपत डीजल की खपत
245 1.71 लाख लीटर 11.2 लाख लीटर
ट्रांसपोर्ट का भाड़ा 15 प्रतिशत तक बढ़ा
शहर में पेट्रोल के रेट शनिवार को 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच चुके हैं। दिन-प्रतिदिन पेट्रोलियम पदार्थों के रेट में हो रही बढ़ोतरी का असर दिखने लगा है। रसोई का सामान 10 प्रतिशत तक महंगा हो चुका है। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट ने भी भाड़े में 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर दी है। चूंकि अभी सरकार की तरफ से पेट्रोलियम पदार्थों के रेट घटाने को लेकर घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में महंगाई से अभी कोई राहत मिलने की संभावना नजर नहीं आ रही है।
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कुछ कंपनियों ने रेट बढ़ाए तो कुछ ने घटाई मात्रा
पिछले एक माह में खाद्य पदार्थों के रेट में 10 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। इस कारण लोगों को रसोई का सामान खरीदने के लिए अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ रही है। दुकानदारों की मानें तो कुछ कंपनियों ने रेट नहीं बढ़ाए तो उन्होंने सामान की मात्रा पहले से घटा दी है। इसकी ज्यादातर लोगों को जानकारी नहीं है और वह सोच रहे हैं कि उनके पुराने रेट में ही सामान मिल रहा है। उदाहरण के लिए पहले हिसार से मुुंबई का किराया 35 हजार रुपये था, जो अब 42 से 43 हजार रुपये कर दिया है। कोलकाता का किराया पहले 60 हजार रुपये था, लेकिन अब यह 69 हजार रुपये कर दिया गया है।
खाद्य सामान में बढ़ोतरी
दूध 2 रुपये प्रति लीटर
दही 3 रुपये प्रति लीटर
पनीर 15 रुपये प्रति किलो
आटा 10 रुपये प्रति किलो
सरसों का तेल 4 रुपये प्रति लीटर
रिफाइंड 2 रुपये प्रति लीटर
चाय पत्ती 10 रुपये प्रति किलो
लोगों का कहना
- दिनों दिन महंगाई बढ़ रही है। इसका मुख्य कारण पेट्रोलियम पदार्थों में हो रही बढ़ोतरी ही है। अब रसोई का सारा सामान ही महंगा हो गया है, जिसने घर के बजट को भी बिगाड़ दिया है। - पूजा कस्वां, गृहिणी
कंपनियों ने अपने सामान के रेट बढ़ा दिए हैं। पहले जो रसोई का सामान दो हजार रुपये में आता था। अब उसके लिए ग्राहक को 2200 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। - खरैती मोहन खुराना, किराना मालिक
पेट्रोल के बढ़ते दामों ने हालत पतली कर दी है। जब पेट्रोल 84 रुपये लीटर था उस समय प्रति माह चार हजार रुपये का खर्चा आता था, अब यह बढ़कर साढ़े पांच हजार तक पहुंच गया था। मैं प्रतिदिन बाइक पर 80 से 100 किलोमीटर तक घूमता हूं। - राहुल भादू, कर्मचारी
क्रूड ऑयल के दाम पहले भी इतने ही रहे हैं, जितने अब हैं, लेकिन कभी पेट्रोल-डीजल के दाम 100 के पार नहीं पहुंचे। दाम बढ़ने के कारण महंगाई बढ़ रही है और आम लोगों पर बोझ बढ़ रहा है। सरकार एक्साइज ड्यूटी ज्यादा ले रही है। सरकार चाहे तो पेट्रोल-डीजल के दाम 20 रुपये तक भी कम कर सकती है। - राजकुमार सलेमगढ़, प्रधान, पेट्रोल पंप एसोसिएशन हिसार
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जिले में जो पेट्रोल 8 जुलाई को 98.11 रुपये था, वह अब 100.09 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच चुका है। जिले में औसतन 1 लाख 71 हजार 500 लीटर पेट्रोल की खपत हर रोज होती है। वहीं, डीजल के दाम पिछले 10 दिनों में ही 90.10 रुपये से एक रुपये से अधिक की बढ़ोतरी के साथ 91.11 रुपये हो गए हैं। जिले में औसतन प्रतिदिन 11 लाख 2 हजार 500 लीटर डीजल की खपत है। ऐसे में तेल के दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन चार्ज बढ़ता जा रहा है।
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आंकड़ों पर एक नजर
पंप पेट्रोल की खपत डीजल की खपत
245 1.71 लाख लीटर 11.2 लाख लीटर
ट्रांसपोर्ट का भाड़ा 15 प्रतिशत तक बढ़ा
शहर में पेट्रोल के रेट शनिवार को 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच चुके हैं। दिन-प्रतिदिन पेट्रोलियम पदार्थों के रेट में हो रही बढ़ोतरी का असर दिखने लगा है। रसोई का सामान 10 प्रतिशत तक महंगा हो चुका है। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट ने भी भाड़े में 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर दी है। चूंकि अभी सरकार की तरफ से पेट्रोलियम पदार्थों के रेट घटाने को लेकर घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में महंगाई से अभी कोई राहत मिलने की संभावना नजर नहीं आ रही है।
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कुछ कंपनियों ने रेट बढ़ाए तो कुछ ने घटाई मात्रा
पिछले एक माह में खाद्य पदार्थों के रेट में 10 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। इस कारण लोगों को रसोई का सामान खरीदने के लिए अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ रही है। दुकानदारों की मानें तो कुछ कंपनियों ने रेट नहीं बढ़ाए तो उन्होंने सामान की मात्रा पहले से घटा दी है। इसकी ज्यादातर लोगों को जानकारी नहीं है और वह सोच रहे हैं कि उनके पुराने रेट में ही सामान मिल रहा है। उदाहरण के लिए पहले हिसार से मुुंबई का किराया 35 हजार रुपये था, जो अब 42 से 43 हजार रुपये कर दिया है। कोलकाता का किराया पहले 60 हजार रुपये था, लेकिन अब यह 69 हजार रुपये कर दिया गया है।
खाद्य सामान में बढ़ोतरी
दूध 2 रुपये प्रति लीटर
दही 3 रुपये प्रति लीटर
पनीर 15 रुपये प्रति किलो
आटा 10 रुपये प्रति किलो
सरसों का तेल 4 रुपये प्रति लीटर
रिफाइंड 2 रुपये प्रति लीटर
चाय पत्ती 10 रुपये प्रति किलो
लोगों का कहना
- दिनों दिन महंगाई बढ़ रही है। इसका मुख्य कारण पेट्रोलियम पदार्थों में हो रही बढ़ोतरी ही है। अब रसोई का सारा सामान ही महंगा हो गया है, जिसने घर के बजट को भी बिगाड़ दिया है। - पूजा कस्वां, गृहिणी
कंपनियों ने अपने सामान के रेट बढ़ा दिए हैं। पहले जो रसोई का सामान दो हजार रुपये में आता था। अब उसके लिए ग्राहक को 2200 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। - खरैती मोहन खुराना, किराना मालिक
पेट्रोल के बढ़ते दामों ने हालत पतली कर दी है। जब पेट्रोल 84 रुपये लीटर था उस समय प्रति माह चार हजार रुपये का खर्चा आता था, अब यह बढ़कर साढ़े पांच हजार तक पहुंच गया था। मैं प्रतिदिन बाइक पर 80 से 100 किलोमीटर तक घूमता हूं। - राहुल भादू, कर्मचारी
क्रूड ऑयल के दाम पहले भी इतने ही रहे हैं, जितने अब हैं, लेकिन कभी पेट्रोल-डीजल के दाम 100 के पार नहीं पहुंचे। दाम बढ़ने के कारण महंगाई बढ़ रही है और आम लोगों पर बोझ बढ़ रहा है। सरकार एक्साइज ड्यूटी ज्यादा ले रही है। सरकार चाहे तो पेट्रोल-डीजल के दाम 20 रुपये तक भी कम कर सकती है। - राजकुमार सलेमगढ़, प्रधान, पेट्रोल पंप एसोसिएशन हिसार