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गबन मामला: पत्र के बावजूद रिकॉर्ड लेकर नहीं पहुंचे तत्कालीन अधिकारी और कर्मचारी
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बाढड़ा (चरखी दादरी)। उपमंडल की ग्राम पंचायतों में गबन का मामला उजागर होने और बीडीपीओ के पत्र भेजने के बाद भी सात तत्कालीन अधिकारी व कर्मचारियों ने रिकॉर्ड जमा करवाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। 16 मार्च को लिखे पत्र में बीडीपीओ रोशनलाल ने इन सातों अधिकारियों व कर्मचारियों को रिकॉर्ड जमा करवाने के लिए 21 मार्च की सुबह दस बजे तक का समय दिया था। शाम तक भी कोई तत्कालीन अधिकारी व कर्मचारी रिकॉर्ड लेकर नहीं पहुंचा और इसकी पुष्टि बीडीपीओ रोशनलाल ने ही की है।
गौरतलब है कि पंचायत विभाग की लेखा शाखा में रखे रिकॉर्ड की जांच करने पर अधूरा मिला था। 16 मार्च को बीडीपीओ ने इस संबंध में सात तत्कालीन अधिकारियों व कर्मचारियों को पत्र लिखा था। इनमें सतनाली बीडीपीओ नरेंद्र ढुल, सांपला बीडीपीओ सुमित कुमार, रिटायर्ड बीडीपीओ देशबंधु, झोझू ग्राम सचिव राजेश, महेंद्रगढ़ में तैनात लिपिक महेश, रेवाड़ी कार्यालय में तैनात लेखाकार सुरेंद्र सिंह और आदमपुर कार्यालय में तैनात लेखाकार मोहनलाल शामिल हैं। इसमें उन्हें 21 मार्च को सुबह दस बजे बाढड़ा कार्यालय में हाजिर होकर अधूरा रिकॉर्ड को पूरा करवाने करने के निर्देश दिए गए थे। यह समयावधि बीत चुकी है, लेकिन किसी ने रिकॉर्ड जमा नहीं करवाया।
संवाददाता ने इस संबंध में जब बीडीपीओ रोशनलाल से बातचीत की तो उन्होंने इसकी पुष्टि कर दी। रोशनलाल ने कहा कि सातों में से कोई भी रिकॉर्ड लेकर नहीं पहुंचा और अब एक दिन और इंतजार किया जाएगा। इसके बाद उच्चाधिकारियों के संज्ञान में मामला लाकर अगली कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने बताया कि एक लेखाकार ने रिकॉर्ड को लेकर उनसे फोन पर संपर्क जरूर किया है और उसने मंगलवार को रिकॉर्ड जमा करवाने की बात कही है।
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करोड़ों का रिकॉर्ड है गायब, ग्राम सचिव के गबन के बाद खुला राज
पंचायत विभाग की लेखा शाखा से करोड़ों के विकास कार्यों का रिकॉर्ड ही गायब है और यह खुलासा यहां रखे रिकॉर्ड के अवलोकन के बाद हुआ है। यह रिकॉर्ड ग्राम सचिव मुकेश का गबन सामने आने के बाद जांचा गया था। करोड़ों रुपये के विकास कार्यों का रिकॉर्ड न मिलना बड़े घपले की ओर इशारा कर रहा है। अगर घपला उजागर होता है तो इसमें तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
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गौरतलब है कि पंचायत विभाग की लेखा शाखा में रखे रिकॉर्ड की जांच करने पर अधूरा मिला था। 16 मार्च को बीडीपीओ ने इस संबंध में सात तत्कालीन अधिकारियों व कर्मचारियों को पत्र लिखा था। इनमें सतनाली बीडीपीओ नरेंद्र ढुल, सांपला बीडीपीओ सुमित कुमार, रिटायर्ड बीडीपीओ देशबंधु, झोझू ग्राम सचिव राजेश, महेंद्रगढ़ में तैनात लिपिक महेश, रेवाड़ी कार्यालय में तैनात लेखाकार सुरेंद्र सिंह और आदमपुर कार्यालय में तैनात लेखाकार मोहनलाल शामिल हैं। इसमें उन्हें 21 मार्च को सुबह दस बजे बाढड़ा कार्यालय में हाजिर होकर अधूरा रिकॉर्ड को पूरा करवाने करने के निर्देश दिए गए थे। यह समयावधि बीत चुकी है, लेकिन किसी ने रिकॉर्ड जमा नहीं करवाया।
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संवाददाता ने इस संबंध में जब बीडीपीओ रोशनलाल से बातचीत की तो उन्होंने इसकी पुष्टि कर दी। रोशनलाल ने कहा कि सातों में से कोई भी रिकॉर्ड लेकर नहीं पहुंचा और अब एक दिन और इंतजार किया जाएगा। इसके बाद उच्चाधिकारियों के संज्ञान में मामला लाकर अगली कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने बताया कि एक लेखाकार ने रिकॉर्ड को लेकर उनसे फोन पर संपर्क जरूर किया है और उसने मंगलवार को रिकॉर्ड जमा करवाने की बात कही है।
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करोड़ों का रिकॉर्ड है गायब, ग्राम सचिव के गबन के बाद खुला राज
पंचायत विभाग की लेखा शाखा से करोड़ों के विकास कार्यों का रिकॉर्ड ही गायब है और यह खुलासा यहां रखे रिकॉर्ड के अवलोकन के बाद हुआ है। यह रिकॉर्ड ग्राम सचिव मुकेश का गबन सामने आने के बाद जांचा गया था। करोड़ों रुपये के विकास कार्यों का रिकॉर्ड न मिलना बड़े घपले की ओर इशारा कर रहा है। अगर घपला उजागर होता है तो इसमें तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता।