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30 पुर्जें से बना है ई-ट्रैक्टर, 23 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगा
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ई-ट्रैक्टर पर बैठे एचएयू के कुलपति प्रोफेसर बीआर कांबोज व साथ में अन्य अधिकारी। संवाद
- फोटो : Hisar
हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर पर अनुसंधान करने वाला देश का पहला कृषि विश्वविद्यालय बन गया है। विश्वविद्यालय के कृषि इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी कॉलेज ने इस ई-ट्रैक्टर को तैयार किया है। यह टैक्टर 16.2 किलोवाट की बैटरी से चलता है और डीजल ट्रैक्टर की तुलना में इसकी संचालन लागत बहुत कम है।
मात्र 30 पुर्जें, 23 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार और 160 रुपये में चार्जिंग जैसी सुविधाओं से लैस ई-ट्रैक्टर की लान्चिंग रविवार को एचएयू ने की। प्रेसवार्ता के दौरान कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने बताया कि ई-ट्रैक्टर में अगर किसी तरह का कोई फॉल्ट आता है तो बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम खुद ही सप्लाई काट देगा, जिससे ई-ट्रैक्टर बंद हो जाएगा। इस मौके पर कृषि मशीनरी और फार्म इंजीनियरिंग विभाग के वैैज्ञानिक डॉ. मुकेश जैन, डॉ. अमरजीत कालरा, डॉ. एसके सेहरावत, डॉ. अतुल ढींगरा, डॉ. विजया रानी, एमटेक छात्र वेंकटेश शिंदे मौजूद रहे।
6 लाख रुपये की कीमत, अन्य ट्रैक्टरों की तुलना में 52 प्रतिशत कम कंपन
ई-ट्रैक्टर की खासियत यह है कि डीजल के ट्रैक्टर की तुलना में यह 52 प्रतिशत कम कंपन और 21 प्रतिशत शोर कम करता है। हालांकि अभी तक ई-ट्रैक्टर कीमत साढ़े 6 लाख रुपये है। जबकि डीजल ट्रैक्टर की कीमत साढ़े 4 लाख रुपये है, लेकिन अगर छह सालों की बात करें तो डीजल ट्रैक्टर में तेल का खर्चा और ई-ट्रैक्टर में चार्जिंग का खर्चा जोड़ा जाए तो 25 प्रतिशत सस्ता ई-ट्रैक्टर मिलेगा।
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20 यूनिट बिजली की खपत, 9 घंटे में फुल चार्ज
ई-ट्रैक्टर में लगी बैटरी 16.2 किलोवाट की लिथियम आयन बैटरी है। इसमें 72 वोल्टेज की डीसी मोटर है जोकि 2 हजार चक्कर प्रति मिनट तक संचालित होती है। वैसे तो ई-ट्रैक्टर को 9 घंटे में फुल चार्ज किया जा सकता है। लेकिन अगर फास्ट चार्जिंग की सुविधा होने से इसी ई-ट्रैक्टर को 4 घंटे में भी चार्ज किया जा सकता है।
आज ही कर सकते हैं आवेदन, 3 माह बाद मिल जाएगी चाबी
एचएयू के कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने बताया कि इच्छुक किसान या फिर आमजन यदि ई-ट्रैक्टर पाने के लिए आवेदन करता है तो 3 माह के अंतराल में उसे चाबी मिल जाएगी। विशेष बात है कि यदि ई-ट्रैक्टर का कोई उपकरण खराब होता है तो हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय से प्राप्त कर सकता है। कुलपति ने बताया कि अगर कोई आवेदन करना चाहता है तो वह एचएयू से संपर्क कर सकता है।
ये हैं अन्य खासियतें
- संचालन के लिए डीजल ईंधन की खपत नहीं होती।
- डीजल इंजन ट्रैक्टर की तरह कार्बन-डाईक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड उत्पन्न नहीं करता है, ताकि प्रदूषण न हो।
- शोर कम करता है।
- कम यांत्रिक कंपन है।
- ई-ट्रैक्टर में चालक के पास इंजन नहीं लगा होता, जिससे न गर्मी, न शोर और न ही कंपन का एहसास होगा।
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मात्र 30 पुर्जें, 23 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार और 160 रुपये में चार्जिंग जैसी सुविधाओं से लैस ई-ट्रैक्टर की लान्चिंग रविवार को एचएयू ने की। प्रेसवार्ता के दौरान कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने बताया कि ई-ट्रैक्टर में अगर किसी तरह का कोई फॉल्ट आता है तो बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम खुद ही सप्लाई काट देगा, जिससे ई-ट्रैक्टर बंद हो जाएगा। इस मौके पर कृषि मशीनरी और फार्म इंजीनियरिंग विभाग के वैैज्ञानिक डॉ. मुकेश जैन, डॉ. अमरजीत कालरा, डॉ. एसके सेहरावत, डॉ. अतुल ढींगरा, डॉ. विजया रानी, एमटेक छात्र वेंकटेश शिंदे मौजूद रहे।
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6 लाख रुपये की कीमत, अन्य ट्रैक्टरों की तुलना में 52 प्रतिशत कम कंपन
ई-ट्रैक्टर की खासियत यह है कि डीजल के ट्रैक्टर की तुलना में यह 52 प्रतिशत कम कंपन और 21 प्रतिशत शोर कम करता है। हालांकि अभी तक ई-ट्रैक्टर कीमत साढ़े 6 लाख रुपये है। जबकि डीजल ट्रैक्टर की कीमत साढ़े 4 लाख रुपये है, लेकिन अगर छह सालों की बात करें तो डीजल ट्रैक्टर में तेल का खर्चा और ई-ट्रैक्टर में चार्जिंग का खर्चा जोड़ा जाए तो 25 प्रतिशत सस्ता ई-ट्रैक्टर मिलेगा।
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20 यूनिट बिजली की खपत, 9 घंटे में फुल चार्ज
ई-ट्रैक्टर में लगी बैटरी 16.2 किलोवाट की लिथियम आयन बैटरी है। इसमें 72 वोल्टेज की डीसी मोटर है जोकि 2 हजार चक्कर प्रति मिनट तक संचालित होती है। वैसे तो ई-ट्रैक्टर को 9 घंटे में फुल चार्ज किया जा सकता है। लेकिन अगर फास्ट चार्जिंग की सुविधा होने से इसी ई-ट्रैक्टर को 4 घंटे में भी चार्ज किया जा सकता है।
आज ही कर सकते हैं आवेदन, 3 माह बाद मिल जाएगी चाबी
एचएयू के कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने बताया कि इच्छुक किसान या फिर आमजन यदि ई-ट्रैक्टर पाने के लिए आवेदन करता है तो 3 माह के अंतराल में उसे चाबी मिल जाएगी। विशेष बात है कि यदि ई-ट्रैक्टर का कोई उपकरण खराब होता है तो हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय से प्राप्त कर सकता है। कुलपति ने बताया कि अगर कोई आवेदन करना चाहता है तो वह एचएयू से संपर्क कर सकता है।
ये हैं अन्य खासियतें
- संचालन के लिए डीजल ईंधन की खपत नहीं होती।
- डीजल इंजन ट्रैक्टर की तरह कार्बन-डाईक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड उत्पन्न नहीं करता है, ताकि प्रदूषण न हो।
- शोर कम करता है।
- कम यांत्रिक कंपन है।
- ई-ट्रैक्टर में चालक के पास इंजन नहीं लगा होता, जिससे न गर्मी, न शोर और न ही कंपन का एहसास होगा।