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Hisar News: तहसीलदार के फैसले के कारण पार्षदों को रात 9 बजे तक तहसील कार्यालय में बैठने को होना पड़ा मजबूर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 08 Aug 2023 11:27 PM IST
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Due to the Tehsildar's decision, the councilors were forced to sit in the Tehsil office till 9 pm.
हिसार। नगर निगम के मेयर कार्यालय में बैठक करते पार्षद। 
हिसार। तहसीलदार के एक फैसले के कारण पार्षदों को तहसील कार्यालय में रात 9 बजे तक बैठने को मजबूर होना पड़ा। इस फैसले के विरोध में मंगलवार को पार्षद नगर निगम कार्यालय में एकत्रित हुए। पार्षदों की मानें तो तहसीलदार ने रजिस्ट्री के समय जनप्रतिनिधि की गवाही को जरूरी कर दिया है। ऐसे तो उन्हें पूरा दिन तहसील कार्यालय में ही बैठना पड़ेगा। सभी पार्षदों ने मिलकर यह फैसला भी लिया कि रजिस्ट्री के समय वह गवाही के लिए नहीं जाएंगे। पार्षदों ने इसे लेकर उपायुक्त उत्तम सिंह को ज्ञापन भी सौंपा है।
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पार्षदों ने बताया कि वर्ष 2003 में सरकार की तरफ से एक पत्र जारी किया गया था, जिसके अनुसार रजिस्ट्री के समय किसी जनप्रतिनिधि की गवाही को अनिवार्य किया था। जनप्रतिनिधियों में एमपी, एमएलए, जिला पार्षद, बीडीसी मेंबर, पंचायत सदस्य, मेयर, प्रधान, उपप्रधान, पार्षद, राजपत्रित अधिकारी व सैन्य अधिकारी शामिल हैं। चूंकि शहर में पार्षद ही लोगों को आसानी से उपलब्ध होते हैं तो लोग भी रजिस्ट्री के समय इन्हें भी बुलाएंगे। पार्षदों के मुताबिक आज के समय में यह नियम कहीं भी लागू नहीं है। हालांकि इसके बाद वर्ष 2022 में एक और पत्र जारी किया गया था, जिसके मुताबिक यदि दोनों पक्षकार सहमत हैं तो आधार कार्ड के आधार पर भी सत्यापन किया जा सकता है। पार्षदों ने बताया कि नए फैसले से पार्षदों का सारा समय तहसील में ही लग जाएगा और पार्षद विकास के अन्य कार्य नहीं करवा सकेंगे।
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पार्षद बोले-पुरानी व्यवस्था की जाए लागू
पार्षदों ने बताया कि इससे पहले रजिस्ट्री के समय वकीलों की गवाही भी मान्य थी, लेकिन तहसीलदार ने इसे अमान्य कर दिया। इंतकाल के समय भी पार्षद की रिपोर्ट पर ही इंतकाल दर्ज हो जाता था। फोटो खिंचवाने की जरूरत नहीं होती है। उनकी मांग है कि रजिस्ट्री के समय नंबरदार व वकीलों की गवाही की जाए, जैसा कि पहले काफी समय से ऐसा चल रहा है। रजिस्ट्री के समय पार्षदों को ना बुलाया जाए। साथ ही विरासत के इंतकाल के समय फोटो के लिए पार्षद को न बुलाया जाए और रिपोर्ट पर ही इंतकाल किया जाए। इस अवसर पर सीनियर डिप्टी मेयर अनिल सैनी, पार्षद अनिल जैन, डॉ. उमेश खन्ना, मनोहर लाल, भूप सिंह रोहिल्ला, जगमोहन मित्तल, अमित ग्रोवर, प्रीतम सैनी, पिंकी शर्मा, मनोनीत पार्षद सतीश सुरलिया, पार्षद प्रतिनिधि प्रवीण केडिया, पंकज दीवान, सुशील शर्मा व राजकुमार मौजूद रहे।
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रात 9 बजे तक तहसील कार्यालय में ही रुकना पड़ा
सोमवार को पार्षद जगमोहन मित्तल, पार्षद प्रतिनिधि उदयवीर मींटू व एक अन्य पार्षद को रजिस्ट्री के समय गवाही देने के लिए जाना पड़ा। ये तीनों पार्षद रात 9 बजे जाकर इस कार्य से फ्री हुए और फिर घर लौटे।


यह नया नियम नहीं है। यह पहले से ही था। इसमें पार्षद का ही होना अनिवार्य नहीं है। इसमें 8-9 कैटेगरी हैं, जो भी इनमें से उपलब्ध हो सके। आधार कार्ड की सहायता से सत्यापन सिस्टम अगर लागू हो जाता है तो रजिस्ट्री के समय किसी की गवाही की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह सिस्टम लागू किया गया था, लेकिन उसकी स्पीड काफी धीमी थी, जिस कारण वह सफल नहीं हो सका। कोशिश की जाएगी कि यह सिस्टम भी शुरू हो जाए। अगर किसी व्यक्ति को कोई गवाह नहीं मिलता है तो वह सिस्टम की मदद ले सके।

शालिनी लाठर, तहसीलदार
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