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9 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में डीएसपी और एसआई अदालत में पेश
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हिसार। 9 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के एक मामले में सोमवार को जेएमआईसी सोनिया की अदालत में सुनवाई हुई। इसमें डीएसपी हेडक्वार्टर अशोक कुमार और एसआई विनोद पेश हुए। मामले में अगली सुनवाई 3 दिसंबर की तारीख दी है।
अग्रवाल कालोनी निवासी विनोद कुमार के अधिवक्ता रमेश यादव ने बताया कि विनोद सहित 175 लोगों से करीब 9 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई थी। सिटी थाना पुलिस ने 18 मार्च 2018 को धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया था। रेड स्क्वेयर मार्केट स्थित दी हिसार अर्बन को-आपरेटिव बैंक लिमिटेड के पूर्व अधिकारी प्रमोद भारद्वाज, प्रमोद भारद्वाज की पत्नी निर्मल, राकेश सिंगल, राकेश सिंघल की पत्नी इंदू सिंघल, जिला टाउन प्लानिंग अधिकारी अनिल जैन, जेबीटी अध्यापक सुरेंद्र, कमल शर्मा, राजेश शर्मा ने मिलकर वर्ष 1997 में को-आपरेटिव सोसायटी बनाई। सोसायटी का नाम दी हिसार फ्रेंड्स एनएटीसी को-ऑपरेटिव सोसायटी था। बहकावे में आकर करीब 175 लोगों ने 9 करोड़ रुपये एफडीआर एवं सेविंग खाता के रूप में जमा करवाए। जब जमाकर्ताओं ने सोसायटी से रुपये निकलवाने चाहे तो पता चला कि सोसायटी के सभी पदाधिकारियों ने उनकी राशि से अपने व नजदीकी रिश्तेदारों व दोस्तों के नाम प्रॉपर्टी खरीद ली। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि सहकारी समितियों के अधिकारियों व पुलिस ने जांच के नाम पर खानापूर्ति की।
इसके बारे में शिकायतकर्ता विनोद को जानकारी नहीं दी गई। जांच में डीएसपी अशोक कुमार एवं तत्कालीन शहर थाना प्रभारी विनोद कुमार ने तीन आरोपियों को केस से निकाल दिया। शिकायतकर्ता ने मामले की शिकायत जिला एसपी को दी। जांच के लिए सात सदस्यों की एसआईटी बनाई गई। एसआईटी में डीएसपी हेडक्वार्टर अशोक कुमार को प्रमुख बनाया गया। मामले में अदालत की ओर से डीएसपी व तत्कालीन थाना प्रभारी को नोटिस जारी कर तलब किया था।
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अग्रवाल कालोनी निवासी विनोद कुमार के अधिवक्ता रमेश यादव ने बताया कि विनोद सहित 175 लोगों से करीब 9 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई थी। सिटी थाना पुलिस ने 18 मार्च 2018 को धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया था। रेड स्क्वेयर मार्केट स्थित दी हिसार अर्बन को-आपरेटिव बैंक लिमिटेड के पूर्व अधिकारी प्रमोद भारद्वाज, प्रमोद भारद्वाज की पत्नी निर्मल, राकेश सिंगल, राकेश सिंघल की पत्नी इंदू सिंघल, जिला टाउन प्लानिंग अधिकारी अनिल जैन, जेबीटी अध्यापक सुरेंद्र, कमल शर्मा, राजेश शर्मा ने मिलकर वर्ष 1997 में को-आपरेटिव सोसायटी बनाई। सोसायटी का नाम दी हिसार फ्रेंड्स एनएटीसी को-ऑपरेटिव सोसायटी था। बहकावे में आकर करीब 175 लोगों ने 9 करोड़ रुपये एफडीआर एवं सेविंग खाता के रूप में जमा करवाए। जब जमाकर्ताओं ने सोसायटी से रुपये निकलवाने चाहे तो पता चला कि सोसायटी के सभी पदाधिकारियों ने उनकी राशि से अपने व नजदीकी रिश्तेदारों व दोस्तों के नाम प्रॉपर्टी खरीद ली। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि सहकारी समितियों के अधिकारियों व पुलिस ने जांच के नाम पर खानापूर्ति की।
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इसके बारे में शिकायतकर्ता विनोद को जानकारी नहीं दी गई। जांच में डीएसपी अशोक कुमार एवं तत्कालीन शहर थाना प्रभारी विनोद कुमार ने तीन आरोपियों को केस से निकाल दिया। शिकायतकर्ता ने मामले की शिकायत जिला एसपी को दी। जांच के लिए सात सदस्यों की एसआईटी बनाई गई। एसआईटी में डीएसपी हेडक्वार्टर अशोक कुमार को प्रमुख बनाया गया। मामले में अदालत की ओर से डीएसपी व तत्कालीन थाना प्रभारी को नोटिस जारी कर तलब किया था।
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