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जिला अस्पताल को डीएनबी कोर्स के लिए मिली अनुमति
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हिसार। शहर के नागरिक अस्पताल को डीएनबी कोर्स के लिए अनुमति मिल गई है। इसके तहत जिला अस्पताल में मेडिकल के विद्यार्थी दो साल के लिए डीएनबी कोर्स में दाखिला ले पाएंगे, जोकि मेडिकल कॉलेज की तर्ज पर होगा। इसके लिए डिप्लामेट ऑफ नेशनल बोर्ड ने मंजूरी दी है। कोर्स की छह सीटें निर्धारित की गई हैं। इस कोर्स को शुरू कराने के लिए अस्पताल के पीएमओ डॉ. गोविंद गुप्ता लगातार प्रयास कर रहे थे।
बता दें कि डिप्लामेट ऑफ नेशनल बोर्ड की टीम ने 23 फरवरी को जिला अस्पताल में दौरे के लिए आई थी। इसका अस्पताल को भी काफी समय से इंतजार था और अब जाकर अनुमति मिल गई है। जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल को पहले भी डीएनबी कोर्स के अनुमति मिल जाती, लेकिन इस बीच कोरोना की दूसरी लहर की शुरुआत हो गई। इसके कारण अनुमति मिलने में देरी हुई। इस सुविधा के शुरू होने से अस्पताल के चिकित्सकों को बार-बार तबादले से भी निजात मिलेगी, क्योंकि एक तरह से यह चिकित्सक होने के साथ ही अध्यापक भी होंगे। इससे अब चिकित्सकों के जल्दी से तबादले भी नहीं होंगे।
सीटों का विवरण
फैमिली मेडिसिन 4 सीट
बाल रोग 2 सीट
ईएनटी 2 सीट
यह होता डीएनबी कोर्स
डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड की ओर से डीएनबी का कोर्स कराया जाता है। यह 3 साल का होता है जो एमडी के समकक्ष रहता है। अभी तक डीएनबी मेडिकल कॉलेजों से ही डिप्लोमा के बाद कंप्लीट होता था, लेकिन अन्य राज्यों की तर्ज पर अब हरियाणा में भी पहली बार जिले के सरकारी अस्पतालों में भी एमबीबीएस डॉक्टर डीएनबी का डिप्लोमा कर सकते हैं। ऐसे में उन्हें अब इस कोर्स के लिए शहर छोड़ कर मेडिकल कॉलेज में जाने की जरूरत नहीं होगी। डीएनबी का डिप्लोमा नेशनल बोर्ड द्वारा करवाया जाता है। इसके लिए बाकायदा एंट्रेंस एग्जाम होते हैं और एमबीबीएस चिकित्सक को मेरिट के आधार पर अपने पसंदीदा विभागों में ज्वाइनिंग करने की सहूलियत मिलती है। नियम के तहत डिप्लोमा वही किया जा सकता है जहां एसएमओ, एमओ, एमडी अपनी सेवाएं देते हैं।
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बता दें कि डिप्लामेट ऑफ नेशनल बोर्ड की टीम ने 23 फरवरी को जिला अस्पताल में दौरे के लिए आई थी। इसका अस्पताल को भी काफी समय से इंतजार था और अब जाकर अनुमति मिल गई है। जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल को पहले भी डीएनबी कोर्स के अनुमति मिल जाती, लेकिन इस बीच कोरोना की दूसरी लहर की शुरुआत हो गई। इसके कारण अनुमति मिलने में देरी हुई। इस सुविधा के शुरू होने से अस्पताल के चिकित्सकों को बार-बार तबादले से भी निजात मिलेगी, क्योंकि एक तरह से यह चिकित्सक होने के साथ ही अध्यापक भी होंगे। इससे अब चिकित्सकों के जल्दी से तबादले भी नहीं होंगे।
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सीटों का विवरण
फैमिली मेडिसिन 4 सीट
बाल रोग 2 सीट
ईएनटी 2 सीट
यह होता डीएनबी कोर्स
डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड की ओर से डीएनबी का कोर्स कराया जाता है। यह 3 साल का होता है जो एमडी के समकक्ष रहता है। अभी तक डीएनबी मेडिकल कॉलेजों से ही डिप्लोमा के बाद कंप्लीट होता था, लेकिन अन्य राज्यों की तर्ज पर अब हरियाणा में भी पहली बार जिले के सरकारी अस्पतालों में भी एमबीबीएस डॉक्टर डीएनबी का डिप्लोमा कर सकते हैं। ऐसे में उन्हें अब इस कोर्स के लिए शहर छोड़ कर मेडिकल कॉलेज में जाने की जरूरत नहीं होगी। डीएनबी का डिप्लोमा नेशनल बोर्ड द्वारा करवाया जाता है। इसके लिए बाकायदा एंट्रेंस एग्जाम होते हैं और एमबीबीएस चिकित्सक को मेरिट के आधार पर अपने पसंदीदा विभागों में ज्वाइनिंग करने की सहूलियत मिलती है। नियम के तहत डिप्लोमा वही किया जा सकता है जहां एसएमओ, एमओ, एमडी अपनी सेवाएं देते हैं।
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