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डेंगू : अवकाश के कारण जांच न होने से 35 दिन बाद नहीं मिला कोई केस, एसडीपी किट का संकट बरकरार
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हिसार। जिले में वीरवार को दिवाली अवकाश के कारण डेंगू संदिग्धों के सैंपल की जांच नहीं हो सकी। इस कारण से 35 दिन बाद शुक्रवार को डेंगू का कोई नया केस नहीं मिला। इससे पहले दिवाली वाले दिन डेंगू के 35 नए केस मिले थे और आंकड़ा 523 पर पहुंच गया। वहीं, सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) किट खत्म होने से समस्या बनी हुई है।
जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. सुभाष खतरेजा ने बताया कि डेंगू मरीजो में से 453 स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 69 सक्रिय डेंगू मरीज अस्पतालों में उपचाराधीन है। अब तक 2819 सैंपल किए जा चुके है। विभाग ने अब तक एक मौत की पुष्टि की है। हालांकि करीब 10 डेंगू संदिग्धों की मौत हो चुकी है। जिले में डेंगू मरीजों की संख्या 523 हो गई है। इसके साथ ही पिछले 10 वर्षों में जिले में डेंगू केस मिलने का तीसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। इससे ज्यादा केस 2017 में 538 और 2015 में सर्वाधिक 1140 केस मिल चुके हैं।
आंकड़ों पर एक नजर
वर्ष डेंगू
2011 02
2012 22
2013 199
2014 17
2015 1140
2016 496
2017 538
2018 282
2019 168
2020 117
2021 523
पिछले छह दिनों से नहीं पहुंची किट
जिले में सिंगल डोनर प्लेटलेट्स के लिए मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। पिछले छह दिनों से हिसार में एसडीपी की किट उपलब्ध नहीं है। ब्लड बैंक मालिक लगातार संबंधित कंपनियों को डिमांड भेज रहे हैं, लेकिन दिवाली के बाद ही कंपनियों ने किट भेजने की बात कही थी। मगर शुक्रवार को भी ब्लड बैंकों पर एसडीपी किट नहीं पहुंची।
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कुछ ब्लड बैंको ने आरडीपी चढ़ानी की बंद
उधर, कुछ ब्लड बैंक ने आरडीपी यानि रैंडम डोनर प्लेटलेट्स चढ़ानी बंद कर दी है। आरडीपी के सरकारी रेट 400 रुपये निर्धारित है जबकि इसे निकालने में अलग-अलग कंपनियों के आरडीपी बैग इस्तेमाल किए जाते हैं, जिनकी कीमत भी 400 रुपये पड़ रही है। ऐसे में उन्हें आरडीपी करने से किसी तरह का लाभ नहीं मिल रहा, जिसके चलते आरडीपी बंद कर दी।
डेंगू के मुख्यत : चार टाइप होते हैं
पहली स्टेज : पहली स्टेज में हल्का बुखार व कमर दर्द होने के लक्षण सामने आते है।
दूसरी स्टेज : आंखों के अंदर दर्द होने, तेज बुखार होने, शरीर के जोड़ो में दर्द, कमर दर्द जैसे लक्षण मिलते है।
तीसरी स्टेज डेंगू हेमर्जिक फीवर : इस स्टेज में खून के चकते जैसे निशान बन जाते है। प्लेटलेट्स कम हो जाती हैं।
चौथी स्टेज डेंगू शोक सिंड्रोम : यह डेंगू की खतरनाक स्थिति होती है। बीपी और प्लेटलेट्स दोनों कम हो जाती है। इसमें शरीर में पानी की कमी होती जाती है, जिससे रिकवरी करना मुश्किल हो जाता है।
बकरी का कच्चा दूध न पिए
डेंगू मरीजों में उल्टी-दस्त के मरीज मिल रहे है। इनकी प्लेटलेट्स तो ठीक हो जाती है। मगर कई मरीजों में देखने में आया कि बकरी का कच्चा दूध पीने से उल्टी-दस्त के मरीज बढ़ रहे हैं। कच्चा दूध नहीं पीना चाहिए। डेंगू में उल्टी के लक्षण भी आते हैं। इसमें छठा और सातवां दिन घातक साबित हो सकता है। बुखार के बाद उल्टी आने पर चिकित्सक से उपचार करवाए। प्लेटलेट्स लगातार चेक करवाते रहे। - डॉ. अजय चुग, फिजिशियन, सिविल अस्पताल, हिसार
शुक्रवार को भी किट नहीं पहुंची। कंपनी कर्मचारियों को फोन करते हैं तो जवाब मिलाता है कि किट नहीं आई है। जब आएगी तो भेज देंगे। - डॉ. संदीप कालरा, सर्वोदय ब्लड बैंक, हिसार
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जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. सुभाष खतरेजा ने बताया कि डेंगू मरीजो में से 453 स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 69 सक्रिय डेंगू मरीज अस्पतालों में उपचाराधीन है। अब तक 2819 सैंपल किए जा चुके है। विभाग ने अब तक एक मौत की पुष्टि की है। हालांकि करीब 10 डेंगू संदिग्धों की मौत हो चुकी है। जिले में डेंगू मरीजों की संख्या 523 हो गई है। इसके साथ ही पिछले 10 वर्षों में जिले में डेंगू केस मिलने का तीसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। इससे ज्यादा केस 2017 में 538 और 2015 में सर्वाधिक 1140 केस मिल चुके हैं।
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आंकड़ों पर एक नजर
वर्ष डेंगू
2011 02
2012 22
2013 199
2014 17
2015 1140
2016 496
2017 538
2018 282
2019 168
2020 117
2021 523
पिछले छह दिनों से नहीं पहुंची किट
जिले में सिंगल डोनर प्लेटलेट्स के लिए मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। पिछले छह दिनों से हिसार में एसडीपी की किट उपलब्ध नहीं है। ब्लड बैंक मालिक लगातार संबंधित कंपनियों को डिमांड भेज रहे हैं, लेकिन दिवाली के बाद ही कंपनियों ने किट भेजने की बात कही थी। मगर शुक्रवार को भी ब्लड बैंकों पर एसडीपी किट नहीं पहुंची।
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कुछ ब्लड बैंको ने आरडीपी चढ़ानी की बंद
उधर, कुछ ब्लड बैंक ने आरडीपी यानि रैंडम डोनर प्लेटलेट्स चढ़ानी बंद कर दी है। आरडीपी के सरकारी रेट 400 रुपये निर्धारित है जबकि इसे निकालने में अलग-अलग कंपनियों के आरडीपी बैग इस्तेमाल किए जाते हैं, जिनकी कीमत भी 400 रुपये पड़ रही है। ऐसे में उन्हें आरडीपी करने से किसी तरह का लाभ नहीं मिल रहा, जिसके चलते आरडीपी बंद कर दी।
डेंगू के मुख्यत : चार टाइप होते हैं
पहली स्टेज : पहली स्टेज में हल्का बुखार व कमर दर्द होने के लक्षण सामने आते है।
दूसरी स्टेज : आंखों के अंदर दर्द होने, तेज बुखार होने, शरीर के जोड़ो में दर्द, कमर दर्द जैसे लक्षण मिलते है।
तीसरी स्टेज डेंगू हेमर्जिक फीवर : इस स्टेज में खून के चकते जैसे निशान बन जाते है। प्लेटलेट्स कम हो जाती हैं।
चौथी स्टेज डेंगू शोक सिंड्रोम : यह डेंगू की खतरनाक स्थिति होती है। बीपी और प्लेटलेट्स दोनों कम हो जाती है। इसमें शरीर में पानी की कमी होती जाती है, जिससे रिकवरी करना मुश्किल हो जाता है।
बकरी का कच्चा दूध न पिए
डेंगू मरीजों में उल्टी-दस्त के मरीज मिल रहे है। इनकी प्लेटलेट्स तो ठीक हो जाती है। मगर कई मरीजों में देखने में आया कि बकरी का कच्चा दूध पीने से उल्टी-दस्त के मरीज बढ़ रहे हैं। कच्चा दूध नहीं पीना चाहिए। डेंगू में उल्टी के लक्षण भी आते हैं। इसमें छठा और सातवां दिन घातक साबित हो सकता है। बुखार के बाद उल्टी आने पर चिकित्सक से उपचार करवाए। प्लेटलेट्स लगातार चेक करवाते रहे। - डॉ. अजय चुग, फिजिशियन, सिविल अस्पताल, हिसार
शुक्रवार को भी किट नहीं पहुंची। कंपनी कर्मचारियों को फोन करते हैं तो जवाब मिलाता है कि किट नहीं आई है। जब आएगी तो भेज देंगे। - डॉ. संदीप कालरा, सर्वोदय ब्लड बैंक, हिसार