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Hisar News: बेटियां देश का अभिमान, शिक्षा से मिल रही सपनों को नई उड़ान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 10 Oct 2023 11:07 PM IST
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Daughters are the pride of the country, dreams are getting new flight through education
हिसार। शिक्षा के क्षेत्र में लड़कियों का रुझान पिछले कई सालों के मुकाबले बढ़ा है। अभिभावकों के जागरूक होने से बेटियों पर अब घर के काम को बोझ कम हुआ है और पढ़ाई पर ध्यान दिया है। बेटियां देश का अभिमान हैं। अब शिक्षा से उनके सपनों को नई उड़ान मिल रही है। अब समय लड़कियों को उनके पैरों पर खड़ा करने और उन्हें अधिकारों के बारे में जागरूक करने का है। अब बेटियों किसी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। जिले में इस साल सितंबर माह तक 1000 लड़कों के पीछे 913 लड़कियों ने जन्म लिया। वहीं पिछले छह सालों में बालिका वधू बनने के मामले कम हुए हैं।
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कहा जाता था कि महिलाएं अगर पढ़ेंगी तो घर का चूल्हा-चौका कौन संभालेगा, लेकिन महिलाओं ने इस असंभव काम को कर दिखाया और आज बेटियां हर क्षेत्र में अपनी जीत का प्रचम लहरा रही हैं। सरकार ने भी लड़कियों को पढ़ाने के लिए महिला विश्वविद्यालय खोले हैं। महिलाओं के लिए बस में फ्री सफर किया गया, ताकि उनकी पढ़ाई में कोई बाधा न आए। लड़कियों के सेहतमंद जीवन से लेकर शिक्षा और कॅरिअर के लिए मार्ग बनाने के उद्देश्य से हर साल 11 अक्तूबर को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। इस दिन महिलाओं को उनके अधिकारों और महिला सशक्तिकरण के प्रति जागरूक किया जाता है।
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पढ़ाई में भी अव्वल हैं लड़कियां
राजकीय महाविद्यालय हिसार की प्राचार्य डॉ. दीपमाला लोहान ने बताया कि माता-पिता जागरूक हो गए हैं, वे अपनी बेटियों को पढ़ा-लिखाकर अफसर बनाने के सपने संजो रहे हैं। लड़कियां लड़कों से कहीं ज्यादा अपने काम के प्रति ईमानदार होती हैं। पढ़ाई में भी लड़कियां अव्वल रहती हैं।
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राजकीय महाविद्यालय में इस वर्ष छात्रों से ज्यादा छात्राएं



बीए : 311 लड़के, 420 लड़कियां



बीकॉम : 111 लड़के, 121 लड़कियां



बीएससी मेडिकल : 43 लड़के, 98 लड़कियां
नॉन मेडिकल : 101 लड़के, 102 लड़कियां

बाल विवाह पर लगा अंकुश : बबीता चौधरी



महिला एवं बाल विकास अधिकारी बबीता चौधरी ने बताया कि बाल विवाह के मामले अब बहुत कम हो गए हैं। इसके बारे में लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके लिए हमारी टीम ने बहुत मेहनत की है और बाल विचार करने वालों के ऊपर कड़ी कार्रवाई की गई, जिसमें 2 साल की सजा व 1 लाख तक का जुर्माना लगाया गया। हालांकि अब भी देश में हर साल लाखों लड़कियों को ऐसे पुरुषों से शादी करने के लिए मजबूर किया जाता है जो उनसे उम्र में कहीं अधिक बड़े होते हैं, जिससे उनके सीखने, बचपन जीने और कई मामलों में जीवित रहने का अवसर छिन जाता है। ऐसे में हम सब को इस अपराध के खिलाफ आवाज उठानी होगी और बेटियों को बालिका वधू बनने से बचाने में सहयोग देना होगा।



2010 से 2017 तक हिसार जिले में बाल विवाह के 50 से 60 मामले सामने आते थे।



2017 से 2023 तक जागरूक होने से 20 से 25 मामले आए।
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