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रेलूराम पूनिया हत्याकांड: बेटी और दामाद को मिली अंतरिम जमानत, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला
Thu, 11 Dec 2025 10:56 PM IST
शाहिल शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो हिसार/चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो हिसार/चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Thu, 11 Dec 2025 10:56 PM IST
सार
बहुचर्चित रेलू राम पूनिया हत्याकांड में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने वीरवार को दोनों दोषियों सोनिया और उसके पति संजीव कुमार को राहत देते हुए अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।
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रेलू राम पूनिया की बेटी सोनिया और दामाद संजीव कुमार
- फोटो : संवाद
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विस्तार
प्रदेश के बहुचर्चित रेलू राम पूनिया हत्याकांड में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने वीरवार को दोनों दोषियों सोनिया और उसके पति संजीव कुमार को राहत देते हुए अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि राज्य अपनी बनाई नीति का स्वयं उल्लंघन नहीं कर सकता और रियायत को पूरी पारदर्शिता व समानता के आधार पर देखना होगा।
समय पूर्व रिहाई की मांग के आदेश में गंभीर त्रुटियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने न केवल आदेश रद्द किया बल्कि राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह दो महीने के भीतर 2002 की नीति के प्रावधानों के तहत मामले पर नए सिरे से निर्णय करे। तब तक संजीव कुमार व सोनिया अंतरिम जमानत पर रिहा रहेंगे बशर्ते वह आवश्यक बॉन्ड भर दें।
समयपूर्व रिहाई की मांग ठुकराने के आदेश को चुनौती दी थी
सोनिया और संजीवन ने हरियाणा सरकार की ओर से उनकी समयपूर्व रिहाई की मांग ठुकराने के आदेश को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि वे नीति और कानून के तहत तय सभी शर्तें पूरी कर चुके हैं। अगस्त 2001 में लितानी गांव स्थित फार्म हाउस में हुए दिल दहला देने वाले हत्याकांड में पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया (50), उनकी पत्नी कृष्णा देवी (41), बच्चे प्रियंका (14), सुनील (23), बहू शकुंतला (20), पोता लोकेश (4) और दो पोतियों शिवानी (2) तथा 45 दिन की प्रीति की हत्या कर दी गई थी। मई 2004 में हिसार की अदालत ने सोनिया व संजीव को फांसी की सजा सुनाई थी। 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा था।
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समय पूर्व रिहाई की मांग के आदेश में गंभीर त्रुटियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने न केवल आदेश रद्द किया बल्कि राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह दो महीने के भीतर 2002 की नीति के प्रावधानों के तहत मामले पर नए सिरे से निर्णय करे। तब तक संजीव कुमार व सोनिया अंतरिम जमानत पर रिहा रहेंगे बशर्ते वह आवश्यक बॉन्ड भर दें।
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समयपूर्व रिहाई की मांग ठुकराने के आदेश को चुनौती दी थी
सोनिया और संजीवन ने हरियाणा सरकार की ओर से उनकी समयपूर्व रिहाई की मांग ठुकराने के आदेश को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि वे नीति और कानून के तहत तय सभी शर्तें पूरी कर चुके हैं। अगस्त 2001 में लितानी गांव स्थित फार्म हाउस में हुए दिल दहला देने वाले हत्याकांड में पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया (50), उनकी पत्नी कृष्णा देवी (41), बच्चे प्रियंका (14), सुनील (23), बहू शकुंतला (20), पोता लोकेश (4) और दो पोतियों शिवानी (2) तथा 45 दिन की प्रीति की हत्या कर दी गई थी। मई 2004 में हिसार की अदालत ने सोनिया व संजीव को फांसी की सजा सुनाई थी। 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा था।
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2014 में फांसी को उम्रकैद में बदला था
राज्यपाल और राष्ट्रपति ने भी दोनों दोषियों की दया याचिकाएं खारिज कर दी थीं। बाद में 2014 में दया याचिका में देरी को लेकर आए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था। हाईकोर्ट में दायर याचिका में दंपती ने राज्य स्तरीय समिति के 6 अगस्त 2024 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें कहा गया था कि दोनों आजीवन जेल में रहेंगे। उन्होंने दलील दी कि ऐसा निर्देश संवैधानिक अदालत के बिना संभव नहीं है और यह कानून के स्थापित सिद्धांतों के खिलाफ है। कोर्ट को बताया गया कि संजीव 20 साल से अधिक की वास्तविक कैद काट चुका है और सोनिया की अवधि 20 वर्ष से अधिक बनती है। दोनों ने 2002 की समयपूर्व रिहाई नीति के तहत अपनी पात्रता का दावा किया।
सुप्रीम कोर्ट में देंगे चुनौती
इस मामले में दूसरे पक्ष की ओर से रेलूराम के भाई राम सिंह के बेटे जितेंद्र पूनिया ने कहा कि हम हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। इस बारे में अधिवक्ता से कानूनी राय ले रहे हैं। संजीव- सोनिया की जमानत का भी विरोध करेंगे। इतनी दरिंदगी से हत्याएं करने वालों को जमानत देना खतरा हो सकता है। दोनों ने जेल में रहते हुए भी कई जेल अपराध किए हैं।
हत्या कराने की आशंका जताई
सोनिया और संजीव कुमार को जमानत देने का विरोध करते हुए जितेंद्र ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को चिट्ठी लिखी है। जितेंद्र ने पत्र में लिखा कि दोनों जेल से बाहर आए तो उनकी हत्या करा सकते हैं।
राज्यपाल और राष्ट्रपति ने भी दोनों दोषियों की दया याचिकाएं खारिज कर दी थीं। बाद में 2014 में दया याचिका में देरी को लेकर आए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था। हाईकोर्ट में दायर याचिका में दंपती ने राज्य स्तरीय समिति के 6 अगस्त 2024 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें कहा गया था कि दोनों आजीवन जेल में रहेंगे। उन्होंने दलील दी कि ऐसा निर्देश संवैधानिक अदालत के बिना संभव नहीं है और यह कानून के स्थापित सिद्धांतों के खिलाफ है। कोर्ट को बताया गया कि संजीव 20 साल से अधिक की वास्तविक कैद काट चुका है और सोनिया की अवधि 20 वर्ष से अधिक बनती है। दोनों ने 2002 की समयपूर्व रिहाई नीति के तहत अपनी पात्रता का दावा किया।
सुप्रीम कोर्ट में देंगे चुनौती
इस मामले में दूसरे पक्ष की ओर से रेलूराम के भाई राम सिंह के बेटे जितेंद्र पूनिया ने कहा कि हम हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। इस बारे में अधिवक्ता से कानूनी राय ले रहे हैं। संजीव- सोनिया की जमानत का भी विरोध करेंगे। इतनी दरिंदगी से हत्याएं करने वालों को जमानत देना खतरा हो सकता है। दोनों ने जेल में रहते हुए भी कई जेल अपराध किए हैं।
हत्या कराने की आशंका जताई
सोनिया और संजीव कुमार को जमानत देने का विरोध करते हुए जितेंद्र ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को चिट्ठी लिखी है। जितेंद्र ने पत्र में लिखा कि दोनों जेल से बाहर आए तो उनकी हत्या करा सकते हैं।