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सरकार से असहयोग: किसानों के समर्थन में आया हरियाणा का एक और गांव, नहीं मानेंगे नियम
Wed, 19 May 2021 02:08 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार (हरियाणा)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 19 May 2021 02:08 PM IST
सार
मंगलवार को ही गांव मसूदपुर के लोगों ने सरकार के विरोध में कोरोना नियमों को मानने से इनकार कर दिया था। पंचायत कर ग्रामीणों ने एलान किया था कि वे लॉकडाउन का पालन नहीं करेंगे और पुलिस को गांव में नहीं घुसने देंगे।
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हिसार के गांव डाटा में पंचायत करते ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा के हिसार के एक और गांव ने सरकार के फैसले मानने से इनकार कर दिया है। डाटा गांव ने किसानों के समर्थन में सरकार के खिलाफ असहयोग आंदोलन का एलान किया है। गांव में हुई पंचायत में फैसला लिया गया है कि ग्रामीण लॉकडाउन को नहीं मानेंगे। गांव में रोजाना दुकानें खुलेंगी।
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बुधवार को गांव डाटा में सरपंच विनोद की अध्यक्षता में पंचायत हुई। इसमें ग्रामीणों ने किसानों पर हुए लाठीचार्ज की निंदा करते हुए सरकार की भर्त्सना की। ग्रामीणों ने एलान किया कि कोविड 19 को लेकर सरकार का सहयोग नहीं करेंगे। गांव के लोग लॉकडाउन के नियमों का पालन नहीं करेंगे। गांव में स्वास्थ्य व पुलिस की टीम को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। युवाओं की टोली गांव के बस अड्डे पर तैनात रहेगी।गांव में सामान्य दिनों की तरह दुकानें खुलेंगी। अन्य गतिविधियों को भी जारी रखेंगे।
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इससे पहले मंगलवार को मसूदपुर गांव की पंचायत ने भी कोरोना नियमों को मानने से इनकार कर दिया था। गांव में पंचायत कर सर्वसम्मति से गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बनाए गए कोरोना केयर सेंटर को हटाने का फैसला लिया गया। इसके अलावा पुलिस प्रशासन और कोरोना जांच से संबंधित किसी भी टीम के गांव में आने पर पूर्णतय पाबंदी लगा दी गई थी।
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पंचायत में फैसला लिया गया था कि गांव का कोई भी व्यक्ति कोरोना टेस्ट नहीं करवाएगा। सरकार द्वारा लगाए गए लॉकडाउन को पंचायत ने हटा दिया है। अब गांव की सभी दुकानें पहले की तरह खुली रहेंगी। गांव में की जाने वाली शादी समारोह में किसी प्रकार की कोई पाबंदी नहीं होगी खासकर लोगों की संख्या को लेकर। पंचायत द्वारा एक कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी के 20 सदस्य हर वक्त गांव के बस स्टैंड पर मौजूद रहेंगे और पुलिस प्रशासन को गांव में आने से रोकेंगे। गांव में फल और सब्जियों के रेट में कटौती की गई है। अब पंचायत द्वारा तय की गई कीमत पर फल और सब्जियां बेचने होंगे।