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मुआवजा राशि से लोगों के आंसू पोंछ रहा पीड़ित

Sun, 22 Dec 2013 07:10 PM IST
डबवाली (सिरसा)/ब्यूरो
डबवाली (सिरसा)/ब्यूरो Updated Sun, 22 Dec 2013 07:10 PM IST
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dabwali fire
दिसंबर की 23 तारीख आते ही शहर का माहौल उदासी से भर जाता है। शहर में कोई ऐसी गली नहीं होती, जिसमें 23 दिसंबर 1995 को हुए अग्निकांड का जिक्र न हो।
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इतनी बड़ी त्रासदी के बावजूद पीड़ितों का हौसला काबिले तारीफ है। मुआवजे ने मरहम का काम करते हुए अग्निकांड पीड़ितों को दोबारा जिंदगी दी। वहीं पीड़ितों में एक शख्स ऐसा भी है जो मुआवजे से लोगों के आंसू पोंछने का काम कर रहा है।


डबवाली जन सहारा सेवा संस्था के अध्यक्ष आरके नीना ने अग्निकांड में पत्नी आशा देवी, डीएवी स्कूल की यूकेजी कक्षा में पढ़ रही बेटी स्माइल और मां की गोद में बैठकर कार्यक्रम देख रही डेढ़ वर्षीय बेटी कीटू को खो दिया था। उस समय नीना डबवाली में ही रहते थे लेकिन अग्निकांड ने उनके परिवार को बिखेर दिया।
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इसके बाद वे बठिंडा की संगत मंडी में चले गए। आज भी वहीं रहते हैं लेकिन उनका कारोबार डबवाली में है। जिंदगी में आई सुनामी से लोहा लेने के बाद उन्होंने एक बार फिर घर बसाया। खुद की जिंदगी में तबाही के बावजूद उन्होंने दूसरों की आंखों से आंसू पोंछने शुरू किए। जीटी रोड के दुकानदारों के सहयोग से चार लाख रुपये एकत्रित किए। उनमें मुआवजा राशि के दो लाख रुपये डालकर नौ नवंबर 2009 को डबवाली जन सहारा सेवा संस्था के नाम पर एंबुलेंस सेवा शुरू की।
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इस एंबुलेंस सेवा के जरिए अब तक दुर्घटनाओं में घायल होने वाले लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर करीब चार हजार जिंदगियां बचाई जा चुकी हैं। इसके अतिरिक्त शहर में विभिन्न स्थानों पर सात वाटर कूलर भी लगवा चुकी है। संस्था ने विभिन्न स्थानों से करीब 400 शवों को उठाया है। वहीं 20 लावारिस शवों का अपने खर्चे पर अंतिम संस्कार भी किया है।


इसके अतिरिक्त सर्दी में जरूरतमंदों को गर्म कंबल भी वितरित कर रही है। उपरोक्त समाजसेवा मुआवजा राशि से चल रही है। आरके नीना के अनुसार परिवार के तीन जनों के चले जाने के बाद जिंदगी में कुछ शेष नहीं रह गया था। अदालत से मुआवजा राशि मिली तो समाजसेवा करने का बीड़ा उठाया।  दुकानदारों की प्रेरणा से संस्था बनी। कदम-कदम पर सहयोग मिला। मुआवजा राशि को एंबुलेंस सेवा के अतिरिक्त अन्य सामाजिक कार्यों पर खर्च किया जा रहा है।
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