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फसल विविधीकरण, अनुबंध व जैविक खेती से किसानों की आमदनी हो सकती है दोगुना : प्रो. कांबोज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 27 Apr 2022 11:48 PM IST
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Crop diversification, contract and organic farming can double the income of farmers: Prof. Kamboj
कृषि अधिकारी कार्यशाला का दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ करते हुए कुलपति प्रो. बी.आर. काम्बोज - फोटो : Hisar
हिसार। कृषि के लिए जल के अंधाधुंध दोहन से भूजल स्तर निरंतर घट रहा है। भूमि की उर्वरा शक्ति क्षीण हो रही है। इसलिए किसानों को ऐसी कृषि प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराने की आवश्यकता है जिससे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ किसानों को अधिक आर्थिक लाभ हो सके। फसल विविधीकरण, समन्वित खेती, अनुबंध खेती, प्राकृतिक खेती या जैविक खेती से किसानों की आमदनी दोगुनी हो सकती है। उक्त विचार बुधवार को चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने व्यक्त किए।
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वह विश्वविद्यालय में आयोजित कृषि अधिकारियों की दो दिवसीय कार्यशाला (खरीफ) को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा देश में हरित क्रांति के परिणाम स्वरूप खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि हुई है। खाद्यान्न उत्पादन 1966-67 में मात्र 2.59 मीट्रिक टन था, जो अब 36.77 मीट्रिक टन का आंकड़ा छू चुका है। सघन खेती से भूमि की उत्पादन शक्ति नष्ट होने के कारण ज्यादातर फसलों की पैदावार में या तो स्थिरता आ चुकी है या गिरावट होने लगी है जो निरंतर बढ़ रही जनसंख्या को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने के लिए चुनौती पैदा कर रही है।
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कुलपति ने वर्तमान समय में बदलते मौसम पर भी चिंता व्यक्त की और कहा इससे कृषि उत्पादन बहुत प्रभावित हो रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से विशेष रणनीति तैयार करने का आह्वान किया। बिजाई करने के साथ फसलों में मिट्टी जांच के आधार पर जैविक खादों के साथ उर्वरकों का संतुलित प्रयोग करने और उचित फसल अवशेष प्रबंधन के लिए प्रेरित करें। कृषि विभाग के अतिरिक्त कृषि निदेशक डॉ. रोहताश सिंह ने बताया कि धान की पराली का प्रबंधन करने वाले किसानों को एक हजार रुपये प्रति एकड़ सहायता राशि के रूप में प्रदान किए जा रहे हैं।
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नई सिफारिशों के लिए हुआ मंथन
विश्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. बलवान सिंह मंडल ने विस्तार गतिविधियों के बारे में अवगत कराया। साथ ही विभिन्न फसलों के लिए कुछ नई सिफारिशों को लागू करवाने को लेकर मंथन भी किया गया। अनुसंधान निदेशक डॉ. जीत राम शर्मा ने नई किस्मों की जानकारी देते हुए मौजूदा समय में चल रहे अनुसंधान कार्यों के बारे में बताया। कार्यशाला में प्रदेश के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सभी जिलों के कृषि उपनिदेशक, कृषि विज्ञान केंद्रों के समन्वयक व विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों के अधिष्ठाता, निदेशक एवं विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे।
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