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दोस्त को फोन कर बोला, यह मेरी आखिरी कॉल और ट्रेन के आगे कूद दे दी जान
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
Updated Fri, 24 Jun 2016 12:01 AM IST
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ट्रेन के आगे कूदकर दे दी जान
- फोटो : bureau
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हिसार-राजगढ रेलवे ट्रैक पर सेक्टर 16-17 के निकट वीरवार सुबह ट्रेन से कटकर सिवानी के पास के गांव धूलकोट के 24 वर्षीय नरेश काजला ने सुसाइड कर ली। वह नलोई गांव के एक निजी स्कूल में टीचर था और इन दिनों छुट्टियों के चलते यहां अंबेडकर हॉस्टल में रहकर कोचिंग ले रहा था।
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पुलिस का कहना है कि उसने सुसाइड नोट भी छोड़ा है। मृतक के बचपन के दोस्त सुमंत ने बताया कि मौत से आधे घंटे पहले उसने फोन कर मुझसे कहा था, यह मेरी आखिरी कॉल है।
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धूलकोट का अविवाहित नरेश काजला गांव नलोई के मुखराम मेमोरियल स्कूल में इंगलिश और मैथ का टीचर था। वह गर्मी की छुट्टियों के चलते इन दिनों सेक्टर 16-17 में अंबेडकर हॉस्टल में रह रहा था। वह फिलहाल ऋषिनगर के एक सेंटर से कंपीटीशन एग्जाम की कोचिंग ले रहा था।
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इसके अलावा वह आर्मी की भर्ती की तैयारी भी कर रहा था। वह सुबह हॉस्टल के रूम से करीब साढे़ सात बजे रेस लगाने की बात कहकर निकला था। बाद में रूममेट संदीप को पता चला कि हॉस्टल से थोड़ी दूरी पर उसकी ट्रेन से कटने से मौत हो गई।
जीआरपी के एसआई सुरेंद्र सिंह की टीम ने सूचना मिलने पर शव कब्जे में ले लिया। बाद में शव का पोस्टमार्टम यहां सरकारी अस्पताल में किया गया। पुलिस ने इस संबंध में इत्तफाकिया कार्रवाई की है।
जीआरपी के एसआई सुरेंद्र सिंह ने बताया कि नरेश ने आत्महत्या की है। उसने मरने से पहले एक सुसाइड नोट लिखा था, जो हमारे कब्जे में है। उसने सुसाइड नोट में लिखा कि मैं अपनी मर्जी से सुसाइड कर रहा हूं, इसके लिए मैं खुद जिम्मेवार हूं। इसमें किसी और का दोष नहीं। मेरे मां-बाप और दोस्तों ने मुझे खूब प्यार दिया। मां-बाप ने खर्चा मांगते ही दिया।
भाई ने जताया साजिश का अंदेशा
नरेश के दो भाई और एक बहन हैं। उसका बड़ा भाई वीएलडीए है और दूसरा भाई मंजीत बीएसएफ में है। नरेश तीनों भाइयों में छोटा था। उसके भाई मंजीत ने किसी साजिश की आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि नरेश सुसाइड नहीं कर सकता।
सुसाइड नोट में उसकी लिखाई नहीं है। हमारे ताऊ कर्मबीर को गांव के ही एक आदमी और उसके दो बेटों ने जान से मारने की धमकी दी थी। मंगलवार को हमने पुलिस से शिकायत दी थी और बुधवार को डीएसपी से मिले थे।
वीरवार को सुबह इस संबंध पंचायत की तैयारी चल रही थी कि नरेश की मौत की सूचना मिली। उसने बताया कि हमने रेलवे थाना में आकर पुलिस वालों से कहा था कि नरेश के मोबाइल फोन में किस-किस के फोन आए हुए हैं, हमें यह दिखला दो। मगर पुलिस वाले नहीं माने और इस मुद्दे पर हमारी उनसे कहासुनी हुई।
धूलकोट के सुमंत ने बताया कि नरेश मेरा बचपन का दोस्त था। हम दोनों साथ पढ़े हैं। वह बहुत हंसमुख था। उसने सुबह करीब सवा सात बजे मेरे पास फोन कर मुझसे पूछा तू कहा है, मैंने जवाब दिया, घर पर।
फिर उसने कहा कि म्हारे घरां भी जा आया कर, अर संभाल कर लिया केर। या मेरी आखिरी काल है। इसके बाद ना व्हाट्सएप पर मैसेज भेजूं ,अर न फोन करूं। या मेरी आखिरी काल है। इसके बाद उसने फोन काट दिया।
सुमंत ने बताया कि उसके कुछ देर बाद नरेश का दोबारा फोन आया, वह बोला भाई ये बात घर मत बताना। फिर तसल्ली देने पर उसने फोन काट दिया। मृतक के दोस्त ने बताया कि हमने इस बात को हल्के में लिया। क्योंकि उसके मिलनसार स्वभाव को देखते हुए यह सोचा भी नहीं जा सकता कि वह सुसाइड कर सकता है। बाद में उसकी मौत की खबर मिली तो बहुत पछतावा हुआ।
होनहार था नरेश
सुमंत ने बताया कि नरेश ने एचटेट और सी टेट क्लीयर कर रखा था। बारहवीं में उसके 78 प्रतिशत नंबर आए थे। कुछ देर पढ़ने के बाद ही उसे याद हो जाता था और वह उस चैप्टर को भूलता नहीं था।
वह बेहद मिलनसार था। इसी कारण उसके जिस परिचित को उसकी मौत की सूचना मिली, यहां दौड़ा चला आया। वह रविवार को गांव गया था, तब मुझसे मिला था। मुझे क्या पता था वह आखिरी मुलाकात होगी।