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फाइनेंसर सुसाइड मामला : आरोपियों की गिरफ्तारी होने तक शव उठाने से इनकार
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
Updated Mon, 04 Apr 2016 12:47 AM IST
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फाइनेंसर सुसाइड
- फोटो : bureau
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अलीपुर गांव के फाइनेंसर 33 वर्षीय सुखबीर सैनी के शव का पोस्टमार्टम सिविल अस्पताल में किया गया। पुलिस की सांसें तब फूल गई, जब परिजनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी होने तक शव उठाने से इनकार कर दिया। बाद में पुलिस के आश्वासन पर परिजन माने और आधे घंटे बाद शव उठाने पर सहमत हुए।
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चारों आरोपी एक जाति विशेष से ताल्लुक रखते हैं और एक सिपाही है। मृतक चार पेज का एक सुसाइड नोट छोड़ गया। सुसाइड नोट में पार्टनर सिपाही को एक विधायक का खास भी बताया गया है।
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जानकारी के अनुसार सुखबीर सैनी सातरोड़ कलां के सोमबीर के साथ साझेदारी में फाइनेंस का काम करता था। सोमबीर दिल्ली पुलिस का सिपाही है। उनका कैंट के सामने के क्षेत्र में ऑफिस है। आरोप है कि सोमबीर ने सुखबीर के 35 लाख रुपये हड़प लिए, जिनसे रुपये लेने थे, उनसे सोमबीर रिकवरी करने गया और जिनको देने थे, उनको उसने फूटी कौड़ी भी न दी।
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लेनदार छह महीने से सुखबीर पर रुपये देने का दबाव बना रहे थे। हालात ऐसे हो गए थे कि सुखबीर छुपकर रहने लगा था। आखिर उसने हालात से तंग आकर शनिवार शाम घर में पंखे पर फंदा लगाकर सुसाइड कर लिया। सूचना मिलने पर कैंट चौकी की एक टीम मौके पर पहुंची और शव कब्जे में ले लिया।
सिविल अस्पताल में दोपहर को शव का पोस्टमार्टम हुआ। जांच अधिकारी एसआई महेंद्र सिंह ने बताया कि इस संबंध में मृतक के भाई जयबीर की शिकायत पर सातरोड कलां के सोमबीर, गुराना के कृष्ण, मनीष और उदय के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने और जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज किया है।
गिरफ्तारी पर अड़ गए परिजन
पुलिस ने जब परिजनों से कहा कि पोस्टमार्टम हो गया है, शव ले जाओ। तो उन्होंने शव उठाने से इनकार कर दिया। इससे पुलिसकर्मियों की सांसें फूल गईं और आला अधिकारियों को इसकी फोन पर सूचना दी। परिजनों का कहना था कि आरोपियों की गिरफ्तारी होने तक वे शव नहीं उठाएंगे।
बाद में कैंट चौकी प्रभारी ईश्वर सिंह मौके पर पहुंचे और मृतक के परिजनों से बात कर आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया, तब जाकर वे माने। सदर थाना प्रभारी ललित कुमार भी सिविल अस्पताल में पहुंचे थे। इसलिए शव मोर्चरी से आधे घंटे लेट उठाया गया। बाद में गांव ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया।