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सीएसआई और एसआई की लापरवाही से नहीं हुआ वाहनों का रजिस्ट्रेशन, जुर्माना
amar ujala/ Hisar
Updated Thu, 16 Mar 2017 12:32 AM IST
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नगर निगम
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शहर में डोर टू डोर कचरा उठाने के लिए खरीदे गए वाहनों के पांच महीने तक रजिस्ट्रेशन न होने के मामले में सीएसआई और एसआई की लापरवाही सामने आई है। चारों गाड़ियों की रजिस्ट्रेशन में हुई देरी से हर रोज लगने वाले जुर्माने को निगम के उच्च अधिकारियों ने सजा के तौर पर जिम्मेवार अधिकारी-कर्मचारियों से भरवाने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य शाखा ब्रांच के अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जुर्माना वे अपने वेतन से भर चुके हैं, लेकिन चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर (सीएसआई) ने पूरा मामला डीसी एवं कमिश्नर नगर निगम पर डाल दिया है। उनका कहना है कि डीसी ने अपनी पावर से वाहन रजिस्ट्रेशन में लगे जुर्माने को माफ करवा दिया है।
हजारों में जुर्माना, अधिकारी मामला दबाने के प्रयास में
ब्रांच इंचार्ज समेत जिम्मेवार कर्मचारियों पर हजारों रुपये का जुर्माना लगा है। हालांकि जुर्माना अभी तक तो ब्रांच में लगे जिम्मेवार कर्मचारी-अधिकारियों के भरने की बात सामने आ रही है। संभावना ये भी है कि जुर्माना निगम के खाते से भरा गया हो। क्योंकि इस मामले के बाद कोई भी अधिकारी बोलने को तैयार नहीं। पूरा मामला दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
डीसी साहब ने कर दिया फोन, नहीं लगा जुर्माना : सीएसआई
इस मामले को लेकर जब सीएसआई सुधीर कुमार से बात की तो उन्होंने कहा कि डीसी साहब ने रजिस्ट्रेशन करवाते समय लेट रजिस्ट्रेशन फीस में छूट करवा दी। उन्होंने कहा कि डीसी ने फोन कर दिया तो जुर्माना नहीं लगा।
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हमें भरना पड़ा जुर्माना : एसआई
उधर, एसआई राजेश घणघस का कहना है कि जुुर्माना लगा है, जोकि हमने भर दिया है। अधिकारियों ने इस मामले में हमारी लापरवाही बताई है, जिसके दंड के तौर पर हमने अपनी जेब से जुर्माना भर दिया और रजिस्ट्रेशन करवा लिया है।
गाड़ियां ही नहीं कई हाथ रेहड़ियां भी खड़ी
नगर निगम के स्वास्थ्य शाखा ब्रांच ने निगम के लाखों रुपये बिना जरूरत के ही खराब करवा दिए हैं। जब वाहनों को चलाने वाले ही नहीं हैं तो वाहन क्यों खरीदवाए गए। निगम में गाड़ियां ही नहीं कई हाथ रेहड़ियां भी खड़ी हैं, जो आज तक नहीं चल पाई हैं।
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हजारों में जुर्माना, अधिकारी मामला दबाने के प्रयास में
ब्रांच इंचार्ज समेत जिम्मेवार कर्मचारियों पर हजारों रुपये का जुर्माना लगा है। हालांकि जुर्माना अभी तक तो ब्रांच में लगे जिम्मेवार कर्मचारी-अधिकारियों के भरने की बात सामने आ रही है। संभावना ये भी है कि जुर्माना निगम के खाते से भरा गया हो। क्योंकि इस मामले के बाद कोई भी अधिकारी बोलने को तैयार नहीं। पूरा मामला दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
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डीसी साहब ने कर दिया फोन, नहीं लगा जुर्माना : सीएसआई
इस मामले को लेकर जब सीएसआई सुधीर कुमार से बात की तो उन्होंने कहा कि डीसी साहब ने रजिस्ट्रेशन करवाते समय लेट रजिस्ट्रेशन फीस में छूट करवा दी। उन्होंने कहा कि डीसी ने फोन कर दिया तो जुर्माना नहीं लगा।
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हमें भरना पड़ा जुर्माना : एसआई
उधर, एसआई राजेश घणघस का कहना है कि जुुर्माना लगा है, जोकि हमने भर दिया है। अधिकारियों ने इस मामले में हमारी लापरवाही बताई है, जिसके दंड के तौर पर हमने अपनी जेब से जुर्माना भर दिया और रजिस्ट्रेशन करवा लिया है।
गाड़ियां ही नहीं कई हाथ रेहड़ियां भी खड़ी
नगर निगम के स्वास्थ्य शाखा ब्रांच ने निगम के लाखों रुपये बिना जरूरत के ही खराब करवा दिए हैं। जब वाहनों को चलाने वाले ही नहीं हैं तो वाहन क्यों खरीदवाए गए। निगम में गाड़ियां ही नहीं कई हाथ रेहड़ियां भी खड़ी हैं, जो आज तक नहीं चल पाई हैं।