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पीएम के डिजिटल इंडिया अभियान के फर्जी नियुक्ति पत्र देकर युवाओं से ठगी
Updated Sat, 17 Mar 2018 01:20 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फोटो का उपयोग कर डिजिटल इंडिया के नाम पर युवाओं से ठगी की जा रही है। गांव के लोगों को चपरासी के पद की नियुक्ति के लेटर भेजकर हर प्रति युवा से 15200 रुपये जमा करा रहे हैं। हिसार में पातन, आर्यनगर सहित कई गांवों में इस तरह के लेटर आए हैं।
प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया मिशन के नाम का दुरुपयोग कर बेरोजगार युवाओं के साथ ठगी की जा रही है। गांव में युवाओं को बिना आवेदन किए ही सीधे नियुक्ति पत्र मिल रहे हैं। गांव पातन निवासी धर्मबीर ऐसा लेटर लेकर अमर उजाला संवाददाता से मिले। जो नियुक्ति पत्र दिया गया है उसमें पहले पन्ने पर पीएम नरेंद्र मोदी का फोटो है। डिजिटल इंडिया का लोगो है। डिजिटल इंडिया सप्ताह का शुभारंभ एक जुलाई 2015 लिखा हुआ है। इसमें सबसे नीचे एक मोबाइन लंबर बॉक्स में लिखा गया है। दूसरे पेज पर एक संदेश लिखा गया है। इसी में नीचे लेखपाल, निरीक्षक टीम, वाहन चालक, डाटा मैनेजर, स्वीपर कम चपरासी, बैंक ऑफिस, क्लर्क, गार्ड के 72 पद दिखाए गए हैं जिसमें सबसे नीचे लिखा गया है कि ट्रेनिंग के बाद आवेदक को उसी के राज्य में नियुक्त किया जाएगा। इसके बाद भर्ती की कुछ शर्त लिखी हैं। केंद्रीय सरकार की ओर से दी जाने वाली सुविधाओं का उल्लेख किया गया है जिसमें उम्मीदवार को एक महीने की ट्रेनिंग के नाम पर 15200 रुपये जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें यह भी लिखा है कि आवेदक ट्रेनिंग की जानकारी सार्वजनिक करेगा तो उसकी रकम जब्त कर ली जाएगी। कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
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नियुक्ति पत्र पर डिजिटल इंडिया का लोगो, भारत सरकार का लोगो उपयोग किया गया है जिसमें धोखा देने के लिए पत्रांक संख्या भी दी गई है। नियुक्ति पत्र में लिखा है कि आपको 22500-32500 रुपये प्रति माह वेतन दिया जाएगा। यह पत्र मंत्रालय द्वारा उन लोगों को भेजे जा रहे हैं जिनके आवेदन कुछ कारणों से पहले रिजेक्ट होते रहे हैं। लेटर में सबसे महानिदेशक लिखकर मनोज सिन्हा लिखा गया है। सबसे नीचे भारत सरकार की मोहर को उपयोग किया है।
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एक्सपर्ट की नजर में लेटर फर्जी
इस बारे में एनएसआई के डिप्टी डायरेक्टर एमपी कुलश्रेष्ठ से लेटर दिखाकर इसकी सत्यता पूछी तो उन्होंने इसे फर्जी बताया। बिना आवेदन किसी को नौकरी नहीं मिलती। मनोज सिन्हा महानिदेशक लिखकर हस्ताक्षर किए गए हैं। मनोज सिन्हा केंद्रीय मंत्री हैं वह किसी चतुर्थ श्रेणी के किसी नियुक्ति पत्र पर हस्ताक्षर नहीं करते। लेटर में सबसे उपर ई-मेल एड्रेस दिया गया है, वह जीमेल अकाउंट है। भारत सरकार मंत्रालय जीमेल अकाउंट का उपयोग नहीं करती। नियुक्ति के बाद कहां ज्वाइन करना है कोई जानकारी नहीं। नियुक्ति पत्र में दर्जनों हिंदी वर्तनी की गलती हैं। 22500-32250 का कोई स्केल नहीं। सरकारी नियुक्ति पत्र में ऐसी भाषा उपयोग नहीं होती। किसी भी नियुक्ति पत्र से सरकार कभी कोई शुल्क नहीं लेती।
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वर्जन.....
मुझे इस लेटर पर कुछ शक हुआ था। मैंने मोबाइल नंबर पर फोन किया तो उन्होंने कहा कि 15200 रुपये दिए गए अकाउंट में जमा करा दो। ऐसा नहीं करोगे तो नियुुक्ति रद्द हो जाएगी। मैंने कई जगह इस बारे में जानकारी ली। आर्य नगर में कई लोगों के पास इस तरह के लेटर आए हैं।
-धर्मबीर सिंह, गांव पातन, नियुक्ति पत्र पाने वाले।
एचएयू के नाम पर भी फर्जी लेटर भेजा गया था
कुछ दिन पहले एचएयू में लैब फर्जी नियुक्ति का लेटर भेजा गया था जिसमें सेंट्रल पब्लिक वर्कस डिपार्टमेंट की ओर से नियुक्ति दी गई थी। आवदेक नियुक्ति पत्र लेकर एचएयू पहुंचा तब पता लगा कि नियुक्ति पत्र फर्जी है। जिसके बाद एचएयू ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी।
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हिसार।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फोटो का उपयोग कर डिजिटल इंडिया के नाम पर युवाओं से ठगी की जा रही है। गांव के लोगों को चपरासी के पद की नियुक्ति के लेटर भेजकर हर प्रति युवा से 15200 रुपये जमा करा रहे हैं। हिसार में पातन, आर्यनगर सहित कई गांवों में इस तरह के लेटर आए हैं।
प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया मिशन के नाम का दुरुपयोग कर बेरोजगार युवाओं के साथ ठगी की जा रही है। गांव में युवाओं को बिना आवेदन किए ही सीधे नियुक्ति पत्र मिल रहे हैं। गांव पातन निवासी धर्मबीर ऐसा लेटर लेकर अमर उजाला संवाददाता से मिले। जो नियुक्ति पत्र दिया गया है उसमें पहले पन्ने पर पीएम नरेंद्र मोदी का फोटो है। डिजिटल इंडिया का लोगो है। डिजिटल इंडिया सप्ताह का शुभारंभ एक जुलाई 2015 लिखा हुआ है। इसमें सबसे नीचे एक मोबाइन लंबर बॉक्स में लिखा गया है। दूसरे पेज पर एक संदेश लिखा गया है। इसी में नीचे लेखपाल, निरीक्षक टीम, वाहन चालक, डाटा मैनेजर, स्वीपर कम चपरासी, बैंक ऑफिस, क्लर्क, गार्ड के 72 पद दिखाए गए हैं जिसमें सबसे नीचे लिखा गया है कि ट्रेनिंग के बाद आवेदक को उसी के राज्य में नियुक्त किया जाएगा। इसके बाद भर्ती की कुछ शर्त लिखी हैं। केंद्रीय सरकार की ओर से दी जाने वाली सुविधाओं का उल्लेख किया गया है जिसमें उम्मीदवार को एक महीने की ट्रेनिंग के नाम पर 15200 रुपये जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें यह भी लिखा है कि आवेदक ट्रेनिंग की जानकारी सार्वजनिक करेगा तो उसकी रकम जब्त कर ली जाएगी। कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
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नियुक्ति पत्र पर डिजिटल इंडिया का लोगो, भारत सरकार का लोगो उपयोग किया गया है जिसमें धोखा देने के लिए पत्रांक संख्या भी दी गई है। नियुक्ति पत्र में लिखा है कि आपको 22500-32500 रुपये प्रति माह वेतन दिया जाएगा। यह पत्र मंत्रालय द्वारा उन लोगों को भेजे जा रहे हैं जिनके आवेदन कुछ कारणों से पहले रिजेक्ट होते रहे हैं। लेटर में सबसे महानिदेशक लिखकर मनोज सिन्हा लिखा गया है। सबसे नीचे भारत सरकार की मोहर को उपयोग किया है।
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एक्सपर्ट की नजर में लेटर फर्जी
इस बारे में एनएसआई के डिप्टी डायरेक्टर एमपी कुलश्रेष्ठ से लेटर दिखाकर इसकी सत्यता पूछी तो उन्होंने इसे फर्जी बताया। बिना आवेदन किसी को नौकरी नहीं मिलती। मनोज सिन्हा महानिदेशक लिखकर हस्ताक्षर किए गए हैं। मनोज सिन्हा केंद्रीय मंत्री हैं वह किसी चतुर्थ श्रेणी के किसी नियुक्ति पत्र पर हस्ताक्षर नहीं करते। लेटर में सबसे उपर ई-मेल एड्रेस दिया गया है, वह जीमेल अकाउंट है। भारत सरकार मंत्रालय जीमेल अकाउंट का उपयोग नहीं करती। नियुक्ति के बाद कहां ज्वाइन करना है कोई जानकारी नहीं। नियुक्ति पत्र में दर्जनों हिंदी वर्तनी की गलती हैं। 22500-32250 का कोई स्केल नहीं। सरकारी नियुक्ति पत्र में ऐसी भाषा उपयोग नहीं होती। किसी भी नियुक्ति पत्र से सरकार कभी कोई शुल्क नहीं लेती।
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वर्जन.....
मुझे इस लेटर पर कुछ शक हुआ था। मैंने मोबाइल नंबर पर फोन किया तो उन्होंने कहा कि 15200 रुपये दिए गए अकाउंट में जमा करा दो। ऐसा नहीं करोगे तो नियुुक्ति रद्द हो जाएगी। मैंने कई जगह इस बारे में जानकारी ली। आर्य नगर में कई लोगों के पास इस तरह के लेटर आए हैं।
-धर्मबीर सिंह, गांव पातन, नियुक्ति पत्र पाने वाले।
एचएयू के नाम पर भी फर्जी लेटर भेजा गया था
कुछ दिन पहले एचएयू में लैब फर्जी नियुक्ति का लेटर भेजा गया था जिसमें सेंट्रल पब्लिक वर्कस डिपार्टमेंट की ओर से नियुक्ति दी गई थी। आवदेक नियुक्ति पत्र लेकर एचएयू पहुंचा तब पता लगा कि नियुक्ति पत्र फर्जी है। जिसके बाद एचएयू ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी।