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कोरोना ने दिया बेअंत दर्द, माता-पिता की याद आने पर सिसक उठते हैं मासूम...

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 29 Oct 2021 12:39 AM IST
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Corona gave unbearable pain, innocent people sobbed when they remembered their parents.
चरखी दादरी। कोरोना ने लाखों परिवारों को जीवनभर का दर्द दिया है। जिले में 10 परिवार ऐसे हैं जहां परिवार के मुखिया की मौत होने से घर को ताला जड़ने तक की नौबत आ गई। मृतकों के बच्चों को संभालने वाला भी परिवार में कोई नहीं बचा। इन बच्चों के लालन-पालन की जिम्मेदारी अब रिश्तेदारों ने उठाई हैं। उनके अनुसार एक साल बाद भी बच्चे माता-पिता को खोने के गम से नहीं उभरे हैं। कभी स्कूल में तो कभी घर पर उनकी आंखें भर आती हैं। एक बच्चे की बुआ ने बताया कि कई बार तो उसकी भतीजी सोते समय भी सिसक उठती है। इन बच्चों का लालन-पालन करने वाले रिश्तेदारों ने बताया कि वो अपने बच्चों से भी बढ़कर उन्हें प्यार देंगे।
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कोरोना महामारी के चलते जिले में 139 लोगों की मौत हुई है। इनमें से दस ऐसे थे जिनकी मौत के बाद बच्चों की संभाल करने वाला घर पर कोई नहीं बचा। कुछ के घर को ताला लग गया और उनके बच्चों को रिश्तेदार अपनी पास ले गए। जिले के चार गांवों के दस बच्चे ऐसे हैं जो कोरोना में अनाथ हो गए। छह ने पिता को तो चार ने माता को खो दिया। पांच बच्चियों ने तो पांच लड़कों ने अपने माता-पिता खोए। इनमें से पांच बच्चों को उनकी बुआ, एक को बड़ी बहन और चार को दादी संभाल रही हैं। इन्हें हर माह 2500 रुपये की आर्थिक मदद दी जा रही है। जबकि चार को माता या पिता की मौत का कारण कोरोना स्पष्ट हो चुका है, उन्हें 12 हजार की सालाना आर्थिक मदद दी जा रही है। संवाददाता ने वीरवार को इन बच्चों का लालन-पालन करने वाले उनके रिश्तेदारों से बातचीत कर उनका हाल जाना। पेश है एक रिपोर्ट....
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जानिए....कैसे मिला परिवारों को जीवनभर का दर्द
केस-1- तीन साल का बच्चा अब तक पिता की मौत से अनभिज्ञ, बड़े-भाई बहन करते हैं याद
कोरोना में चार बच्चों ने अपनी मां के बाद पिता को भी खो दिया। बच्चों की उम्र करीब तीन, सात, नौ और 11 साल है। सबसे छोटा बच्चा जोकि तीन साल का है, अपने पिता की मौत से अनभिज्ञ है। जबकि उसकी तीन बहनें अपने पिता को याद कर सिसक उठती हैं। उनकी बुआ अपने बच्चों के साथ उनकी जिम्मेदारी संभाल रही है। इन बच्चों के अपने घर को ताला लग चुका है और वो बुआ के घर रह रहे हैं।
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केस-2- दो बच्चियों के सिर से उठा मां का साया, बुआ निभा रही जिम्मेदारी
कनीना रोड स्थित एक गांव निवासी दो लड़कियों के सिर से कोरोना में अपनी मां का साया उठ गया। उनकी मां ही उनका एकमात्र सहारा थी। मां की मौत के बच्चियां अपनी बुआ के पास रह रही हैं। हालांकि लाड-प्यार मिलने के बाद भी वो मां को खोने के गम से उभर नहीं पाई है। कई बार वो अपनी मां की तस्वीर लेकर रोने लग जाती हैं।

अनाथ हुए बच्चों को तमाम सुविधाएं दी जा रही
सरकार की घोषणा और गाइडलाइन अनुसार कोरोना में अनाथ हुए बच्चों को तमाम सुविधाएं दी जा रही हैं। उनके खाते में मासिक आर्थिक सहायता समय पर डाली जा रही है। जिले में दस बच्चे कोरोना काल के दौरान अनाथ हुए और उनका चिह्नित हम पहले ही कर चुके हैं।
-गीता सहारण, जिला अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग
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