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Hisar News: रंग बताएंगे ज्ञान की धार, सुधार की बनेगी राह
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हिसार। परीक्षा परिणाम की तस्वीर बदलने के लिए अब स्कूली विद्यार्थियों की कमजोर कड़ियों को पहचानकर सुधार की पहल की जा रही है। इसी उद्देश्य से एक विद्यालय में रंग आधारित मूल्यांकन व्यवस्था शुरू की गई है जहा रंग ज्ञान की धार बताएंगे।
इसके तहत विषयवार अंकों के आधार पर विद्यार्थियों की शैक्षणिक स्थिति को तीन रंगों में वर्गीकृत किया जाएगा। यह व्यवस्था न केवल कमजोर विद्यार्थियों की समय रहते पहचान करेगी बल्कि उन्हें अतिरिक्त सहयोग देकर प्रदर्शन में सुधार की राह प्रशस्त की जाएगी।
व्यवस्था के अनुसार जिन विद्यार्थियों के अंक 50 प्रतिशत से कम होंगे उन्हें लाल रंग से चिह्नित किया जाएगा। 50 से 80 प्रतिशत तक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को पीले रंग की श्रेणी में रखा जाएगा जबकि 80 प्रतिशत से अधिक अंक लेने वाले विद्यार्थी हरे रंग से चिह्नित होंगे। इससे शिक्षकों को प्रत्येक विद्यार्थी की शैक्षणिक स्थिति समझने और उसके अनुसार शिक्षण की रणनीति बनाने में मदद मिलेगी।
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विद्यार्थियों की प्रगति पर नजर रखने के लिए नियमित परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। परीक्षा में प्राप्त विषयवार अंकों का रिकॉर्ड रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा। साथ ही पिछली परीक्षा के मुकाबले प्रदर्शन में हुए सुधार या गिरावट का आकलन भी किया जाएगा। कमजोर विद्यार्थियों को अतिरिक्त समय देकर पढ़ाया जाएगा और उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। अभिभावक-शिक्षक बैठकों (पीटीएम) में बच्चों की पढ़ाई और प्रगति पर चर्चा होगी ताकि अभिभावक भी सुधार की प्रक्रिया में भागीदारी निभा सकें। इस दौरान विद्यालय के परीक्षा परिणाम की भी समीक्षा की गई।
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शिक्षकों को कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर उनकी समस्याओं का समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं। केवल पाठ्यक्रम पूरा करवाना पर्याप्त नहीं है बल्कि बच्चों की समझ और सीखने की क्षमता पर भी ध्यान देना जरूरी है। किताबी ज्ञान के साथ नैतिक शिक्षा और जीवन मूल्यों से जुड़ी गतिविधियां करवाने पर भी जोर दिया जाएगा। अभिभावकों बच्चों की शैक्षणिक प्रगति की जानकारी लेते रहें। सोशल मीडिया के अनावश्यक इस्तेमाल से दूर रखें। - राकेश चराया, खंड शिक्षा अधिकारी, (बीईओ)
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इसके तहत विषयवार अंकों के आधार पर विद्यार्थियों की शैक्षणिक स्थिति को तीन रंगों में वर्गीकृत किया जाएगा। यह व्यवस्था न केवल कमजोर विद्यार्थियों की समय रहते पहचान करेगी बल्कि उन्हें अतिरिक्त सहयोग देकर प्रदर्शन में सुधार की राह प्रशस्त की जाएगी।
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व्यवस्था के अनुसार जिन विद्यार्थियों के अंक 50 प्रतिशत से कम होंगे उन्हें लाल रंग से चिह्नित किया जाएगा। 50 से 80 प्रतिशत तक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को पीले रंग की श्रेणी में रखा जाएगा जबकि 80 प्रतिशत से अधिक अंक लेने वाले विद्यार्थी हरे रंग से चिह्नित होंगे। इससे शिक्षकों को प्रत्येक विद्यार्थी की शैक्षणिक स्थिति समझने और उसके अनुसार शिक्षण की रणनीति बनाने में मदद मिलेगी।
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विद्यार्थियों की प्रगति पर नजर रखने के लिए नियमित परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। परीक्षा में प्राप्त विषयवार अंकों का रिकॉर्ड रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा। साथ ही पिछली परीक्षा के मुकाबले प्रदर्शन में हुए सुधार या गिरावट का आकलन भी किया जाएगा। कमजोर विद्यार्थियों को अतिरिक्त समय देकर पढ़ाया जाएगा और उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। अभिभावक-शिक्षक बैठकों (पीटीएम) में बच्चों की पढ़ाई और प्रगति पर चर्चा होगी ताकि अभिभावक भी सुधार की प्रक्रिया में भागीदारी निभा सकें। इस दौरान विद्यालय के परीक्षा परिणाम की भी समीक्षा की गई।
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शिक्षकों को कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर उनकी समस्याओं का समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं। केवल पाठ्यक्रम पूरा करवाना पर्याप्त नहीं है बल्कि बच्चों की समझ और सीखने की क्षमता पर भी ध्यान देना जरूरी है। किताबी ज्ञान के साथ नैतिक शिक्षा और जीवन मूल्यों से जुड़ी गतिविधियां करवाने पर भी जोर दिया जाएगा। अभिभावकों बच्चों की शैक्षणिक प्रगति की जानकारी लेते रहें। सोशल मीडिया के अनावश्यक इस्तेमाल से दूर रखें। - राकेश चराया, खंड शिक्षा अधिकारी, (बीईओ)