{"_id":"6a2479e8b18d2041770c2dbf","slug":"childrens-swings-are-ruined-thieves-are-uprooting-tree-guards-hisar-news-c-21-hsr1020-885794-2026-06-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hisar News: कबाड़ हुए बच्चों के झूले<bha>;<\/bha> ट्री-गार्ड उखाड़ रहे चोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hisar News: कबाड़ हुए बच्चों के झूले<bha>;</bha> ट्री-गार्ड उखाड़ रहे चोर
Sun, 07 Jun 2026 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Sun, 07 Jun 2026 01:20 AM IST
विज्ञापन
हांसी में टूटे झूले दिखाते कृष्ण सोनी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हांसी। शहर की ऐतिहासिक धरोहर और एकमात्र प्रमुख पर्यटन स्थल आमटी झील इन दिनों नगर परिषद की अनदेखी और घोर प्रशासनिक लापरवाही का शिकार है। यह झील चोरों का अड्डा बन चुकी है। चोर यहां से झूले के पार्ट्स तोड़ ले जाते हैं। यहां तक की ट्री-गार्ड भी सुरक्षित नहीं है। सुंदरीकरण के नाम पर करीब चार वर्ष पहले पार्क में बच्चों के मनोरंजन के लिए जो झूले लगाए गए थे, वे आज पूरी तरह से टूट चुके हैं।
झील परिसर में बने पार्क में घास भी नाम मात्र बची है। परिसर में चारों तरफ झाड़ियां उगी हुई हैं। हरियाली को जिंदा रखने के लिए यहां देखरेख कर समिति ने अपने स्तर पर सबमर्सिबल पंप लगाया हुआ है। सबमर्सिबल से खारा पानी निकलता है। लेकिन उसी के सहारे पेड़-पौधों की देखभाल की जा रही है।
झील परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह नदारद होने के कारण असामाजिक तत्व और चोर दुस्साहस कर रहे हैं। पौधों की सुरक्षा के लिए लगाए गए लोहे के ट्री-गार्ड भी यहां सुरक्षित नहीं हैं। चोर उन्हें सरेआम उखाड़कर चोरी कर ले जाते हैं। वहीं यहां पर चार वर्ष पहले करीब ढ़ाई करोड़ रुपये की लागत से सुंदरीकरण हुआ था।
विज्ञापन
उस समय यहां झूले लगाए गए थे। लेकिन झूले के कई पार्ट्स टूट चुके हैं। लोगों का कहना है कि नशेड़ी यहां से झूले के पार्ट्स तोड़ कर ले जाते हैं। इसके चलते झूले अब किसी उपयोग के लिए नहीं बचे हैं।
हरियाली नहीं, झाड़ियां ज्यादा
पार्क में घास कम हैं व झाड़ियां ज्यादा हैं। अपने स्तर पर हम मिलजुल कर पेड़-पौधों की देखभाल कर रहे हैं। ताकि पार्क में हरियाली को बचाया जा सके। बाकी यहां प्रशासन की तरफ से कोई देखरेख नहीं है। न ही हरियाली को लेकर कोई संज्ञान लिया जाता है। - शंकर
नगर परिषद ने करीब चार साल पहले यहां बच्चों के लिए झूले लगवाए थे। देखरेख के अभाव में आज वे सब टूट चुके हैं और कबाड़ की तरह पड़े हैं। टूटे हुए झूलों के तीखे लोहे से बच्चों को चोट लगने का डर हमेशा बना रहता है। पार्क में बच्चों के मनोरंजन का कोई दूसरा साधन नहीं बचा है। - रामफल जांगड़ा।
झील और पार्क परिसर में कोई सुरक्षा गार्ड नहीं है। रात के समय यहां चोरों का राज रहता है। पौधों को सुरक्षित रखने के लिए जो लोहे के ट्री-गार्ड लगाए गए थे, चोर उन्हें सरेआम उखाड़कर ले जाते हैं।- महासिंह
आमटी झील हांसी की ऐतिहासिक पहचान है जिसे नगर परिषद ने अपनी लापरवाही से बर्बाद कर दिया है। करोड़ों के बजट कागजों में ठिकाने लगा दिए जाते हैं और धरातल पर नर्क बना हुआ है। यदि प्रशासन यहां व्यवस्था बेहतर कर दे लोग दूर-दराज से यहां घूमने आएं। लेकिन व्यथा कुछ और है। - एडवोकेट मलकियत सिंह
विज्ञापन
झील परिसर में बने पार्क में घास भी नाम मात्र बची है। परिसर में चारों तरफ झाड़ियां उगी हुई हैं। हरियाली को जिंदा रखने के लिए यहां देखरेख कर समिति ने अपने स्तर पर सबमर्सिबल पंप लगाया हुआ है। सबमर्सिबल से खारा पानी निकलता है। लेकिन उसी के सहारे पेड़-पौधों की देखभाल की जा रही है।
विज्ञापन
झील परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह नदारद होने के कारण असामाजिक तत्व और चोर दुस्साहस कर रहे हैं। पौधों की सुरक्षा के लिए लगाए गए लोहे के ट्री-गार्ड भी यहां सुरक्षित नहीं हैं। चोर उन्हें सरेआम उखाड़कर चोरी कर ले जाते हैं। वहीं यहां पर चार वर्ष पहले करीब ढ़ाई करोड़ रुपये की लागत से सुंदरीकरण हुआ था।
विज्ञापन
उस समय यहां झूले लगाए गए थे। लेकिन झूले के कई पार्ट्स टूट चुके हैं। लोगों का कहना है कि नशेड़ी यहां से झूले के पार्ट्स तोड़ कर ले जाते हैं। इसके चलते झूले अब किसी उपयोग के लिए नहीं बचे हैं।
हरियाली नहीं, झाड़ियां ज्यादा
पार्क में घास कम हैं व झाड़ियां ज्यादा हैं। अपने स्तर पर हम मिलजुल कर पेड़-पौधों की देखभाल कर रहे हैं। ताकि पार्क में हरियाली को बचाया जा सके। बाकी यहां प्रशासन की तरफ से कोई देखरेख नहीं है। न ही हरियाली को लेकर कोई संज्ञान लिया जाता है। - शंकर
नगर परिषद ने करीब चार साल पहले यहां बच्चों के लिए झूले लगवाए थे। देखरेख के अभाव में आज वे सब टूट चुके हैं और कबाड़ की तरह पड़े हैं। टूटे हुए झूलों के तीखे लोहे से बच्चों को चोट लगने का डर हमेशा बना रहता है। पार्क में बच्चों के मनोरंजन का कोई दूसरा साधन नहीं बचा है। - रामफल जांगड़ा।
झील और पार्क परिसर में कोई सुरक्षा गार्ड नहीं है। रात के समय यहां चोरों का राज रहता है। पौधों को सुरक्षित रखने के लिए जो लोहे के ट्री-गार्ड लगाए गए थे, चोर उन्हें सरेआम उखाड़कर ले जाते हैं।- महासिंह
आमटी झील हांसी की ऐतिहासिक पहचान है जिसे नगर परिषद ने अपनी लापरवाही से बर्बाद कर दिया है। करोड़ों के बजट कागजों में ठिकाने लगा दिए जाते हैं और धरातल पर नर्क बना हुआ है। यदि प्रशासन यहां व्यवस्था बेहतर कर दे लोग दूर-दराज से यहां घूमने आएं। लेकिन व्यथा कुछ और है। - एडवोकेट मलकियत सिंह