फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Hisar News ›   Children are emotionally weak in adolescence, parents and teachers should take special care

किशोर अवस्था में भावनात्मक रूप से कमजोर होते है बच्चें, अभिभावक और शिक्षक रखें विशेष ध्यान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 25 Mar 2022 10:54 PM IST
विज्ञापन
Children are emotionally weak in adolescence, parents and teachers should take special care
हिसार। किशोर अवस्था में बच्चे भावनात्मक रूप से कमजोर होते हैं। ऐसे में अभिभावकों और शिक्षकों दोनों को उन पर नजर रखने की जरूरत होती है। इस उम्र में उनका ध्यान नहीं रखा गया तो वे भटक सकते हं और इस तरह की घटना को अंजाम दे सकते हैं। मोबाइल की लत भी घातक होती जा रही है। यह कहना है नागरिक अस्पताल की मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. पूनम दहिया का।
विज्ञापन

शहर के निजी स्कूल में सहपाठी द्वारा छात्र को कैंची मारने के मामले में उनका कहना है कि किशोर अवस्था में बच्चे छोटी बात को मन में रख लेते हैं, ऐसे में बदलें की भावना कहीं न कहीं रह जाती है। उस कारण ऐसा करते है। दूसरा कारण ये है कि आजकल के बच्चे मोबाइल फोन में व्यस्त रहते हैं और अधिकतर समय में वे मारधाड़ वाले खेल खेलते हैं। ऐसे में बच्चों के दिमाग में लड़ाई-झगड़ा करने की प्रवृति बनी शुरू हो जाती है जो कि काफी घातक है। इसके अलावा आज के समय में बच्चे घर के बाहर आपस में मिलजुल कर कम खेल खेलते हैं और मोबाइल फोन पर ही बने रहते हैं। दूसरा अगर, कुछ करें तो वे सहन नहीं कर सकते। ऐसे बच्चों के स्वभाव में चिड़चड़ापन भी आता जाता है वो छोटी छोटी बातों पर लड़ाई झगड़ा करना शुरू कर देता है।
विज्ञापन

चिकित्सक का कहना है कि घर के अंदर अभिभावकों को शुरू से ही ऐसा माहौल बनाना चाहिए कि अगर बच्चों के साथ कुछ भी हो तो वह बातें साझा करें। अगर, इस मामले में बच्चा अपने घर पर बातें शेयर करता तो ऐसा नहीं होता। शिक्षकों को भी कक्षा के अंदर बच्चों पर ध्यान रखना चाहिए। किसी विद्यार्थी की गतिविधि सहीं नहीं लगती है तो इस बारे में अभिभावकों से बात करें और उसकी कांउसिलिंग करवाएं। अभिभावक बच्चों को शुरू से ये समझाए कि मजाक हलका फुलका ही हो, जो किसी को नुकसान न पहुंचाए। कई बार मजाक-मजाक में बड़े हादसे हो जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

नैतिक शिक्षा के बारे में विद्यार्थियों को करें जागरूक
अगर किसी स्कूल के छात्र स्कूल कैंपस में ही इस प्रकार की वारदात कर देते हैं तो इसमें कहीं न कहीं उस स्कूल प्रबंधन व शिक्षकों की भी कमी रही होगी। छात्र द्वारा स्कूल में की जाने वाली हरकतों के बारे में उसके अभिभावकों को भी बताना चाहिए। वहीं अभिभावकों को भी अपने बच्चों का ध्यान रखना चाहिए। बच्चों को बुरी संगत से बचाने के लिए उसको मोटिवेट करना चाहिए। भविष्य में ऐसी हरकत न हो इसके लिए स्कूलों में नैतिक शिक्षा पर जोर देना चाहिए। समय-समय पर विद्यार्थियों की काउंसिलिंग होनी चाहिए। लड़ाई-झगड़ा करने व आपसी मेल जोल से रहने के लिए सभी को प्रेरित करना चाहिए। - धनपत राम, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, हिसार।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed