{"_id":"670d8c8664588ad87409f7b7","slug":"case-will-be-registered-against-officers-and-employees-for-fraud-in-the-name-of-property-id-hisar-news-c-21-hsr1020-484733-2024-10-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hisar News: प्रॉपर्टी आईडी के नाम की गई धोखाधड़ी अधिकारी आैर कर्मियों पर दर्ज होगा केस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hisar News: प्रॉपर्टी आईडी के नाम की गई धोखाधड़ी अधिकारी आैर कर्मियों पर दर्ज होगा केस
Tue, 15 Oct 2024 02:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Tue, 15 Oct 2024 02:56 AM IST
विज्ञापन
नगर आयुक्त की तरफ से जारी किए गए कार्रवाई के आदेश
हांसी। जिला नगर आयुक्त ने प्रॉपर्टी आईडी के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले अधिकारी व कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं। बीते वर्ष नगर परिषद प्रधान सहित 21 पार्षदों की तरफ से विजिलेंस को दी शिकायत की जांच में आरोप सही पाए जाने पर यह कार्रवाई की गई है।
आरोप थे कि गलत तरीके से लाखों रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स माफ किया गया और प्रॉपर्टी आईडी को गलत तरीके से लिंक किया गया।
अक्तूबर 2023 में प्रधान सहित 21 पार्षदों ने नगर परिषद के अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ प्रॉपर्टी आईडी में धोखाधड़ी की शिकायत स्टेट विजिलेंस ब्यूरो व शहरी स्थानीय निकाय के चीफ विजिलेंस अफसर को दी थी। इस पर जिला नगर आयुक्त ने जांच के लिए कमेटी बनाई। नगर परिषद प्रधान, उपप्रधान सहित सात पार्षदों को जांच में शामिल किया गया। जांच के दौरान इन्होंने आरोपों से संबंधित साक्ष्य भी पेश किए। इनमें बताया कि 4928 वर्ग गज जमीन का गृहकर मात्र 5700 रुपये लिया गया, जबकि ज्यादा बनता था। ऐसे ही कई जगहों पर गृह कर माफ कर दिया गया। वहीं, पुरानी प्रॉपर्टी आईडी के साथ गलत तरीके से एक अवैध प्रॉपर्टी आईडी को जोड़ दिया गया।
ऐसा करीब 15-20 वैध प्रॉपर्टी आईडी में हुआ। ऐसा करके प्रॉपर्टी मालिकों से रुपये लिए जाते थे। कार्यकारी अधिकारी व लेखाकार पर बिना ऑडिट ठेकेदारों को लाखों रुपये का भुगतान करने का भी आरोप लगाया गया था।
विज्ञापन
ऐसे करते थे अवैध प्रॉपर्टी आईडी को वैध
किसी भी अवैध कॉलोनी व क्षेत्र के प्लॉट या भवन की प्रॉपर्टी आईडी अवैध मानी जाती है। अवैध प्रॉपर्टी आईडी से रजिस्ट्री नहीं होती। कोई व्यक्ति वैध आईडी को वैध करवाने के लिए नगर परिषद में आता तो उसकी अवैध आईडी को किसी भी वैध आईडी से जोड़ दिया जाता था। इसके बाद व्यक्ति आसानी से रजिस्ट्री करवा सकता था। वहीं रजिस्ट्री के बाद अवैध आईडी को फिर से अवैध करवा दिया जाता था। इस काम के लिए नागरिकों से मोटी रकम लिए जाने की शिकायत की गई थी
विज्ञापन
आरोप थे कि गलत तरीके से लाखों रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स माफ किया गया और प्रॉपर्टी आईडी को गलत तरीके से लिंक किया गया।
अक्तूबर 2023 में प्रधान सहित 21 पार्षदों ने नगर परिषद के अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ प्रॉपर्टी आईडी में धोखाधड़ी की शिकायत स्टेट विजिलेंस ब्यूरो व शहरी स्थानीय निकाय के चीफ विजिलेंस अफसर को दी थी। इस पर जिला नगर आयुक्त ने जांच के लिए कमेटी बनाई। नगर परिषद प्रधान, उपप्रधान सहित सात पार्षदों को जांच में शामिल किया गया। जांच के दौरान इन्होंने आरोपों से संबंधित साक्ष्य भी पेश किए। इनमें बताया कि 4928 वर्ग गज जमीन का गृहकर मात्र 5700 रुपये लिया गया, जबकि ज्यादा बनता था। ऐसे ही कई जगहों पर गृह कर माफ कर दिया गया। वहीं, पुरानी प्रॉपर्टी आईडी के साथ गलत तरीके से एक अवैध प्रॉपर्टी आईडी को जोड़ दिया गया।
विज्ञापन
ऐसा करीब 15-20 वैध प्रॉपर्टी आईडी में हुआ। ऐसा करके प्रॉपर्टी मालिकों से रुपये लिए जाते थे। कार्यकारी अधिकारी व लेखाकार पर बिना ऑडिट ठेकेदारों को लाखों रुपये का भुगतान करने का भी आरोप लगाया गया था।
विज्ञापन
ऐसे करते थे अवैध प्रॉपर्टी आईडी को वैध
किसी भी अवैध कॉलोनी व क्षेत्र के प्लॉट या भवन की प्रॉपर्टी आईडी अवैध मानी जाती है। अवैध प्रॉपर्टी आईडी से रजिस्ट्री नहीं होती। कोई व्यक्ति वैध आईडी को वैध करवाने के लिए नगर परिषद में आता तो उसकी अवैध आईडी को किसी भी वैध आईडी से जोड़ दिया जाता था। इसके बाद व्यक्ति आसानी से रजिस्ट्री करवा सकता था। वहीं रजिस्ट्री के बाद अवैध आईडी को फिर से अवैध करवा दिया जाता था। इस काम के लिए नागरिकों से मोटी रकम लिए जाने की शिकायत की गई थी