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गनमैन द्वारा पत्नी की हत्या का मामला : पिस्तौल जमा करवाने वाले कोथ रजिस्टर में मिली ओवर राइटिंग, कोथ प्रभारी और गनमैन का होगा नारको टेस्ट
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हिसार। करीब तीन साल पहले हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में जींद के तत्कालीन डीएसपी के गनमैन द्वारा कथित रूप से गोली मारकर पत्नी की हत्या के मामले में जांच कर रहे पुलिस अधीक्षक गंगाराम पूनिया ने नया खुलासा किया है। सोमवार को कोर्ट में पुलिस अधीक्षक ने जवाब दिया कि सरकारी पिस्तौल जमा करवाने वाले कोथ (शस्त्रागार) रजिस्टर में ओवरराइटिंग मिली है। कोथ प्रभारी ईएसआई सतीश कुमार और पिस्तौल जमा करवाने वाला डीएसपी का दूसरे गनमैन सिपाही कुलदीप सवालों का सही जवाब नहीं दे रहे हैं। हालांकि दोनों नारको टेस्ट और ब्रेन मैपिंग टेस्ट के लिए तैयार है। इस पर अदालत ने कोथ प्रभारी और गनमैन के नारको व ब्रेन मैपिंग टेस्ट की मंजूरी दे दी है।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता मनमोहन राय ने बताया कि शहर थाना पुलिस ने 16 अप्रैल 2020 को भिवानी के गोकलपुरा गांव निवासी विकास की शिकायत पर जींद के तत्कालीन डीएसपी कप्तान सिंह के पीएसओ पुलिस कांस्टेबल भिवानी के देवास गांव निवासी विक्रम के खिलाफ पत्नी रिंकू की हत्या करने के आरोप में मामला दर्ज किया था।
पुलिस हत्या में इस्तेमाल पिस्तौल का नहीं लगा सकी सुराग
पुलिस ने जांच में बताया कि महिला की हत्या लकड़ी के सोटे से हुई जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चिकित्सकों के बोर्ड ने कहा कि हत्या गोली मारकर की गई और मृतका के शरीर पर गोली के निशान भी हैं। इसके बाद से पुलिस आज तक यह नहीं पता लगा पाई है कि यह हत्या किस पिस्तौल से की गई थी। अब नारको और ब्रेन मैपिंग टेस्ट करवाकर अंतिम जांच रिपोर्ट जमा करवाने के लिए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित सहरावत की अदालत ने जांच एजेंसी को 4 जुलाई तक का आखिरी मौका दिया है। नारको टेस्ट गुजरात के गांधीनगर में होगा।
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सरकारी पिस्तौल से चली थी गोली
पुलिस अधीक्षक गंगाराम पूनिया ने प्राथमिक जांच के बारे में अदालत को बताया कि जींद के कोथ निवासी आरोपी विक्रम को सरकारी 9 एमएम पिस्तौल जारी की गई थी और वह 12 अप्रैल 2020 से छुट्टी पर था। विक्रम के साथी गनमैन कुलदीप ने विक्रम को जारी किया गया पिस्तौल 16 अप्रैल 2020 को हत्या के दिन ही जमा करवाया था। यह पता लगने के बाद 13 अप्रैल 2023 को कुलदीप के लिखाई का सैंपल लिया गया और जांच के लिए एफएसएल भेज दिया गया। इस पिस्तौल को पुलिस ने 24 फरवरी 2023 को ही कब्जे में ले लिया था और 1 मार्च 2023 को जांच के लिए एफएसएल भेज दिया।
हिसार पुलिस ने कब्जे में ले रखा है रजिस्टर
जांच के दौरान सरकारी हथियार और जमा करवाने के जींद पुलिस के रजिस्टर को हिसार पुलिस ने 12 अप्रैल 2023 को कब्जे में ले लिया। एफएसएल रिपोर्ट में सामने आया है कि पिस्तौल चालू हालत में है और उससे फायरिंग भी हुई है लेकिन फायरिंग कब हुई, इसका पता नहीं लगाया जा सकता। इसके बाद जींद पुलिस अधीक्षक को 13 अप्रैल 2023 को पत्र लिखकर उपरोक्त हथियार से हुई अंतिम फायरिंग की रिपोर्ट मांगी जिसकी विस्तृत रिपोर्ट आनी अभी बाकी है। जांच में यह पता चला कि मृतका महिला के शरीर पर गोली लगने के जो घाव थे, वह 9 एमएम पिस्तौल की गोली से हो सकते हैं। जांच के दौरान जींद के धिगताना गांव निवासी वजीर को 15 अप्रैल 2023 को जांच में शामिल किया गया और 18 अप्रैल 2023 को उसको पूछताछ के लिए दोबारा बुलाया गया।
अब तक के सभी जांच अधिकारी नहीं कर पाए जांच
- इस मामले के शुरुआती जांच अधिकारियों को विभागीय जांच में लापरवाही बरतने का दोषी पाया गया।
- डीएसपी अभिमन्यु लोहान को जांच सौंपी लेकिन वे दो साल की अवधि में भी निर्णायक जांच नहीं कर पाए।
- इसके बाद अदालत के आदेश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आईपीएस पूजा वशिष्ठ को 28 अक्टूबर, 2022 को यह जांच सौंपी। उन्होंने समय-समय पर स्टेटस रिपोर्ट भी अदालत में जमा करवाई लेकिन करीब पांच माह में वह मामले में निर्णायक रिपोर्ट फाइल करने में विफल रही।
- अब हिसार पुलिस अधीक्षक ने मामले की जांच शुरू की है।
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अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता मनमोहन राय ने बताया कि शहर थाना पुलिस ने 16 अप्रैल 2020 को भिवानी के गोकलपुरा गांव निवासी विकास की शिकायत पर जींद के तत्कालीन डीएसपी कप्तान सिंह के पीएसओ पुलिस कांस्टेबल भिवानी के देवास गांव निवासी विक्रम के खिलाफ पत्नी रिंकू की हत्या करने के आरोप में मामला दर्ज किया था।
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पुलिस हत्या में इस्तेमाल पिस्तौल का नहीं लगा सकी सुराग
पुलिस ने जांच में बताया कि महिला की हत्या लकड़ी के सोटे से हुई जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चिकित्सकों के बोर्ड ने कहा कि हत्या गोली मारकर की गई और मृतका के शरीर पर गोली के निशान भी हैं। इसके बाद से पुलिस आज तक यह नहीं पता लगा पाई है कि यह हत्या किस पिस्तौल से की गई थी। अब नारको और ब्रेन मैपिंग टेस्ट करवाकर अंतिम जांच रिपोर्ट जमा करवाने के लिए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित सहरावत की अदालत ने जांच एजेंसी को 4 जुलाई तक का आखिरी मौका दिया है। नारको टेस्ट गुजरात के गांधीनगर में होगा।
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सरकारी पिस्तौल से चली थी गोली
पुलिस अधीक्षक गंगाराम पूनिया ने प्राथमिक जांच के बारे में अदालत को बताया कि जींद के कोथ निवासी आरोपी विक्रम को सरकारी 9 एमएम पिस्तौल जारी की गई थी और वह 12 अप्रैल 2020 से छुट्टी पर था। विक्रम के साथी गनमैन कुलदीप ने विक्रम को जारी किया गया पिस्तौल 16 अप्रैल 2020 को हत्या के दिन ही जमा करवाया था। यह पता लगने के बाद 13 अप्रैल 2023 को कुलदीप के लिखाई का सैंपल लिया गया और जांच के लिए एफएसएल भेज दिया गया। इस पिस्तौल को पुलिस ने 24 फरवरी 2023 को ही कब्जे में ले लिया था और 1 मार्च 2023 को जांच के लिए एफएसएल भेज दिया।
हिसार पुलिस ने कब्जे में ले रखा है रजिस्टर
जांच के दौरान सरकारी हथियार और जमा करवाने के जींद पुलिस के रजिस्टर को हिसार पुलिस ने 12 अप्रैल 2023 को कब्जे में ले लिया। एफएसएल रिपोर्ट में सामने आया है कि पिस्तौल चालू हालत में है और उससे फायरिंग भी हुई है लेकिन फायरिंग कब हुई, इसका पता नहीं लगाया जा सकता। इसके बाद जींद पुलिस अधीक्षक को 13 अप्रैल 2023 को पत्र लिखकर उपरोक्त हथियार से हुई अंतिम फायरिंग की रिपोर्ट मांगी जिसकी विस्तृत रिपोर्ट आनी अभी बाकी है। जांच में यह पता चला कि मृतका महिला के शरीर पर गोली लगने के जो घाव थे, वह 9 एमएम पिस्तौल की गोली से हो सकते हैं। जांच के दौरान जींद के धिगताना गांव निवासी वजीर को 15 अप्रैल 2023 को जांच में शामिल किया गया और 18 अप्रैल 2023 को उसको पूछताछ के लिए दोबारा बुलाया गया।
अब तक के सभी जांच अधिकारी नहीं कर पाए जांच
- इस मामले के शुरुआती जांच अधिकारियों को विभागीय जांच में लापरवाही बरतने का दोषी पाया गया।
- डीएसपी अभिमन्यु लोहान को जांच सौंपी लेकिन वे दो साल की अवधि में भी निर्णायक जांच नहीं कर पाए।
- इसके बाद अदालत के आदेश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आईपीएस पूजा वशिष्ठ को 28 अक्टूबर, 2022 को यह जांच सौंपी। उन्होंने समय-समय पर स्टेटस रिपोर्ट भी अदालत में जमा करवाई लेकिन करीब पांच माह में वह मामले में निर्णायक रिपोर्ट फाइल करने में विफल रही।
- अब हिसार पुलिस अधीक्षक ने मामले की जांच शुरू की है।