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बीएंडआर के अधिकारी बताएंगे आरसीबी की बिल्डिंग सुरक्षित है या नहीं
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हिसार। नगर निगम के राम चाट भंडार (आरसीबी) की बिल्डिंग को गिराने के आदेश के खिलाफ रेस्टोरेंट मालिक की तरफ से सिविल कोर्ट में दायर याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। अदालत ने बीएंडआर को रेस्टोरेंट की बिल्डिंग का निरीक्षण कर इसके सुरक्षित या असुरक्षित होने की रिपोर्ट देने के आदेश दिए। 5 मई को होने वाली सुनवाई में अधिकारी को यह रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
जज शिफा की कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि नगर निगम की तरफ से रेस्टोरेंट मालिक को नोटिस किए गए नोटिस पर एक्सईएन के हस्ताक्षर हैं, जबकि वह इसके लिए सक्षम प्राधिकारी नहीं है। इस पर निगम के वकील ने जवाब दिया कि निगमायुक्त की तरफ से अपनी पावर को डेलीगेट किया गया है, इसी के तहत एक्सईएन की तरफ यह नोटिस जारी किया गया। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि मीडिया में छप रही खबरों व कुछ शिकायतकर्ताओं के दबाव में आकर निगम यह कार्रवाई कर रहा है। इस पर निगम के वकील ने कहा कि यह कार्रवाई एकदम से नहीं की गई है। हादसे के 6 दिन बाद निगम की तरफ से रेस्टोरेंट मालिक को नोटिस दिया गया था कि वह निगम की अनुमति के बिना बिल्डिंग का इस्तेमाल न करे और इस्तेमाल करने से पहले स्ट्रक्चर स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट प्रस्तुत करे। जब रेस्टोरेंट मालिक की तरफ से नोटिस पर कोई जवाब नहीं आया तो निगम ने अपने अधिकारियों की एक कमेटी गठित की, जिसने बिल्डिंग का निरीक्षण किया।
इस कमेटी में शामिल किए गए एक अधिकारी बिल्डिंग स्ट्रक्चर में एमटेक हैं। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि बिल्डिंग असुरिक्षत है। चूंकि इस बिल्डिंग के आसपास अन्य भी बिल्डिंग हैं। अगर यह बिल्डिंग गिरती है तो इसे आसपास की बिल्डिंग को भी नुकसान हो सकता है। इस देखते हुए निगम ने रेस्टोरेंट मालिक को बिल्डिंग गिराने के आदेश दिए। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि वह निगम की तरफ से दिए गए स्ट्रक्चर स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट को नहीं मानते। इस पर निगम के वकील ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता दोबारा से बिल्डिंग का निरीक्षण करवाना चाहता है तो यह किसी गवर्नमेंट अथॉरिटी से ही करवाया जाए। यह सुन जज शिफा ने कहा कि बीएंडआर के अधिकारी निरीक्षण कर बताएंगे कि बिल्डिंग सुरक्षित है या असुरक्षित।
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जज शिफा की कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि नगर निगम की तरफ से रेस्टोरेंट मालिक को नोटिस किए गए नोटिस पर एक्सईएन के हस्ताक्षर हैं, जबकि वह इसके लिए सक्षम प्राधिकारी नहीं है। इस पर निगम के वकील ने जवाब दिया कि निगमायुक्त की तरफ से अपनी पावर को डेलीगेट किया गया है, इसी के तहत एक्सईएन की तरफ यह नोटिस जारी किया गया। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि मीडिया में छप रही खबरों व कुछ शिकायतकर्ताओं के दबाव में आकर निगम यह कार्रवाई कर रहा है। इस पर निगम के वकील ने कहा कि यह कार्रवाई एकदम से नहीं की गई है। हादसे के 6 दिन बाद निगम की तरफ से रेस्टोरेंट मालिक को नोटिस दिया गया था कि वह निगम की अनुमति के बिना बिल्डिंग का इस्तेमाल न करे और इस्तेमाल करने से पहले स्ट्रक्चर स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट प्रस्तुत करे। जब रेस्टोरेंट मालिक की तरफ से नोटिस पर कोई जवाब नहीं आया तो निगम ने अपने अधिकारियों की एक कमेटी गठित की, जिसने बिल्डिंग का निरीक्षण किया।
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इस कमेटी में शामिल किए गए एक अधिकारी बिल्डिंग स्ट्रक्चर में एमटेक हैं। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि बिल्डिंग असुरिक्षत है। चूंकि इस बिल्डिंग के आसपास अन्य भी बिल्डिंग हैं। अगर यह बिल्डिंग गिरती है तो इसे आसपास की बिल्डिंग को भी नुकसान हो सकता है। इस देखते हुए निगम ने रेस्टोरेंट मालिक को बिल्डिंग गिराने के आदेश दिए। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि वह निगम की तरफ से दिए गए स्ट्रक्चर स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट को नहीं मानते। इस पर निगम के वकील ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता दोबारा से बिल्डिंग का निरीक्षण करवाना चाहता है तो यह किसी गवर्नमेंट अथॉरिटी से ही करवाया जाए। यह सुन जज शिफा ने कहा कि बीएंडआर के अधिकारी निरीक्षण कर बताएंगे कि बिल्डिंग सुरक्षित है या असुरक्षित।
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