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घरों में इंसानों के साथ रहना पसंद करती हैं चिड़ियां, पक्के मकानों से 45 प्रतिशत घटी आबादी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 19 Mar 2022 11:33 PM IST
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Birds like to live with humans in homes, 45 percent population reduction due to pucca houses
रेवाड़ी के झाबुआ में बना ब्रीडिंग सेंटर। - फोटो : Hisar
हिसार। गौरेया.. इसकी चहचहाहट से हमारे आंगनों की उदासी कम होती है। घरों में इंसानों के साथ चिड़ियां रहना पसंद करती हैं, लेकिन पक्के मकानों के कारण रहवास खत्म हो चुका है। इस कारण चिड़ियां की 45 प्रतिशत आबादी घट चुकी हैं। हालांकि आज भी शहरों के मुकाबले गांवों में कच्चे मकान ज्यादा होने के कारण चिड़ियां ज्यादा देखने को मिलती हैं। हर साल 20 मार्च को विश्व गौरेया दिवस 20 मार्च को है। आज वन्य प्राणी विभाग की ओर से हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, जींद, भिवानी व चरखी दादरी में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। साथ ही विभाग की ओर लोगों को लकड़ी, नारियल के छिल्के व मिट्टी से तैयार घोंसले बांटे जाएंगे, ताकि वह गौरेया का संरक्षण कर सकें। विभाग की ओर से जागरूकता अभियान सुबह 10 बजे शुरू होगा।
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प्रजाति को बचाने के लिए रेवाड़ी के झाबुआ में ब्रीडिंग सेंटर तैयार
रेवाड़ी के झाबुआ में ब्रीडिंग सेंटर तैयार हो चुका है। हालांकि अभी इसका उद्घाटन नहीं हुआ है। फिलहाल ब्रीडिंग सेंटर में पिंजरे में 35 से 40 चिड़ियां हैं। वन एवं वन्य जीव संरक्षण विभाग के डिविजनल वाइल्ड लाइफ ऑफिसर वेदप्रकाश का कहना है कि चिड़ियां मार्च से लेकर अप्रैल तक बच्चे पैदा करती हैं। जल्द ही ब्रीडिंग सेंटर में बच्चों की संख्या भी बढ़ेगी। चिड़ियां की खास बात है कि वह सुरक्षित जगह देखकर ही अपना घोंसला बनाती हैं।
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हरे कीड़े में होता है सबसे ज्यादा प्रोटीन, बच्चों को खिलाना पसंद करती हैं चिड़ियां
हरे चना में मिलने वाला हरे कीड़े में सबसे ज्यादा प्रोटीन होता है। चिड़ियां भी अपने बच्चों की ग्रोथ करने के लिए हरा कीड़ा खिलाना पसंद करती हैं, लेकिन आज दवाइयों का छिड़काव अधिक होने से कीड़े मर जाते हैं। इस कारण चिड़ियां के बच्चों को प्रोटीन नहीं मिल पाता। वहीं चिड़ियां अपने भोजन में चिटियां, कीड़े और दाना खाना पसंद करती हैं।
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पक्के मकान बनने से चिड़ियां की आबादी आज 45 प्रतिशत घट चुकी है। ऐसे में आज के समय में इनका संरक्षण करना बहुत जरूरी है। हम अपने घरों में सुरक्षित जगह पर भी लकड़ी, मिट्टी या नारियल के छिलके से बने घोंसलों को लगा सकते हैं। हमारी ओर से विश्व गौरेया दिवस पर हिसार सहित छह जिलों में लोगों को जागरूक करने के लिए कैंप लगाया जाएगा। इस दौरान एक इंस्पेक्टर और एक गार्ड की ड्यूटी रहेगी। - वेदप्रकाश, डिविजनल वाइल्ड लाइफ ऑफिसर, वन एवं वन्य जीव संरक्षण विभाग
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