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Hisar News: 30 लाख का निवेश करवा की धोखाधड़ी में सहकारी सोसायटी के उपाध्यक्ष की जमानत याचिका खारिज
Fri, 06 Nov 2026 12:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Fri, 06 Nov 2026 12:36 AM IST
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हिसार। 30 लाख रुपये निवेश करवाकर कथित धोखाधड़ी करने के मामले में उम्मीद मल्टीपर्पज को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड, कोलकाता के उपाध्यक्ष बताए गए 72 वर्षीय सुभाष कांति चंदा को अदालत से राहत नहीं मिली। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश खत्री सौरभ की अदालत ने आरोपी की पहली नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। वह 21 जुलाई से जेल में बंद है।
आरोप है कि हिसार निवासी मीर सिंह ने सेवानिवृत्त एसडीओ बलबीर सिंह को सोसायटी में निवेश करने का झांसा दिया था। हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड से सेवानिवृत्त बलबीर सिंह ने 5 सितंबर 2023 को आरटीजीएस के जरिए 30 लाख रुपये जमा करवाए थे। इसके बदले उन्हें 13 प्रतिशत मासिक ब्याज देने का भरोसा दिया गया। मीर सिंह ने उन्हें एक डेबिट कार्ड भी दिया लेकिन वह नहीं चला। रकम मांगने पर कंपनी की ओर से पैसे रोकने की बात कही गई।
सिविल लाइन थाना पुलिस ने इस संबंध में धारा 406 और 420 के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। आरोपी ने 30 अक्तूबर को जमानत याचिका लगाई थी। बचाव पक्ष ने दलील दी कि उसका नाम एफआईआर में नहीं है। उसने खुद भी सोसायटी में 1.14 करोड़ रुपये लगाए हैं। उम्र और बाईपास सर्जरी का हवाला देते हुए जमानत मांगी गई।
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वहीं, सरकारी पक्ष ने आरोपी को सोसायटी के निदेशक मंडल का उपाध्यक्ष बताते हुए देशभर के निवेशकों से कथित धोखाधड़ी में उसकी भूमिका का हवाला दिया। अदालत ने आरोपों की गंभीरता और धोखाधड़ी के व्यापक दायरे को देखते हुए जमानत देने से इन्कार कर दिया।
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आरोप है कि हिसार निवासी मीर सिंह ने सेवानिवृत्त एसडीओ बलबीर सिंह को सोसायटी में निवेश करने का झांसा दिया था। हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड से सेवानिवृत्त बलबीर सिंह ने 5 सितंबर 2023 को आरटीजीएस के जरिए 30 लाख रुपये जमा करवाए थे। इसके बदले उन्हें 13 प्रतिशत मासिक ब्याज देने का भरोसा दिया गया। मीर सिंह ने उन्हें एक डेबिट कार्ड भी दिया लेकिन वह नहीं चला। रकम मांगने पर कंपनी की ओर से पैसे रोकने की बात कही गई।
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सिविल लाइन थाना पुलिस ने इस संबंध में धारा 406 और 420 के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। आरोपी ने 30 अक्तूबर को जमानत याचिका लगाई थी। बचाव पक्ष ने दलील दी कि उसका नाम एफआईआर में नहीं है। उसने खुद भी सोसायटी में 1.14 करोड़ रुपये लगाए हैं। उम्र और बाईपास सर्जरी का हवाला देते हुए जमानत मांगी गई।
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वहीं, सरकारी पक्ष ने आरोपी को सोसायटी के निदेशक मंडल का उपाध्यक्ष बताते हुए देशभर के निवेशकों से कथित धोखाधड़ी में उसकी भूमिका का हवाला दिया। अदालत ने आरोपों की गंभीरता और धोखाधड़ी के व्यापक दायरे को देखते हुए जमानत देने से इन्कार कर दिया।