{"_id":"6aea274b4609d9e51b05c01d","slug":"bacteriophage-therapy-is-effective-for-humans-and-animals-the-government-should-formulate-regulations-prof-gopal-das-hisar-news-c-21-hsr1005-987005-2026-11-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"बैक्टीरियोफेज थैरेपी मानव और पशुओं के लिए कारगर, सरकार बनाए नियम : प्रो. गोपाल दास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बैक्टीरियोफेज थैरेपी मानव और पशुओं के लिए कारगर, सरकार बनाए नियम : प्रो. गोपाल दास
विज्ञापन
हिसार। बैक्टीरियोफेज थैरेपी मानव और पशुओं में संक्रमण के उपचार के लिए काफी कारगर हो सकती है। इसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने और गंभीर संक्रमणों में उपचार का विकल्प उपलब्ध करवाने के लिए सरकार को स्पष्ट नियम बनाने चाहिए। यह बात बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व डीन रिसर्च प्रो. गोपाल दास ने मंगलवार को राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र में शुरू हुई अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के दौरान कही।
उन्होंने कॉन्फ्रेंस में रिसर्च पेपर प्रस्तुत किया। इसके बाद अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि एंटीबायोटिक का असर कम होने के कारण इस पुरानी उपचार पद्धति पर फिर से शोध किया जा रहा है।
प्रो. गोपाल दास ने बताया कि बैक्टीरियोफेज थैरेपी में बैक्टीरिया को नष्ट करने वाले वायरस का इस्तेमाल किया जाता है। एक से अधिक वायरस के मिश्रण को कॉकटेल कहा जाता है। पुराने अल्सर, गंभीर संक्रमण और ज्वाइंट रिप्लेसमेंट के बाद होने वाले संक्रमण में यह थैरेपी उपयोगी हो सकती है। इसका उपचार कई बार लंबे समय तक चलता है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से स्पष्ट नियम नहीं होने के कारण गंभीर संक्रमण के मामलों में भी इस थैरेपी का इस्तेमाल करने में परेशानी आती है। यह एंटीबायोटिक के मुकाबले सस्ती पड़ती है। कुछ संक्रमणों में बैक्टीरिया की परत बन जाती है जिस पर एंटीबायोटिक असर नहीं करती, जबकि बैक्टीरियोफेज काम कर सकता है। इससे उन एंटीबायोटिक दवाओं का असर दोबारा बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है जिनका प्रभाव कम हो गया है। देश में इस विषय पर कई शोध पत्र प्रकाशित हुए हैं और क्लीनिकल व मानव परीक्षण भी सफल रहे हैं। पशुओं में भी इसके अच्छे परिणाम मिले हैं। सरकार इस दिशा में ध्यान दे तो अधिक लोगों और पशुओं को इसका लाभ मिल सकता है।
कॉन्फ्रेंस का किया शुभारंभ
राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र में मंगलवार सुबह कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ पीपीवीएफआरए के चेयरमैन डॉ. त्रिलोचन महापात्रा ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। इस अवसर पर एचएयू के कुलपति प्रो. बीआर कांबोज, आईसीएआर के डीडीजी डॉ. रघुवेंद्रा भाटा, आईसीएआर के डीडीआर डॉ. यशपाल मलिक, एसकेयूएएसटी जम्मू के कुलपति प्रो. बीएन त्रिपाठी और लुवास के कुलपति प्रो. विनोद वर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कॉन्फ्रेंस में 200 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इनमें बेल्जियम, यूके, कोपनहेगन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधि भी शामिल हैं।
विज्ञापन
उन्होंने कॉन्फ्रेंस में रिसर्च पेपर प्रस्तुत किया। इसके बाद अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि एंटीबायोटिक का असर कम होने के कारण इस पुरानी उपचार पद्धति पर फिर से शोध किया जा रहा है।
विज्ञापन
प्रो. गोपाल दास ने बताया कि बैक्टीरियोफेज थैरेपी में बैक्टीरिया को नष्ट करने वाले वायरस का इस्तेमाल किया जाता है। एक से अधिक वायरस के मिश्रण को कॉकटेल कहा जाता है। पुराने अल्सर, गंभीर संक्रमण और ज्वाइंट रिप्लेसमेंट के बाद होने वाले संक्रमण में यह थैरेपी उपयोगी हो सकती है। इसका उपचार कई बार लंबे समय तक चलता है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से स्पष्ट नियम नहीं होने के कारण गंभीर संक्रमण के मामलों में भी इस थैरेपी का इस्तेमाल करने में परेशानी आती है। यह एंटीबायोटिक के मुकाबले सस्ती पड़ती है। कुछ संक्रमणों में बैक्टीरिया की परत बन जाती है जिस पर एंटीबायोटिक असर नहीं करती, जबकि बैक्टीरियोफेज काम कर सकता है। इससे उन एंटीबायोटिक दवाओं का असर दोबारा बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है जिनका प्रभाव कम हो गया है। देश में इस विषय पर कई शोध पत्र प्रकाशित हुए हैं और क्लीनिकल व मानव परीक्षण भी सफल रहे हैं। पशुओं में भी इसके अच्छे परिणाम मिले हैं। सरकार इस दिशा में ध्यान दे तो अधिक लोगों और पशुओं को इसका लाभ मिल सकता है।
कॉन्फ्रेंस का किया शुभारंभ
राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र में मंगलवार सुबह कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ पीपीवीएफआरए के चेयरमैन डॉ. त्रिलोचन महापात्रा ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। इस अवसर पर एचएयू के कुलपति प्रो. बीआर कांबोज, आईसीएआर के डीडीजी डॉ. रघुवेंद्रा भाटा, आईसीएआर के डीडीआर डॉ. यशपाल मलिक, एसकेयूएएसटी जम्मू के कुलपति प्रो. बीएन त्रिपाठी और लुवास के कुलपति प्रो. विनोद वर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कॉन्फ्रेंस में 200 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इनमें बेल्जियम, यूके, कोपनहेगन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधि भी शामिल हैं।