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सात में से तीन पर खिला कमल, तीन पर लगी चाबी, एक पर रह गया पंजा
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हार देखकर मतगणना स्थल से बाहर निकलकर जाते नारनौंद से भाजपा प्रत्याशी कैप्टन अभिमन्यु।
- फोटो : Hisar
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जिले की सात विधानसभा सीटों से में तीन पर भाजपा का कमल खिल गया, जबकि तीन सीटों का ताला जजपा की चाबी से खुल गया और कांग्रेस का पंजा केवल एक सीट पर सिमट गया। जिले की हिसार, हांसी और नलवा सीट भाजपा के खाते में गईं और जजपा ने उकलाना, बरवाला और नारनौंद सीट पर जीत दर्ज की। कांग्रेस आदमपुर की सीट को जीतने में कामयाब रही।
हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में भाजपा ने एक सीट अधिक जीती, क्योंकि वर्ष 2014 के चुनाव में भाजपा जिले की सात में से केवल दो ही सीटों पर जीत दर्ज कर पाई थी। पिछले वर्ष हिसार और नारनौंद की सीट पर भाजपा ने सीट दर्ज की थी, लेकिन इस बार पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु की नारनौंद की सीट गंवा दी, जबकि हिसार से डॉ. कमल गुप्ता की सीट बचाने के साथ नलवा और हांसी की सीट अपने खाते में जोड़ने में कामयाब रही। इसी प्रकार पारिवारिक विवाद के बाद इनेलो से टूटकर अलग पार्टी बनाने वाले दुष्यंत चौटाला का प्रदर्शन जिले में शानदार रहा और प्रदेश की 10 सीटों में से अकेले हिसार जिले से तीन सीटें जीतने में कामयाब रहे। हिसार जिले की सबसे महत्वपूर्ण सीट नारनौंद के साथ जजपा ने उकलाना और बरवाला सीट पर भी कब्जा जमाया।
2014 में इनेलो ने जीती थीं तीन सीटें
वर्ष 2014 के चुनाव में इनेलो को तीन सीट हासिल हुई थीं। हालांकि इनेलो इस बार जिले से एक भी सीट हासिल नहीं कर पाई, लेकिन उससे टूटकर बनी पार्टी जजपा ने तीन सीटों पर कब्जा किया। इनेलो के पास 2014 में बरवाला, उकलाना और नलवा सीटें थीं। इस बार बरवाला, उकलाना के साथ नारनौंद सीट पर जजपा ने कब्जा किया, जबकि नलवा सीट इनेलो से खिसककर भाजपा के पास चली गई।
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तीन का चेहरा वही मुखौटा नया, दो ने पार्टी बदली तो किस्मत चमकी
इस बार के चुनाव के भी अजब-गजब समीकरण देखने को मिल रहे हैं। कुछ प्रत्याशियों का इस चुनाव में चेहरा वही रहा, लेकिन मुखौटा नया पहनकर चुनाव मैदान में उतरे और मतदाताओं ने भी उन्हें फिर से विधानसभा पहुंचाने का काम किया। इनमें आदमपुर से कुलदीप बिश्नोई वर्ष 2014 में हजकां से चुनाव लड़े थे, लेकिन इस बार उनका मुखौटा कांग्रेस था। इस प्रकार नलवा से रणबीर गंगवा ने इनेलो के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार उनका मुखौटा भाजपा थी। इसी तरह अनूप धानक उकलाना से इनेलो के टिकट पर चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचे थे। इन तीनों ने इन्हीं हलकों से चुनाव लड़ा था और विधानसभा पहुंचे थे। इस बार वे अपना मुखौटा (पार्टी) बदलकर चुनाव लड़े और मतदाताओं ने उन्हें फिर से विधानसभा भेजने का काम किया। इसी तरह दो प्रत्याशियों ने पिछला चुनाव अलग-अलग पार्टी या निर्दलीय के रूप में लड़ा था, लेकिन इस बार उन्होंने दूसरी पार्टी का दामन थामा और जनता ने उन्हें भी विधानसभा में भेजने का काम किया। इनमें हांसी से विनोद भ्याणा ने कांग्रेस से चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे। इस बार उन्होंने पार्टी बदली तो किस्मत चमक गई और विधानसभा पहुंच गए। इसी प्रकार नारनौंद से रामकुमार गौतम ने निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा था और हार गए थे, लेकिन इस बार उन्होंने जजपा का दामन थामा और जनता ने उन्हें विधानसभा के द्वार तक पहुंचा दिया।
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हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में भाजपा ने एक सीट अधिक जीती, क्योंकि वर्ष 2014 के चुनाव में भाजपा जिले की सात में से केवल दो ही सीटों पर जीत दर्ज कर पाई थी। पिछले वर्ष हिसार और नारनौंद की सीट पर भाजपा ने सीट दर्ज की थी, लेकिन इस बार पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु की नारनौंद की सीट गंवा दी, जबकि हिसार से डॉ. कमल गुप्ता की सीट बचाने के साथ नलवा और हांसी की सीट अपने खाते में जोड़ने में कामयाब रही। इसी प्रकार पारिवारिक विवाद के बाद इनेलो से टूटकर अलग पार्टी बनाने वाले दुष्यंत चौटाला का प्रदर्शन जिले में शानदार रहा और प्रदेश की 10 सीटों में से अकेले हिसार जिले से तीन सीटें जीतने में कामयाब रहे। हिसार जिले की सबसे महत्वपूर्ण सीट नारनौंद के साथ जजपा ने उकलाना और बरवाला सीट पर भी कब्जा जमाया।
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2014 में इनेलो ने जीती थीं तीन सीटें
वर्ष 2014 के चुनाव में इनेलो को तीन सीट हासिल हुई थीं। हालांकि इनेलो इस बार जिले से एक भी सीट हासिल नहीं कर पाई, लेकिन उससे टूटकर बनी पार्टी जजपा ने तीन सीटों पर कब्जा किया। इनेलो के पास 2014 में बरवाला, उकलाना और नलवा सीटें थीं। इस बार बरवाला, उकलाना के साथ नारनौंद सीट पर जजपा ने कब्जा किया, जबकि नलवा सीट इनेलो से खिसककर भाजपा के पास चली गई।
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तीन का चेहरा वही मुखौटा नया, दो ने पार्टी बदली तो किस्मत चमकी
इस बार के चुनाव के भी अजब-गजब समीकरण देखने को मिल रहे हैं। कुछ प्रत्याशियों का इस चुनाव में चेहरा वही रहा, लेकिन मुखौटा नया पहनकर चुनाव मैदान में उतरे और मतदाताओं ने भी उन्हें फिर से विधानसभा पहुंचाने का काम किया। इनमें आदमपुर से कुलदीप बिश्नोई वर्ष 2014 में हजकां से चुनाव लड़े थे, लेकिन इस बार उनका मुखौटा कांग्रेस था। इस प्रकार नलवा से रणबीर गंगवा ने इनेलो के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार उनका मुखौटा भाजपा थी। इसी तरह अनूप धानक उकलाना से इनेलो के टिकट पर चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचे थे। इन तीनों ने इन्हीं हलकों से चुनाव लड़ा था और विधानसभा पहुंचे थे। इस बार वे अपना मुखौटा (पार्टी) बदलकर चुनाव लड़े और मतदाताओं ने उन्हें फिर से विधानसभा भेजने का काम किया। इसी तरह दो प्रत्याशियों ने पिछला चुनाव अलग-अलग पार्टी या निर्दलीय के रूप में लड़ा था, लेकिन इस बार उन्होंने दूसरी पार्टी का दामन थामा और जनता ने उन्हें भी विधानसभा में भेजने का काम किया। इनमें हांसी से विनोद भ्याणा ने कांग्रेस से चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे। इस बार उन्होंने पार्टी बदली तो किस्मत चमक गई और विधानसभा पहुंच गए। इसी प्रकार नारनौंद से रामकुमार गौतम ने निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा था और हार गए थे, लेकिन इस बार उन्होंने जजपा का दामन थामा और जनता ने उन्हें विधानसभा के द्वार तक पहुंचा दिया।

आदमपुर से चुनाव जीतने के बाद खुशी जाहिर करते कांग्रेस नेता कुलदीप बिश्नोई। साथ हैं उनकी पत्नी रे?- फोटो : Hisar