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एएमसी से मिला एएसआई, बोला-जी-8 का हो चुका था ऑडिट तो रसीद फाड़ने का कोई मतलब ही नहीं
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हिसार। जी-8 नंबर 5443 की दो रसीदें गायब मिलने व संबंधित एएसआई से स्पष्टीकरण मांगने के मामले में एएसआई नगर पालिका कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों को साथ लेकर एएमसी डॉ. प्रदीप हुड्डा से मिला। इस दौरान एएसआई ने खुद को बेकसूर बताया। एएसआई ने कहा कि जी-8 पूरी भरने के साथ अगले ही दिन उसने पूरा कैश निगम कार्यालय में जमा करवा दिया गया था। ऐसे में उक्त जी-8 का ऑडिट भी हो गया था और ऑडिट होने के बाद जी-8 की रसीदें फाड़ने का कोई मतलब नहीं बनता।
इसके अलावा इतने समय से यह जी-8 सीएसआई के पास ही थी तो अब उन्होंने इस पर कैसे संज्ञान लिया। एएसआई ने जी-8 को लेकर कुछ सुबूत भी एएमसी के सामने प्रस्तुत किए। हालांकि मामले में दूसरे दिन भी यह साफ नहीं हो सका कि जी-8 से किसने रसीदें गायब कीं। बता दें कि नगर निगम की जनता मार्केट में खाद की बिक्री को लेकर एक एएसआई को जी-8 नंबर 5443 जारी की गई थी। अब सीएसआई ने उक्त एएसआई से यह कहते हुए स्पष्टीकरण मांग लिया कि जी-8 की रसीद नंबर 22 व 49 फाड़ी हुई हैं। इसे लेकर बुधवार को निगम कार्यालय में काफी हंगामा भी हुआ था।
बाद में फाड़ी गईं रसीदें : एएसआई
उक्त एएसआई ने जी-8 पर अपने हाथों से पूरी राशि का जोड़ 2110 रुपये लिखा हुआ है। मगर जी-8 की 98 रसीदों की राशि जोड़ी जाए तो यह जोड़ 2120 रुपये बनता है। इससे यह तो साफ होता है कि रसीदों को नहीं फाड़ा गया है। अगर रसीद फाड़ी जाती तो यह जोड़ कम होता, जबकि यहां जोड़ ज्यादा बन रहा है। उधर, इस मामले में एएसआई ने कहा कि उसने अधिकारियों के सामने अपना पक्ष व सुबूत रखे कि इस मामले में वह बेकसूर है। 16 व 17 जनवरी को रसीदें काटने के बाद 18 जनवरी को उसने जी-8 सीएसआई सुभाष सैनी के पास जमा करवा दी थी। अगर कुछ गड़बड़ थी तो उस समय क्यों नहीं पकड़ में आई। ये रसीदें बाद में ही फाड़ी गई हैं।
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इसके अलावा इतने समय से यह जी-8 सीएसआई के पास ही थी तो अब उन्होंने इस पर कैसे संज्ञान लिया। एएसआई ने जी-8 को लेकर कुछ सुबूत भी एएमसी के सामने प्रस्तुत किए। हालांकि मामले में दूसरे दिन भी यह साफ नहीं हो सका कि जी-8 से किसने रसीदें गायब कीं। बता दें कि नगर निगम की जनता मार्केट में खाद की बिक्री को लेकर एक एएसआई को जी-8 नंबर 5443 जारी की गई थी। अब सीएसआई ने उक्त एएसआई से यह कहते हुए स्पष्टीकरण मांग लिया कि जी-8 की रसीद नंबर 22 व 49 फाड़ी हुई हैं। इसे लेकर बुधवार को निगम कार्यालय में काफी हंगामा भी हुआ था।
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बाद में फाड़ी गईं रसीदें : एएसआई
उक्त एएसआई ने जी-8 पर अपने हाथों से पूरी राशि का जोड़ 2110 रुपये लिखा हुआ है। मगर जी-8 की 98 रसीदों की राशि जोड़ी जाए तो यह जोड़ 2120 रुपये बनता है। इससे यह तो साफ होता है कि रसीदों को नहीं फाड़ा गया है। अगर रसीद फाड़ी जाती तो यह जोड़ कम होता, जबकि यहां जोड़ ज्यादा बन रहा है। उधर, इस मामले में एएसआई ने कहा कि उसने अधिकारियों के सामने अपना पक्ष व सुबूत रखे कि इस मामले में वह बेकसूर है। 16 व 17 जनवरी को रसीदें काटने के बाद 18 जनवरी को उसने जी-8 सीएसआई सुभाष सैनी के पास जमा करवा दी थी। अगर कुछ गड़बड़ थी तो उस समय क्यों नहीं पकड़ में आई। ये रसीदें बाद में ही फाड़ी गई हैं।
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