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Hisar News: सरकारी स्कूल में पढ़ी अनु अब बनेगी नकीपुर गांव की पहली डॉक्टर
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हिसार। भिवानी जिले के गांव नकीपुर की बेटी अनु ने नीट परीक्षा में 2193वीं रैंक हासिल कर गांव का नाम रोशन किया है। सरकारी स्कूल में पढ़ाई करने वाली अनु अब अपने गांव की पहली एमबीबीएस डॉक्टर बनने जा रही हैं। खेती करने वाले किसान पिता की बेटी अनु ने सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया है।
अनु के गांव में 12वीं कक्षा तक का स्कूल नहीं है। दसवीं के बाद उसे रोजाना पड़ोसी गांव चहड़कलां जाकर पढ़ाई करनी पड़ती थी। इसके बाद डॉक्टर बनने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए पिता ने उसे हिसार भेजा जहां उसने कोचिंग लेकर तैयारी की। दूसरे प्रयास में अनु ने नीट में सफलता हासिल की।
8 से 10 घंटे पढ़ाई कर हासिल किया लक्ष्य
अनु ने बताया कि वह बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहती थी। माता-पिता ने उसके सपने को पूरा करने में हमेशा सहयोग किया। लक्ष्य हासिल करने के लिए वह रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती थी और सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाए रखी। उसने दसवीं और बारहवीं कक्षा में अपने ब्लॉक में टॉप किया था। अनु ने बताया कि उनके गांव से अब तक कोई भी लड़की एमबीबीएस डॉक्टर नहीं बनी है। वह गांव की पहली बेटी होगी, जो डॉक्टर बनकर सेवा करेगी।
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बेटी की मेहनत पर पिता को गर्व
अनु के पिता राजेंद्र ने बताया कि वह गांव में अपनी पांच एकड़ जमीन पर खेती करते हैं। बेटी के डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने बारहवीं के बाद उसे कोचिंग के लिए हिसार भेजा। पहले प्रयास में अनु मामूली अंतर से रह गई थी, लेकिन परिवार ने उसका हौसला बढ़ाया। दूसरे प्रयास में उसने सफलता हासिल कर ली। उन्होंने बताया कि अनु की मां ललिता देवी भी हमेशा उसे डॉक्टर बनने के लिए प्रेरित करती रहीं। आज बेटी ने पूरे परिवार का सपना पूरा कर दिया है।
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अनु के गांव में 12वीं कक्षा तक का स्कूल नहीं है। दसवीं के बाद उसे रोजाना पड़ोसी गांव चहड़कलां जाकर पढ़ाई करनी पड़ती थी। इसके बाद डॉक्टर बनने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए पिता ने उसे हिसार भेजा जहां उसने कोचिंग लेकर तैयारी की। दूसरे प्रयास में अनु ने नीट में सफलता हासिल की।
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8 से 10 घंटे पढ़ाई कर हासिल किया लक्ष्य
अनु ने बताया कि वह बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहती थी। माता-पिता ने उसके सपने को पूरा करने में हमेशा सहयोग किया। लक्ष्य हासिल करने के लिए वह रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती थी और सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाए रखी। उसने दसवीं और बारहवीं कक्षा में अपने ब्लॉक में टॉप किया था। अनु ने बताया कि उनके गांव से अब तक कोई भी लड़की एमबीबीएस डॉक्टर नहीं बनी है। वह गांव की पहली बेटी होगी, जो डॉक्टर बनकर सेवा करेगी।
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बेटी की मेहनत पर पिता को गर्व
अनु के पिता राजेंद्र ने बताया कि वह गांव में अपनी पांच एकड़ जमीन पर खेती करते हैं। बेटी के डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने बारहवीं के बाद उसे कोचिंग के लिए हिसार भेजा। पहले प्रयास में अनु मामूली अंतर से रह गई थी, लेकिन परिवार ने उसका हौसला बढ़ाया। दूसरे प्रयास में उसने सफलता हासिल कर ली। उन्होंने बताया कि अनु की मां ललिता देवी भी हमेशा उसे डॉक्टर बनने के लिए प्रेरित करती रहीं। आज बेटी ने पूरे परिवार का सपना पूरा कर दिया है।