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बर्बाद फसलों के लिए 172 करोड़ के मुआवजे का एलान, बालसमंद क्षेत्र को जीरो

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 24 Feb 2022 12:40 AM IST
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Announcement of compensation of 172 crores for ruined crops, zero to Balsamand area
हिसार। खरीफ-2021 के दौरान बारिश, जलभराव और सफेद मक्खी से फसलों के नुकसान की एवज में जिले के लिए 172 करोड़ 32 लाख 21 हजार रुपये की मुआवजा राशि जारी की गई है। बालसमंद और नारनौंद क्षेत्र के किसानों ने मुआवजा न मिलने पर विरोध जताया है। बालसमंद के किसानों ने वीरवार को लघु सचिवालय पर प्रदर्शन का एलान किया है। पूर्व वित्तमंत्री संपत सिंह ने मुआवजा में भेदभाव का आरोप लगाया है।
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उपायुक्त डॉ. प्रियंका सोनी ने बताया कि मुआवजा राशि सीधे किसानों के खाते में 28 फरवरी तक हस्तांतरित की जाएगी। उन्होंने बताया कि खरीफ-2021 के दौरान जिले के 198 गांवों में 2 लाख 9 हजार 880 किसानों की फसलें प्रभावित हुई थी। उन्होंने मुआवजा राशि का वितरण शीघ्र करने के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए हैं। राजस्व विभाग के अधिकारियों को संबंधित क्षेत्रों में रबी-2022 सीजन के दौरान फसलों में हुए नुकसान के आकलन के लिए गिरदावरी का कार्य भी जल्द पूरा कर रिपोर्ट भिजवाने के भी निर्देश दिए हैं। हिसार को 57 करोड़ 59 लाख, आदमपुर को 1 करोड़ 54 लाख, बालसंमद को शून्य, हांसी को 28 करोड़ 45 लाख, बरवाला को 24 करोड़ 64 लाख, उकलाना को 19 करोड़ 18 लाख, नारनौंद को 64 लाख, बास गांव को 21 करोड़, बालसंमद को शून्य राशि जारी की गई है।
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किसान नेता मास्टर सतबीर गढ़वाल, सुरेंद्र आर्य व जगदीश पूर्व सरपंच ने बताया कि पूरे जिले की सभी तहसीलों में वर्ष 2021 की खरीफ फसल का मुआवजा बांटा जा रहा है, जबकि बालसमंद तहसील के अंतर्गत आने वाले गांवों में खरीफ 2021 का कोई नुकसान दर्ज नहीं किया गया। बालसमंद तहसील के किसानों ने लंबे आंदोलन के बाद खरीफ 2020 की स्पेशल गिरदावरी की गई थी। अधिकारियों ने इसमें कोई नुकसान नहीं दिखाते हुए किसानों के साथ सौतेला रवैया किया है।
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बालसमंद व खेड़ी चौपटा के साथ मुआवजे में भेदभाव
मुआवजे के आवंटन में किसानों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। बालसमंद व खेड़ी चौपटा के किसानों को अभी तक फसलों का मुआवजा से वंचित कर दिया गया है। गठबंधन सरकार ने कदम-कदम पर किसान विरोधी होने का परिचय दिया है। जब से यह सरकार आई है तब से किसानों के ‘अच्छे दिन’ के बजाय बुरे दिन शुरू हो गए थे। - उमेद लोहान, राष्ट्रीय प्रवक्ता, इनेलो

सरकार ने बालसंमद तहसील के 19 गांवों के साथ फसलों के नुकसान के बदले मुआवजा राशि देने में सौतेला व्यवहार बरता है। यह क्षेत्र सबसे पिछड़ा हुआ है। सिंचाई के लिए पानी नाममात्र पहुंचता है और यहां बारिश भी कम होती है। लगभग हर वर्ष इस क्षेत्र के किसानों की फसलों पर बिगड़े हुए मौसम की मार भी पड़ती है। पिछले 2 वर्षों में इस क्षेत्र के किसानों को सरकार द्वारा मुआवजा भी नहीं दिया गया है। मैं किसानों के विरोध का समर्थन करता हूं। - प्रो. संपत सिंह, पूर्व वित्तमंत्री
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