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Hisar News: एनीमिया मुक्त अभियान 11 जून से शुरू होने की उम्मीद, 70 हजार लोगों की जांच का रखा लक्ष्य
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हांसी उपमंडल स्तरीय नागरिक अस्पताल।
हांसी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से एनिमिया मुक्त विशेष अभियान शुरू करने जा रहा है। जिसका नाम एनीमिया मुक्त अभियान 100 दिन रखा गया है। विशेष अभियान के तहत हर आयु वर्ग के व्यक्ति की एनीमिया जांच की जाएगी।
इस दौरान करीब 70 हजार लोगों की जांच का लक्ष्य रखा गया है। डॉ. परमजीत ने बताया कि अभियान को 6 हिस्सों में बांटा गया है। जिनमें 6 महीने से 5 साल तक, 6 से 10 साल, 11 से 19 साल, 20 से 49 साल, इससे ऊपर की उम्र के लोग व दुग्धपान कराने वाली महिलाएं शामिल है। यह अभियान 11 जून से शुरू होने की उम्मीद है जो आगामी 100 दिन तक चलेगा। इसके तहत 100 दिन में प्रत्येक मरीज की 3 बार जांच होगी। मरीजों को आयरन की गोलियां भी दी जाएंगी। इस दौरान जांचा जाएगा कि मरीज पर दवाइयों का कितना असर हो रहा है। करीब 14 आशा वर्कर, 6 एएनएम व स्कूल हेल्थ की 1 टीमें इस कार्य को करेंगी। एनीमिया की जांच शिविरों में तो होती ही है, साथ ही सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों की भी की जाएंगी।
एनीमिया विकसित होने का खतरा इनमें अधिक
स्त्रियों में, 2 साल से कम आयु के शिशु व छोटे बच्चे में, वृद्ध व्यस्क, जिनकी आयु 65 साल या उससे अधिक हो, उन व्यक्तियों में जो रक्त को पतला करने वाली दवाएं लेते है, पेट या आंत में अल्सर जैसी अन्य चिकित्सा स्थितियों में एनीमिया होने का खतरा अधिक रहता है।
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क्या है एनीमिया
एनीमिया, शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी या खराब लाल रक्त कोशिकाओं के कारण होता है। इस कारण शरीर के अंगों में आक्सीजन पहुंचना कम हो जाता है। इससे थकान, त्वचा में पीलापन, सांस फूलना, सिर घूमना, चक्कर आना या दिल की तेज धड़कन शामिल हो सकते हैं।
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इस दौरान करीब 70 हजार लोगों की जांच का लक्ष्य रखा गया है। डॉ. परमजीत ने बताया कि अभियान को 6 हिस्सों में बांटा गया है। जिनमें 6 महीने से 5 साल तक, 6 से 10 साल, 11 से 19 साल, 20 से 49 साल, इससे ऊपर की उम्र के लोग व दुग्धपान कराने वाली महिलाएं शामिल है। यह अभियान 11 जून से शुरू होने की उम्मीद है जो आगामी 100 दिन तक चलेगा। इसके तहत 100 दिन में प्रत्येक मरीज की 3 बार जांच होगी। मरीजों को आयरन की गोलियां भी दी जाएंगी। इस दौरान जांचा जाएगा कि मरीज पर दवाइयों का कितना असर हो रहा है। करीब 14 आशा वर्कर, 6 एएनएम व स्कूल हेल्थ की 1 टीमें इस कार्य को करेंगी। एनीमिया की जांच शिविरों में तो होती ही है, साथ ही सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों की भी की जाएंगी।
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एनीमिया विकसित होने का खतरा इनमें अधिक
स्त्रियों में, 2 साल से कम आयु के शिशु व छोटे बच्चे में, वृद्ध व्यस्क, जिनकी आयु 65 साल या उससे अधिक हो, उन व्यक्तियों में जो रक्त को पतला करने वाली दवाएं लेते है, पेट या आंत में अल्सर जैसी अन्य चिकित्सा स्थितियों में एनीमिया होने का खतरा अधिक रहता है।
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क्या है एनीमिया
एनीमिया, शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी या खराब लाल रक्त कोशिकाओं के कारण होता है। इस कारण शरीर के अंगों में आक्सीजन पहुंचना कम हो जाता है। इससे थकान, त्वचा में पीलापन, सांस फूलना, सिर घूमना, चक्कर आना या दिल की तेज धड़कन शामिल हो सकते हैं।