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हिसार के HAU का कमाल: तेल के उत्पादन में क्रांति लाएगी सरसों की पहली हाइब्रिड किस्म, 8 फीसदी होगी अधिक पैदावार

Wed, 02 Apr 2025 07:55 AM IST
नवीन दलाल श्याम नंदन कुमार, हिसार (हरियाणा)
श्याम नंदन कुमार, हिसार (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Wed, 02 Apr 2025 07:55 AM IST
सार

एचएयू के सरसों विशेषज्ञ डॉ. राम अवतार ने बताया कि किसानों को अगले साल तक इस हाइब्रिड किस्म का बीज उपलब्ध करवा दिया जाएगा। जैसे ही यह किस्म जारी व नोटिफाई होगी, कुछ बीज कंपनियां भी एमओयू करके बीज उत्पादन में हाथ बंटा सकती हैं।

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Amazing feat of Hisar's HAU: First hybrid variety of mustard will bring revolution in oil production
पककर तैयार हुई सरसों की फसल (सांकेतिक) - फोटो : संवाद

विस्तार

पांच साल में सरसों की पांच नई किस्में विकसित कर तेल उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) जल्द सरसों की एक और किस्म जारी करेगा। इस बार एचएयू के विज्ञानियों ने सरसों की हाईब्रिड किस्म आरएचएच 2101 विकसित की है। संस्थान के विज्ञानियों का दावा है कि यह किस्म उपज के साथ तेल उत्पादन में भी अब तक विकसित सभी किस्मों से बेहतर साबित होगी।

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हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने बताया कि संस्थान ने पहली बार हाइब्रिड सरसों की किस्म विकसित की है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के प्रोजेक्ट के तहत विकसित यह किस्म 28 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार देगी। मध्यम मोटे दाने वाली इस सरसों में 40 फीसदी तेल की मात्रा रहेगी। सिंचित क्षेत्र के लिए विकसित सरसों की यह फसल 135 से 142 दिन में तैयार हो जाएगी। इस किस्म को भिवानी जैसी रेतीली जमीन में दो से तीन सिंचाई और हिसार-जींद जैसी मिट्टी में एक सिंचाई की जरूरत होगी।
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एचएयू के अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया कि किसी भी हाइब्रिड किस्म को जारी होने के लिए पिछली हाइब्रिड किस्मों से कम से कम 5 प्रतिशत से अधिक पैदावार चाहिए। आरएचएच 2101 हाइब्रिड किस्म में 8 प्रतिशत अधिक पैदावार है। इस किस्म ने पिछले चार-पांच सालों के उत्पादन में बेहतर परिणाम दिए हैं। इसके एक हजार दानों का वजन 5 ग्राम से भी अधिक है।
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किसानों को अगले साल मिलेगा बीज
एचएयू के सरसों विशेषज्ञ डॉ. राम अवतार ने बताया कि किसानों को अगले साल तक इस हाइब्रिड किस्म का बीज उपलब्ध करवा दिया जाएगा। जैसे ही यह किस्म जारी व नोटिफाई होगी, कुछ बीज कंपनियां भी एमओयू करके बीज उत्पादन में हाथ बंटा सकती हैं। संस्थान की ओर से इस किस्म के पर्याप्त बीज उत्पादन के लिए प्रयास जारी हैं।

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