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2040 तक आर्थिक महाशक्ति बनने के लिए कृषि अनुसंधान बढ़ाना होगा : सतीश कुमार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 24 Feb 2026 12:59 AM IST
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Agricultural research will have to be increased to become an economic superpower by 2040: Satish Kumar
दो दिवसीय कांक्लेव में लगे स्टाल पर मॉडलों को देखते अध्यापक। 
हिसार। स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक सतीश कुमार ने कहा कि यदि भारत को 2040 तक विश्व की नंबर-वन आर्थिक महाशक्ति बनना है तो कृषि विज्ञान के क्षेत्र में शोध और विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हमारे एक राज्य से भी छोटा इस्राइल हर साल 1200 करोड़ रुपये के फूल निर्यात करता है, जबकि विश्व की सबसे अधिक कृषि भूमि होने के बावजूद भारत 700 करोड़ का निर्यात भी नहीं कर पा रहा।
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वह एचएयू के मौलिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित दो दिवसीय साइंस कॉन्क्लेव में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। हरियाणा स्टेट काउंसिल फॉर साइंस, इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि स्पेस टेक्नोलॉजी और फार्मास्युटिकल क्षेत्र में भारत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन कृषि में अभी काफी काम करने की जरूरत है। कृषि वैज्ञानिक यदि नए शोध कर खेती को लाभकारी बनाएं तो यही सच्ची देशभक्ति होगी।
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उन्होंने बताया कि अमेरिका अपनी जीडीपी का 4.2 प्रतिशत हिस्सा रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर खर्च करता है, जबकि भारत में यह आंकड़ा केवल 0.6 प्रतिशत है। अमेरिका की अर्थव्यवस्था 30 ट्रिलियन डॉलर की है, जिसमें से 9.5 ट्रिलियन डॉलर बौद्धिक संपदा से आता है। अमेरिका द्वारा किए गए पेटेंट की रॉयल्टी उसे मिलती है और किसी भी पेटेंट के उपयोग पर संबंधित व्यक्ति या संस्था को कंपनियां लगभग 6 प्रतिशत लाभ देती हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 300 वर्षों से आरएंडडी में 99 प्रतिशत काम अमेरिका और यूरोप ने ही किया है तथा बिजली, रेडियो, टीवी, बल्ब, मोबाइल, कंप्यूटर और इंटरनेट जैसी आधुनिक युग की बड़ी खोजें भी वहीं से हुई हैं।
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विज्ञान किसी भी राष्ट्र की प्रगति की आधारशिला
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए एचएयू के कुलपति प्रो. बलदेव राज कांबोज ने कहा कि विज्ञान किसी भी राष्ट्र की प्रगति की आधारशिला है। किसान सटीक खेती, ड्रिप सिंचाई, जैव प्रौद्योगिकी और एआई संचालित ड्रोन जैसी तकनीक अपनाकर उत्पादन बढ़ा सकते हैं। उन्होंने खेती को विषमुक्त बनाने के लिए रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के सीमित उपयोग पर जोर दिया। साथ ही घटती जोत और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिकों से अधिक प्रभावी शोध करने का आह्वान किया, ताकि कम लागत में अधिक उत्पादन लेकर किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत की जा सके।

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन पर आधारित स्किट प्रस्तुत की
कॉन्क्लेव के दौरान अतिथियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। स्नातकोत्तर शिक्षा अधिष्ठाता डॉ. रमेश यादव ने सभी का स्वागत किया। साइंस फोरम के सचिव डॉ. रजनीकांत ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जबकि मंच संचालन डॉ. कनिका ने किया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन पर आधारित स्किट प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
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