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Hisar News: आजीविका मिशन दे रहा स्वरोजगार की नई राह
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हिसार। दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय आजीविका मिशन (डीएवाई–एनएलएम) इच्छुक नागरिकों को स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है। इसके तहत शहरी क्षेत्रों में राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) और ग्रामीण क्षेत्रों में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) संचालित किए जा रहे हैं, जिससे महिलाओं और जरूरतमंद परिवारों को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
हरियाणा राज्य आरएलएम के तहत जिले के अधिकतर गांवों में स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) गठित किए जा चुके हैं। प्रत्येक समूह में 10 से अधिक महिलाएं शामिल हैं। इन समूहों के क्लस्टर एवं खंडस्तरीय संगठन भी बनाए गए हैं, जिससे इन्हें सामूहिक रूप से कार्य करने और लाभ उठाने में सहूलियत मिल रही है।
इन स्वयं सहायता समूहों को ऋण, अनुदान सहित विभिन्न सरकारी सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है। साथ ही इनके उत्पादों की बिक्री के लिए कारोबारी सहूलियत भी दी जा रही है। समूहों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लघु सचिवालय परिसर में दो दुकानें खोली गई हैं। इसके अलावा सरस मेले जैसे बड़े आयोजन भी नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं।
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पिछले माह आयोजित तीन दिवसीय राखीगढ़ी महोत्सव, शहर में लगे स्वदेशी मेले और गीता जयंती महोत्सव में इन समूहों को मुफ्त या रियायती दरों पर स्टॉल उपलब्ध करवाए गए थे। इन स्टॉलों पर महिलाओं द्वारा तैयार हस्तनिर्मित उत्पादों की बिक्री की गई।
अखबारी कागज से बनी झालर, बंदनवार, सजावटी सामग्री, चूड़ियां, कान्हा ड्रेस, हैंडलूम व हैंडीक्राफ्ट उत्पादों के साथ-साथ बाजरे के बिस्कुट, मेथी-लहसुन का अचार, गोंद के लड्डू, तिल-नारियल की बर्फी और लाइव चरखा लोगों को खासा पसंद आया। सूती धागे से तैयार फुलझड़ी, तकिए, झालर, दरी-गलीचे, पायदान, मोजे और टोपियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं।
इसके अलावा ताजा खाद्य पदार्थों के स्टॉल भी लगाए गए, जिनमें पॉपकॉर्न, जलेबी, चना चाट, गाजर का हलवा, गोलगप्पे, ताजा जूस, फ्रूट चाट, चाय, पापड़ और पकौड़े शामिल रहे। महानगरों से आए पर्यटकों ने अखबारी कागज और सूती धागे से तैयार क्राफ्ट की सराहना करते हुए जमकर खरीदारी की।
बरवाला के रमेश चंद्र, उकलाना के विनोद, आदमपुर के उमेश सहित स्थानीय लोगों, स्वयं सहायता समूहों की सदस्य महिलाओं और बुजुर्गों ने भी मेले का आनंद लिया। लोगों ने सरकार से राखीगढ़ी महोत्सव जैसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों को नियमित अंतराल पर आयोजित करने की मांग की।
एनआरएलएम समेत सभी सरकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसके तहत कई स्वयं सहायता समूह गठित कर उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लखपति दीदी योजना को भी काफी सराहना मिल रही है।
- वीरेंद्र श्योराण, जिला परियोजना प्रबंधक, एनएलएम, हिसार।
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हरियाणा राज्य आरएलएम के तहत जिले के अधिकतर गांवों में स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) गठित किए जा चुके हैं। प्रत्येक समूह में 10 से अधिक महिलाएं शामिल हैं। इन समूहों के क्लस्टर एवं खंडस्तरीय संगठन भी बनाए गए हैं, जिससे इन्हें सामूहिक रूप से कार्य करने और लाभ उठाने में सहूलियत मिल रही है।
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इन स्वयं सहायता समूहों को ऋण, अनुदान सहित विभिन्न सरकारी सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है। साथ ही इनके उत्पादों की बिक्री के लिए कारोबारी सहूलियत भी दी जा रही है। समूहों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लघु सचिवालय परिसर में दो दुकानें खोली गई हैं। इसके अलावा सरस मेले जैसे बड़े आयोजन भी नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं।
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पिछले माह आयोजित तीन दिवसीय राखीगढ़ी महोत्सव, शहर में लगे स्वदेशी मेले और गीता जयंती महोत्सव में इन समूहों को मुफ्त या रियायती दरों पर स्टॉल उपलब्ध करवाए गए थे। इन स्टॉलों पर महिलाओं द्वारा तैयार हस्तनिर्मित उत्पादों की बिक्री की गई।
अखबारी कागज से बनी झालर, बंदनवार, सजावटी सामग्री, चूड़ियां, कान्हा ड्रेस, हैंडलूम व हैंडीक्राफ्ट उत्पादों के साथ-साथ बाजरे के बिस्कुट, मेथी-लहसुन का अचार, गोंद के लड्डू, तिल-नारियल की बर्फी और लाइव चरखा लोगों को खासा पसंद आया। सूती धागे से तैयार फुलझड़ी, तकिए, झालर, दरी-गलीचे, पायदान, मोजे और टोपियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं।
इसके अलावा ताजा खाद्य पदार्थों के स्टॉल भी लगाए गए, जिनमें पॉपकॉर्न, जलेबी, चना चाट, गाजर का हलवा, गोलगप्पे, ताजा जूस, फ्रूट चाट, चाय, पापड़ और पकौड़े शामिल रहे। महानगरों से आए पर्यटकों ने अखबारी कागज और सूती धागे से तैयार क्राफ्ट की सराहना करते हुए जमकर खरीदारी की।
बरवाला के रमेश चंद्र, उकलाना के विनोद, आदमपुर के उमेश सहित स्थानीय लोगों, स्वयं सहायता समूहों की सदस्य महिलाओं और बुजुर्गों ने भी मेले का आनंद लिया। लोगों ने सरकार से राखीगढ़ी महोत्सव जैसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों को नियमित अंतराल पर आयोजित करने की मांग की।
एनआरएलएम समेत सभी सरकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसके तहत कई स्वयं सहायता समूह गठित कर उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लखपति दीदी योजना को भी काफी सराहना मिल रही है।
- वीरेंद्र श्योराण, जिला परियोजना प्रबंधक, एनएलएम, हिसार।